मंदसौर जिला

सरकारी जमीन पर कब्जा… और अफसरों का खेल! जनसुनवाई में आवेदन लेने से भी कतराए अधिकारी

पहले बेदखली आदेश, अब बता रहे “आपसी विवाद”… क्या अतिक्रमणकारियों को बचा रहे अधिकारी?

बंशीदास बैरागी मगराना

मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ तहसील के उप तहसील संजीत के ग्राम मगराना में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण का मामला अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन को खुद नायब तहसीलदार ने पहले अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए बेदखली आदेश जारी किया था, अब उसी मामले को “आपसी विवाद” बताकर टालने की कोशिश की जा रही है।

जानकारी के अनुसार भूमि सर्वे नंबर 993, रकबा 0.48 हेक्टेयर शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए फरियादी बापूलाल पिता देवीलाल गायरी ने मंगलवार को मंदसौर कलेक्टर की जनसुनवाई में आवेदन दिया। फरियादी ने अपर कलेक्टर को बताया कि कई महीने पहले नायब तहसीलदार द्वारा अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया गया था, लेकिन आज तक उस आदेश का पालन नहीं हुआ और कब्जा जस का तस बना हुआ है।

जनसुनवाई के दौरान अपर कलेक्टर ने उप तहसील संजीत के नायब तहसीलदार राहुल डाबर से मोबाइल पर बात की। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि नायब तहसीलदार ने शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के मामले को ही “आपसी विवाद” बता दिया। इसके बाद अपर कलेक्टर ने फरियादी से कहा कि संबंधित अधिकारी से बात हो गई है, जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर अतिक्रमण हटाया जाएगा, इसलिए आवेदन वापस ले जाओ।

फरियादी का आरोप है कि मामले को निपटाने के बहाने अपर कलेक्टर ने आवेदन ही लेने से इनकार कर दिया। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी ग्राम मगराना में मिंडारा हाई स्कूल के पास की बेशकीमती शासकीय भूमि पर भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया था, जिसे तत्कालीन सरपंच रामप्रहलाद पाटीदार के प्रयासों से अतिक्रमण मुक्त कराया गया था। आज वही जमीन स्कूल के बच्चों के लिए खेल मैदान के रूप में उपयोग हो रही है।

ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि आने वाले समय में क्षेत्र में संदीपनि सीएम राइस शासकीय विद्यालय बनने वाला है। यदि शासकीय भूमि इसी तरह कब्जे में चली गई तो भविष्य में विद्यालय के लिए जमीन कहाँ से मिलेगी?

अब बड़ा सवाल यह है कि जब खुद राजस्व अधिकारी ने पहले अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था, तो फिर उसी मामले को आपसी विवाद बताकर टालने की कोशिश क्यों की जा रही है? क्या अतिक्रमणकारियों को बचाने के लिए अधिकारियों को गुमराह किया जा रहा है, या फिर कहीं और ही खेल चल रहा है?

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