हनुमान केवल कोई पौराणिक पात्र, किंवदंती अथवा मात्र विग्रह (मूर्ति) नहीं अपितु प्रत्यक्ष (साक्षात) प्रकट मान हैं

हनुमान जयंती विशेष-
हनुमान केवल कोई पौराणिक पात्र, किंवदंती अथवा मात्र विग्रह (मूर्ति) नहीं अपितु प्रत्यक्ष (साक्षात) प्रकट मान हैं
-बंशीलाल टांक
हनुमान, बजरंगबली, महावीर, पवनपुत्र, अंजनीसुत इन प्रतिदिन, प्रतिपल पूज्य हनुमान अथवा राम-कृष्ण मंदिरों में प्रातः-सायं सुनाई देने वाले वे नाम हैं, जिन्हें बच्चे, बूढ़े, जवान, माताएं, बहनें सब कोई अच्छी प्रकार इन नामों से परिचित हैं। वैसे हनुमान जी के सहस्त्र नाम हैं, परंतु ये कुछ नाम हैं जिन्हें हर कोई जानता, समझता और मानता है।
हनुमान जी आज भी प्रत्यक्ष हैं, इसका प्रमाण क्या है? वैसे गोस्वामी तुलसीदासजी से लेकर आज तक कई साधकों को हनुमान जी के प्रत्यक्ष दर्शन हुए हैं-गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित ‘कल्याण’ में भी यह प्रकाशित हुआ है। सबसे बड़ा प्रत्यक्ष प्रमाण तो यह है कि आज भारत का कोई भी बड़ा-छोटा नगर, गाँव या मोहल्ला ऐसा नहीं है जहाँ हनुमान मंदिर नहीं हो। इतना ही नहीं, यह सुनी-सुनाई नहीं, आँखों देखी हकीकत है कि जहाँ रात के अंधेरे को छोड़िए, सांध्य होते ही जहाँ बियावान जंगल से निकलने में राहगीरों को जंगली जानवरों का भय होता था, वहाँ किसी ने पत्थरों-मिट्टी का छोटा सा चबूतरा बनाकर हनुमान जी की पत्थर की मूर्ति रखकर उस पर सिंदूर लगाकर प्राण-प्रतिष्ठा कर दी, तो देखते-ही-देखते उस कच्चे पत्थर-मिट्टी के चबूतरे के स्थान पर पक्का मंदिर बन गया जहां हर मंगलवार-शनिवार को कोई बाइक, साइकिल या कोई पैदल ही पहुँच जाएँगे। भजन, कीर्तन, सुंदरकांड, हनुमान चालीसा का उद्घोष-गान कानों में सुनाई देने लगेगा।
वैसे हनुमान जी को पवनपुत्र के नाम से विशेष जाना जाता है। पवन, वायु, हवा सब एक ही नाम हैं। हवा को इन आँखों से किसी ने देखा नहीं है और न कोई अभी तक ऐसा कैमरा बना जो हवा को अपने कैमरे की आँखों में कैद कर ले। परंतु छोटीसी साइकिल, बाइक, ट्रैक्टर और टनों वजन ले जाने वाले वाहनों के पहियों के ट्यूब में वह वायु ही तो है जिसे हमने देखा नहीं। सबसे सटीक उदाहरण हाल के ही समय का कोरोना का है। जैसे चंद्रमा पर धरती के मानव को उतारने वाला प्रसिद्ध विज्ञान केंद्र नासा भी आज तक कोरोना वायरस को पकड़ नहीं पाया। इसीलिए हनुमान जी चाहे आँखों से प्रत्यक्ष दर्शन नहीं दे सकें, परंतु पवनपुत्र-वायुपुत्र के रूप में उन्हें कोई नकार नहीं सकता और यही कारण है कि हनुमान जी को किसी एक संप्रदाय विशेष का नहीं मानकर प्रत्येक धर्मावलंबी हनुमान जी का सम्मान करते हैं। हनुमान मंदिर के सामने से जाते वक्त मन-ही-मन हनुमान जी को नतमस्तक हो जाएँगे।
विगत दिनों अज्ञानतावश अथवा दुराग्रह से चाहे भगवान राम के संबंध में अनर्गल बयानबाजी की गई हो, परंतु हनुमान जी का विरोध करते हुए न देखा, न सुना। लाखों-करोड़ों की संख्या में प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं- ‘‘नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा‘‘ कौन स्वस्थ रहना नहीं चाहेगा? ‘‘संकट तें हनुमान छुड़ावै।‘‘ शर्त यही है कि ‘‘मन क्रम बचन ध्यान जो लावै’’।
ज्ञानियों में सबसे अग्रणी, आगे, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, बलवानों में महाबलवान, स्वर्णकांति सा तेज, सभी गुणों की खान होते हुए सबसे सरल, विनम्र सेवक के रूप में सदैव तत्पर, ऐसे हनुमान जी के चरित्र का वर्णन कौन कर सकता है? जिन हनुमान जी के संबंध में स्वयं भगवान राम अपने मुख से कहते हैं-
‘‘सुनु कपि तोहि समान उपकारी।
नहिं कोउ सुर नर मुनि तनुधारी।।
प्रति उपकार करौं का तोरा। सनमुख होइ न सकत मन मोरा‘’।
सुनु सुत तोहि उरिन मैं नाहीं। देखेउँ करि बिचार मन माहीं।
पुनि पुनि कपिहि चितव सुरत्राता। लोचन नीर पुलक अति गाता।।
तब हम ऐसे वीर हनुमान जी के संबंध में कुछ कहना वाणी का, शब्दों का विलास ही हो सकता है। परंतु हनुमान जी की कृपा का प्रत्यक्ष अनुभव तभी पा सकते हैं, जब पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और विश्वास से हनुमान जी का स्मरण-ध्यान करें।



