शक्ति और आस्था का अद्भुत केंद्र ,ऐसा मंदिर जहां भैरव और भवानी एक ही आसान पर विराजित

शक्ति और आस्था का अद्भुत केंद्र ,ऐसा मंदिर जहां भैरव और भवानी एक ही आसान पर विराजित
नालछा माता मंदिर पूरे विश्व में यह ही एकमात्र ऐसा मंदिर हैं जहां बाबा भैरव और भवानी एक ही गादी पर विराजमान है। नालछा माता की प्रतिमा सुबह से लेकर रात तक तीन रूप धारण करती है। जिसमें पहली बाल्यवस्था दूसरी, युवावस्था और तीसरी वृद्धावस्था शामिल रहती है। मां नालछा को मंदसौर की आराध्य देवी भी माना जाता है।
आप इस मंदिर में घूमने के लिए आ सकते हैं। पशुपतिनाथ मंदिर के बाद नालछा माता का मंदिर मंदसौर जिले में प्रसिद्ध है। यहां पर आपको नालछा माता के दर्शन करने के लिए मिलते है, जो देवी दुर्गा जी का स्वरुप है।
आपको यहां पर दो दीपस्तंभ देखने के लिए मिलेंगे, जिसमें दीपक जलाया जाता है, जो बहुत ही भव्य लगते हैं।आप इस मंदिर में नालछा माता के साथ भैरव बाबा की प्रतिमा एक साथ देख सकते हैं, जो आपको यहीं पर देखने के लिए मिलेगी।
यहां पर नवरात्रि के समय बहुत सारे लोग नालछा माता जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। यहां पर गार्डन भी है, जहां पर आप बैठ सकते हैं और बच्चों के मनोरंजन के लिए गार्डन में झूले भी लगे हुए हैं।
नवरात्रि मे यहा अग्नि पर भक्तो द्वारा आग मे चलने का प्रचलन भी है जिसे अग्नि की चूल के नाम से जाना जाता है….. आपको यहां पर आकर बहुत ही अच्छा लगेगा।
बताया जाता है कि राजा दशरथ के द्वारा स्थापित की गई नालछा माता की प्रतिमा सुबह से लेकर रात तलक 3 रूप धारण करती है. पहली बाल्यवस्था, दूसरी युवावस्था और तीसरी वृद्धावस्था.
यहां गोद भराई से गूंज उठती है किलकारियों की गूंज
चूल व कन्या पूजन का होता है आयोजन
नालछा माता मंदिर परिसर में दशहरे पर बाड़ी विसर्जन के साथ चूल का आयोजन होता है जिसमें बड़ी संख्या में भक्त दहकते अंगारों से निकलते हैं। वंही शारदीय नवरात्रि में जय माता दी ग्रुप द्वारा कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है। चैत्र नवरात्रि में समिति द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है



