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रामायण कथा का प्रारंभिक पवित्र स्थल मखौड़ा धाम का योगी सरकार के प्रयासों से हो रहा विकास-अमित सिंह मोनू 

रामायण कथा का प्रारंभिक पवित्र स्थल मखौड़ा धाम का योगी सरकार के प्रयासों से हो रहा विकास-अमित सिंह मोनू

बस्ती बस्ती मंडल में प्राचीन पवित्र स्थलों की पुनर्खोज और विकास की मुहिम तेज हो गई है। इस अभियान का केंद्र बिंदु है मखौड़ा धाम, जो भगवान श्रीराम के जन्म से जुड़ी रामायण कथा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यह धाम अब क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन आकर्षण बन रहा है, जहां योगी सरकार के प्रयासों से बड़े पैमाने पर विकास कार्य हो रहे हैं। मखौड़ा धाम बस्ती जिले की हर्रैया तहसील में मनोरमा नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत प्राचीन तीर्थ स्थल है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहां राजा दशरथ ने महर्षि वशिष्ठ की सलाह पर ऋषि श्रृंगी के नेतृत्व में पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था। इसी यज्ञ के फलस्वरूप भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। यज्ञ के दौरान मनोरमा नदी का जल दिव्य और पवित्र हो गया था, जिससे आज भी श्रद्धालु यहां स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं। यह स्थान रामकथा का उद्भव स्थल माना जाता है, जहां से अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा भी शुरू होती है। लंबे समय तक उपेक्षा के बाद अब मखौड़ा धाम को नई पहचान मिल रही है। उत्तर प्रदेश सरकार, विशेष रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में, इसे रामायण सर्किट और श्री राम अवतरण कॉरिडोर का हिस्सा बना रही है। इस कॉरिडोर से बस्ती, अयोध्या, अंबेडकर नगर, बाराबंकी और गोंडा जैसे जिलों को जोड़ा जा रहा है।मंदिर के महंत सूरजदास के अनुसार, योगी सरकार के आशीर्वाद से पर्यटन विभाग से लगभग 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है, जिससे मंदिर परिसर में लाइटिंग, पोखरी का सुंदरीकरण, पथ और मार्ग निर्माण जैसे कार्य पूरे किए गए हैं। सरकार लगातार इस धाम के विकास पर ध्यान दे रही है, जिसमें 84 कोसी परिक्रामा मार्ग के साथ अन्य मंदिरों का नवीनीकरण भी शामिल है।पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख आस्था स्थलों को जोड़कर एक संगठित तीर्थ पर्यटन नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। इसमें प्राचीन मंदिरों, पौराणिक स्थलों और पवित्र भूगोल की पुनर्खोज पर जोर है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़कें, आधुनिक सुविधाएं और कनेक्टिविटी से यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर मजबूत स्थान बना सकता है।स्थानीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव धार्मिक पर्यटन के विस्तार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या से दुकानदारों, फूल-प्रसाद विक्रेताओं, परिवहन संचालकों, होटल-धर्मशाला मालिकों और मेला-आधारित व्यापारियों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। साथ ही, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यंजन और पारंपरिक उत्पादों को बाजार मिलेगा, जिससे ग्रामीण-शहरी दोनों क्षेत्रों में आय बढ़ेगी।सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण यह पहल केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण पर भी केंद्रित है। विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों, मेलों और उत्सवों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ा जा रहा है।नई पहचान की ओर बस्ती मंडल प्रशासन, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदाय की संयुक्त भागीदारी से बस्ती मंडल एक सशक्त धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है। मखौड़ा धाम को पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान मिलने से जिले की पहचान नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगी, और यह श्रद्धालुओं व पर्यटकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनेगा।

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