मंदसौरमध्यप्रदेश

समाचार मध्यप्रदेश मंदसौर 17 मार्च 2026 मंगलवार

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मैंने स्वयं एचपीवी वैक्सीन लगवाई है, इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है : कलेक्टर श्रीमती गर्ग

कलेक्टर ने एचपीवी वैक्सीन जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

मंदसौर 16 मार्च 26/ जिले में एचपीवी वैक्सीनेशन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग ने सोमवार को प्रातः 11:00 बजे कलेक्ट्रेट कार्यालय से एचपीवी वैक्सीन जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह जागरूकता रथ जिले के विभिन्न गांवों में भ्रमण कर लोगों को एचपीवी वैक्सीन के प्रति जागरूक करेगा।

इस अवसर पर कलेक्टर श्रीमती गर्ग ने कहा कि उन्होंने स्वयं एचपीवी वैक्सीन लगवाई है और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। यह एक सुरक्षित और प्रभावी टीका है, जो सर्वाइकल कैंसर से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के भ्रम में न आएं और अपनी बेटियों को यह टीका अवश्य लगवाएं।

कलेक्टर ने बताया कि एचपीवी वैक्सीन के प्रचार-प्रसार के लिए जिले में “एचपीवी टीका मित्र” भी बनाए गए हैं, जो नर्सिंग कॉलेज की छात्राएं हैं। ये टीका मित्र गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क कर उन्हें इस वैक्सीन के प्रति जागरूक करेंगी। उन्होंने कहा कि इस वैक्सीन के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार बहुत जरूरी है, ताकि अधिक से अधिक बच्चियां इसका लाभ ले सकें।

उन्होंने बताया कि जिले में 14 से 15 वर्ष की बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगाई जा रही है। इसके लिए जिले में 10 वैक्सीनेशन केंद्र बनाए गए हैं, जहां नियमित रूप से टीकाकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टीका लगने के बाद केवल हल्का दर्द हो सकता है, जो अन्य टीकों की तरह सामान्य है।

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे स्कूल, आंगनवाड़ी और अन्य माध्यमों से अभिभावकों तक सही जानकारी पहुंचाएं। साथ ही सभी फील्ड ऑफिसर अपने कार्यालयों में एचपीवी वैक्सीन से संबंधित प्रचार सामग्री भी प्रदर्शित करें। उन्होंने यह भी कहा कि सभी अधिकारी अपने स्तर पर बालिकाओं को चिन्हित कर उनका वैक्सीनेशन सुनिश्चित करें, ताकि कम समय में अधिक से अधिक बच्चियों को इस टीके का लाभ मिल सके।

इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत श्री अनुकूल जैन, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, नर्सिंग कॉलेज का स्टाफ तथा एचपीवी टीका मित्र, पत्रकार उपस्थित थे।

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भीषण गर्मी में प्यासों को मिलेगी राहत: जिला चिकित्सालय में प्रथम ‘जल मंदिर’ का शुभारंभ
मंदसौर | भीषण गर्मी की दस्तक के साथ ही आमजन की सुविधा और सेवा के संकल्प को दोहराते हुए ‘पंछी बचाओ अभियान’ द्वारा जनसेवा की दिशा में एक और सार्थक कदम उठाया गया है। सोमवार को जिला चिकित्सालय परिसर स्थित जच्चा-बच्चा वार्ड के बाहर प्रथम ‘जल मंदिर’ (प्याऊ) का भव्य शुभारंभ किया गया।
अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके साथ आए परिजनों को ठंडे और स्वच्छ पेयजल के लिए भटकना न पड़े, इसी उद्देश्य के साथ इस पुनीत कार्य की शुरुआत की गई है। विशेष रूप से जच्चा-बच्चा वार्ड के बाहर इसकी स्थापना होने से प्रसूताओं के परिजनों को काफी सुविधा होगी। अभियान के संस्थापक राकेश भाटी ने बताया कि “नर सेवा ही नारायण सेवा है। भीषण गर्मी में प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा धर्म है। पंछी बचाओ अभियान का यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा।”
संस्था के सदस्यों ने जानकारी दी कि यह जल मंदिर सभी के सहयोग और जनसेवा की भावना से स्थापित किया गया है। सोमवार शाम 4:00 बजे आयोजित शुभारंभ कार्यक्रम में अभियान से जुड़े सदस्यों और चिकित्सालय स्टाफ की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस पुनीत अवसर पर पंछी बचाओ अभियान के  संरक्षक विनय दुबेला, संस्थापक राकेश भाटी, नगर उपाध्यक्ष नेहा संचेती, संगठन मंत्री ओम कुमावत, विधायक प्रतिनिधि कमलेश जैन, देवेंद्र राव, फरदीन शाह, दिनेश पंवार, अमन चौहान, राजेश चौधरी, हरीश सहित कई सेवाभावी सदस्य उपस्थित थे। संस्था ने संकल्प लिया है कि शहर के अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी इसी तरह के ‘जल मंदिर’ स्थापित किए जाएंगे।

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पानी सप्लायर पीएचई विभाग की अनुमति के बाद ही कर सकेंगे पानी सप्लाई : कलेक्टर श्रीमती गर्ग

साप्ताहिक अंतर विभागीय समीक्षा बैठक संपन्न

मंदसौर 16 मार्च 26/ कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग की अध्यक्षता में साप्ताहिक अंतर विभागीय समीक्षा बैठक सुशासन भवन स्थित सभागार में आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने आवश्यक निर्देश दिए।

बैठक के दौरान कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले में संचालित सभी निजी पानी सप्लायर अब पीएचई विभाग की अनुमति के पश्चात ही पानी की सप्लाई कर सकेंगे। बिना अनुमति के किसी भी प्रकार की पानी सप्लाई नहीं की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि पानी सप्लाई करने से पहले पानी की गुणवत्ता, सत्यापन तथा अन्य आवश्यक मानकों की जांच कराना अनिवार्य होगा। खराब पानी सप्लाई करने की स्थिति में संबंधित के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाएगी। सभी एसडीएम को पानी सप्लायर के साथ बैठक कर नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

कलेक्टर ने ग्रीष्मकाल को देखते हुए पेयजल व्यवस्थाएं सुचारू रखने के निर्देश दिए। उन्होंने नगरीय निकायों एवं जनपद सीईओ को पेयजल आपूर्ति की पूर्व योजना बनाकर नियमित समीक्षा करने को कहा। सभी सीएमओ को नई बसाहटों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा नए पानी कनेक्शन के आवेदनों का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए। कॉलोनीवार जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी स्थानों पर पर्याप्त कनेक्शन उपलब्ध हों। साथ ही गर्मी के दौरान टैंकर व्यवस्था, पेयजल परिवहन, जल टंकियों एवं जल स्रोतों की नियमित सफाई भी सुनिश्चित की जाए। जल स्रोतों की जीआईएस मैपिंग करने के भी निर्देश दिए गए।

बैठक में गेहूं उपार्जन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने बताया कि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का कार्य 1 अप्रैल से प्रारंभ होगा। इसके लिए सभी उपार्जन केंद्रों पर बारदान की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा बारदान आने पर सभी ब्लॉकों में समान रूप से वितरण किया जाए। उपार्जन कार्य से जुड़े तहसीलदार एवं नायब तहसीलदारों को ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रशिक्षण देने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही उपार्जन केंद्रों की सूची भेजकर उनका सत्यापन करने को कहा गया।

स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी नगर पालिका, नगर परिषद एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता गतिविधियां निरंतर चलती रहें। प्रत्येक ब्लॉक में 4 से 5 गांवों को मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जाए, जहां घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था सक्रिय रूप से संचालित हो। ठोस कचरा प्रबंधन के लिए प्रोसेसिंग क्लस्टर भी विकसित किए जाएं।

सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने विभागवार शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग करने और विशेष रूप से पेयजल से संबंधित शिकायतों का त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया गया कि ऐसे डॉक्टर जो ओपीडी में नियमित रूप से उपस्थित नहीं हो रहे हैं, उनके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए।

बैठक के अंत में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, एनसीडी कार्यक्रम तथा टीकाकरण कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को कलेक्टर श्रीमती गर्ग द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

बैठक में अपर कलेक्टर श्रीमती एकता जायसवाल, सीईओ जिला पंचायत श्री अनुकूल जैन सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित रहे।

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पशुपतिनाथ मंदिर में 19 मार्च को होगा सूर्य उपासना कार्यक्रम

नाट्य प्रस्तुति “सम्राट विक्रमादित्य” का होगा मंचन

मंदसौर 16 मार्च 26/ विक्रम संवत् 2083 के शुभारंभ के अवसर पर 19 मार्च 2026 को प्रातः 10 बजे सूर्य उपासना कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम मंदसौर स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में आयोजित होगा।

कार्यक्रम के दौरान संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश तथा मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के सहयोग से “सम्राट विक्रमादित्य” विषय पर नाट्य प्रस्तुति का मंचन किया जाएगा। इस नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय संस्कृति, परंपरा और विक्रम संवत् के महत्व को दर्शाया जाएगा।

इसके साथ ही कार्यक्रम के दौरान “भारत का नववर्ष विक्रम संवत्” विषयक पुस्तिका भी उपस्थित नागरिकों को अध्ययन हेतु उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे लोग भारतीय नववर्ष की परंपरा और ऐतिहासिक महत्व से परिचित हो सकें।

विक्रम संवत् नववर्ष के उपलक्ष्य में जिले के प्रमुख मंदिरों एवं महत्वपूर्ण स्थलों पर ब्रह्मध्वज भी स्थापित किए जाएंगे। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहेंगे। फोटो संलग्न

तीसरा जल गंगा संवर्धन अभियान-2026

जल है तो कल है का नहीं है कोई विकल्प, बूंद-बूंद बचाने के करेंगे हर संभव प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

म.प्र. नदियों का मायका, जल आत्मनिर्भरता से ही बनेगा समृद्ध प्रदेश

प्रदेश में 19 मार्च से शुरू होगा जल गंगा संवर्धन अभियान

100 दिवसीय अभियान में जल संरक्षण के होंगे कार्य

नववर्ष प्रतिपदा पर शिप्रा तट उज्जैन में होगा राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ

वृहद् अभियान के लिए सरकार कर रही व्यापक तैयारियाँ

मंदसौर 16 मार्च 26 / मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है। इसे बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम हर गांव, हर शहर और हर नागरिक को जल संरक्षण के कार्यों से जोड़ना चाहते हैं। समाज और सरकार जब साथ मिलकर काम करेंगे, तो मध्यप्रदेश समृद्धि की दिशा में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। प्रदेश के नागरिकों को पानी बचाने के लिए सक्रिय रूप से जुड़ना होगा, इससे मध्यप्रदेश जल संचयन और प्रबंधन में देश का एक मॉडल स्टेट बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संबंधी जरूरतों की पूर्ति और भावी पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों की सुरक्षा की मंशा से प्रदेश सरकार एक बार फिर बड़े पैमाने पर जल गंगा संवर्धन अभियान शुरु करने जा रही है। भारतीय नववर्ष प्रतिपदा (गुढ़ी पड़वा) के शुभ अवसर पर 19 मार्च को उज्जैन की शिप्रा नदी तट से इस राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान 30 जून तक अनवरत् चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण एक सामाजिक आंदोलन बनाना है। प्रदेश की जनता, पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न शासकीय विभागों की साझेदारी से यह अभियान प्रदेश में जल संवर्धन की नई मिसाल स्थापित करेगा।

जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की पहल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण की परम्परा सदियों पुरानी है। प्राचीन काल से ही तालाब, कुएं और बावड़ियां सिर्फ़ जल के स्रोत न होकर सामाजिक जीवन का केंद्र हुआ करते थे। सरकार उसी परम्परा को आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के जरिए पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य नई जल संरचनाएं बनाने के साथ ही प्रदेश में जल संरक्षण की संस्कृति को समृद्ध करना भी है। अभियान से गांव-गांव में लोगों को यह समझाया जाएगा कि वर्षा जल का संरक्षण, भूजल का पुनर्भरण और जल स्रोतों का संरक्षण जीवन और विकास दोनों के लिए अनिवार्य है।

जनभागीदारी है अभियान की सबसे बड़ी शक्ति

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता का सबसे बड़ा आधार जनभागीदारी है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के इस महाअभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करे। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में श्रमदान कर तालाब और कुओं की सफाई की जाए। वर्षा जल के संचयन की व्यवस्था घरों में भी करने के उपाय करे। जल स्रोतों के आस-पास स्वच्छता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करेंगे, तो प्रदेश जल समृद्ध राज्य बन सकता है। जल गंगा संवर्धन अभियान से जल संरक्षण को तो बढ़ावा मिलेगा ही, साथ ही इसके दूरगामी पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ भी होंगे। इस अभियान से भू-जल स्तर में सुधार, किसानों को सिंचाई के लिए और अधिक पानी, जल अभाव/अल्प वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों को राहत, पर्यावरण-संरक्षण को बल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही भविष्य के लिए बेहतर जल प्रबंधन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा की चुनौती के दृष्टिगत जल प्रबंधन आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार का यह अभियान इसी दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

पहले चरण में बनीं 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाएं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2024 में राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का पहला चरण प्रारंभ किया गया था। इसमें जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए गए। पहले चरण में कुल 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया। इनमें प्रमुख रूप से तालाब निर्माण एवं पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत नहर निर्माण, सूखी नदियों का पुनर्जीवन एवं जल संरक्षण से जुड़ी अन्य संरचनाएं शामिल हैं। इन कामों से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल भी उपलब्ध हुआ है।

दूसरे चरण के काम भी हो रहे तेजी से

वर्ष-2025 में चलाए गए जल संरक्षण अभियान के दूसरे चरण में भी व्यापक स्तर पर कार्य हुए। इस चरण में प्रदेश में 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य अभी भी प्रगति पर है। इन कार्यों में खेत तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नहर, कुएं, बावड़ियां तथा अन्य जल संचयन संरचनाएं बनाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल उपलब्धता को स्थायी रूप से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

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