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जिसके जीवन में मानव तन पाकर भगवत स्मरण साधु संग और परोपकार नहीं वह मनुष्य नहीं पशु है- रामस्नेही युवा संत दिग्विजय महाराज

जिसके जीवन में मानव तन पाकर भगवत स्मरण साधु संग और परोपकार नहीं वह मनुष्य नहीं पशु है- रामस्नेही युवा संत दिग्विजय महाराज


धर्मधाम गीता भवन में सत्संग प्रवचन का हुआ आयोजन

मन्दसौर। धर्मधाम गीता भवन में गीता भवन परमाध्यक्ष पू. स्वामी श्री रामनिवासजी महाराज के मार्गदर्शन में श्री रामेश्वरम् तीर्थ यात्री संघ मंदसौर के सौजन्य से रामस्नेही सम्प्रदाय के ओजस्वी युवा प्रखर भागवत प्रवक्ता संत श्री दिग्विजयजी महाराज चित्तौड़गढ़ के आशीर्वचन हुए।
संतश्री ने जहां भगवत कथा भगवान के नाम का स्मरण और सत्संग होता है, वह धरा साधना नहीं परम पुण्यमयी वन्दनी हो जाती है। आपने गीता भवन में प्रतिष्ठित भगवान कृष्ण के आकर्षक सुंदर श्रीविग्रह के दर्शन कर कहा कि गीता भवन में आकर उनका मन आल्हादित होकर उन्हें परम आत्मानंद का अनुभव हो रहा है। आपने कहा कि विगत दिनों उन्होंने रामेश्वर धाम में जो भागवत कथा कहीं उसका फल भगवान पशुपतिनाथ की पवित्र नगरी गीता भवन में आकर मिल गया है।
भजन का महत्व बताते हुए आपने का कि भोजन से हमारा शरीर तन पुष्ट होता है और भगवान के भजन से मन पुष्ट होता है। गीता अनुसार प्रत्याहार न करके अधिक भोजन से शरीर अस्वस्थ रोगी हो जाता है परन्तु भगवान का जितना अधिक स्मरण भजन ध्यान करेंगे मन उतना अधिक पुष्ट होकर भजन ध्यान में लगेगा। शांत स्वस्थ्य मन ही हमें भगवान की ओर बढ़ने में सहायक होगा। आपने कहा शरीर को स्वसथ रखने के लिये हमें सो काम छोड़कर पहले शुद्ध सात्विक भोजन करना चाहिये। हजार काम छोड़कर पहले स्नान करना चाहिये क्योंकि स्नान करने से शरीर आलस्य सुस्ती छोड़ कर एक दम चुस्त दुरूस्त हो जाता है। लाख काम छोड़कर हमें पहले परोपकार में लग जाना चाहिये और करोड़ों काम छोड़ कर जिस कार्य के लिये भगवान ने पशु पक्षी कटि पतंग आदि 84 लाख विभिन्न योनियों से छुड़ाकर देव दुलर्भ मानव तन प्रदान किया और इसे पाकर यदि हमनें केवल संसार के भोगों में जीवन व्यतीत कर दिया तो सोचो फिर एक पशु में और हमें क्या अंतर रहा।
भगवान की हमारे उपर सबसे पहले बड़ी कृपा मनुष्य शरीर मिला, इससे बढ़कर और परम सौभाग्य क्या होगा कि भगवान राम कृष्ण महावीर बुद्ध की परम पावन भारत भूमि में जनम मिला और फिर भी हम भगवान का भजन सुमिरन-ध्यान-सत्संग के लिये थोड़ा भी समय नहीं निकाले तो हमसे बड़ा अभागा और कौन होगा। संतों ने कहा है कि जब तलक है जिंदगी फुर्सत न होगी काम से-कुछ समय ऐसा निकालो प्रेम कर लो राम से।
इस अवसर पर रामेश्वर तीर्थ यात्री संघ मंदसौर द्वारा संतश्री को अभिनंदन पत्र भेंट किया गया। वाचन अशोक रत्नावत ने किया।
संतश्री का सम्मान किया- धर्मधाम गीता भवन ट्रस्ट उपाध्यक्ष जगदीश चौधरी, सचिव पं. अशोक त्रिपाठी, ट्रस्टी बंशीलाल टांक, शेषनारायण माली, इंजि. रामगोपाल गुप्ता, सुरेन्द्र फरक्या, ओम रत्नावत, अशोक रत्नावत, केशव सत्संग भवन ट्रस्ट अध्यक्ष जगदीश सेठिया, घनश्याम चोकड़िया, रामेश्वर तोषनीवाल पिपलियामंडी, पुष्कर धनोतिया पिपल्यामंडी, रामचन्द्र झंवर भीलवाड़ा, जयप्रकाश सोमानी, देवेन्द्र जोशी, देवप्रकाश सोमानी, रजनीश पुरोहित, विद्या उपाध्याय, अंजू तिवारी, पूजा बैरागी, पुष्पा गुप्ता, विमला फरक्या, पुष्पा बैरागी, मंजू राठौर, पुष्पा गौड़, शांति सौलंकी, हरदेवी सतनामी, राधा शर्मा आदि ने प्रारंभ में संतश्री का पुष्पहार से सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
संचालन पं. अशोक त्रिपाठी ने किया। आभार जगदीशचन्द्र चौधरी ने माना।

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