भगवान महावीर का मार्ग : आधुनिक समय में अहिंसा, संयम और सहअस्तित्व की आवश्यकता

महावीर स्वामी जयंती विशेष –
भगवान महावीर का मार्ग : आधुनिक समय में अहिंसा, संयम और सहअस्तित्व की आवश्यकता
भगवान महावीर जन्मकल्याणक का पावन अवसर हमें केवल अतीत की स्मृति में ले जाने के लिए नहीं, बल्कि वर्तमान को सुधारने और भविष्य को दिशा देने के लिए प्रेरित करता है। महावीर का जीवन त्याग, तप और आत्मअनुशासन का ऐसा प्रकाश है, जो आज के अशांत और भौतिकता से भरे युग में भी समान रूप से प्रासंगिक है।
भगवान महावीर ने मनुष्य को सबसे पहले स्वयं को जीतने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि बाहरी विजय से अधिक महत्वपूर्ण है अपने भीतर के क्रोध, अहंकार, लोभ और मोह पर विजय प्राप्त करना। यही आत्मविजय सच्ची स्वतंत्रता है और यही जीवन का वास्तविक धर्म है।
आज विज्ञान और प्रगति के इस युग में सुविधाएँ बढ़ी हैं, परंतु शांति कम हुई है। प्रतिस्पर्धा ने सहयोग को पीछे छोड़ दिया है और स्वार्थ ने संवेदना को कमजोर कर दिया है। ऐसे समय में महावीर का अहिंसा सिद्धांत केवल धार्मिक विचार नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व को बचाने का मार्ग बन जाता है। अहिंसा का अर्थ केवल किसी को न मारना नहीं, बल्कि किसी के प्रति द्वेष न रखना भी है।
भगवान महावीर ने अपरिग्रह का जो सिद्धांत दिया, वह आज के उपभोक्तावादी समाज के लिए विशेष संदेश है। आवश्यकता से अधिक संग्रह ही संघर्ष का कारण बनता है। यदि मनुष्य सीमित साधनों में संतोष करना सीख ले, तो समाज में असंतुलन और अशांति दोनों कम हो सकते हैं।
जन्मकल्याणक महोत्सव हमें यह स्मरण कराता है कि धर्म केवल पूजा या परंपरा का नाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की सही पद्धति है। जब अहिंसा व्यवहार में, संयम विचार में और करुणा हृदय में बसती है, तभी समाज में सच्चा विकास होता है।
आइए, भगवान महावीर जन्मकल्याणक के इस पावन अवसर पर हम यह संकल्प लें कि हम आधुनिक जीवन जीते हुए भी अपने मूल्यों को नहीं भूलेंगे। अहिंसा को आचरण में, संयम को स्वभाव में और सहअस्तित्व को समाज में स्थान देंगे — यही भगवान महावीर के प्रति सच्ची श्रद्धा होगी, और यही मानवता का सुरक्षित भविष्य है।
महावीर जन्मकल्याणक की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं
लेखक :- नयन हेमन्त जैन (सीतामऊ)
प्रदेश संयोजक, जैन ग्लोबल युवा महासंघ,मध्यप्रदेश


