हमें धर्मनिरपेक्ष नहीं धर्मसापेक्ष होना चाहिए-पूज्य श्री गौरदास जी महाराज

हमें धर्मनिरपेक्ष नहीं धर्मसापेक्ष होना चाहिए-पूज्य श्री गौरदास जी महाराज
मल्हारगढ़। श्री भरत जी का चरित्र संपूर्ण रामचरितमानस का सार है उनके चरित्र को गाने में कोई समर्थ नहीं है सारा जगत राम नाम जपता है पर श्री राम भरत जी का नाम जपते हैं ब्रजलीला में जो गोपी तत्व है वही रामलीला में भरत तत्व हैं त्याग निष्ठा समर्पण की भक्ति का दूसरा नाम भरत है।
यह बात वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक श्री गौरदास जी महाराज ने नगर में हरि कथा सत्संग समिति द्वारा आयोजित श्री राम भक्तमाल कथा में कहीं । आपने कहा कि संत एक प्रवृत्ति है ग्रस्ति जीवन में रहकर कोई भी संत बन सकते हैं ,जहां सारे संसार सभी कामनाएं और अशांति का अंत हो जावे उसे संत कहते हैं। आपने बताया कि कथा सुनने से सभी को लाभ होता है यदि भगवान के प्रेमी कथा सुनेंगे तो उनकी बाहरी शांत होगी और यदि साधारण व्यक्ति सुनेगा तो वह भगवान प्राप्ति के मार्ग पर अग्रसर होगा। उन्होंने कहा की सनातन धर्म में इसलिए मुखाग्नि दी जाती है कि व्यक्ति का मुख अब राम नाम बोलने लायक नहीं रहा।
वर्तमान परिस्थितियों की चर्चा करते हुए महाराज जी ने कहा कि देश के विभाजन के बाद सत्ता संभालने वाले राजनीतिज्ञों ने ऐतिहासिक भुल की है हमारा देश धर्मनिरपेक्ष नहीं धर्म सापेक्ष होना चाहिए वर्तमान की सारी विकृतियों के कारण धर्मनिरपेक्षता की धारणा है भारत कोई धर्मशाला नहीं है। आपने दिल्ली की घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यदि रंग का व्यापार करना हराम नहीं है ,गुब्बारा बेचना हराम नहीं है और यदि गलती से रंग पड़ जाए वह हराम कैसे आज ना तो ब्राह्मण की निवेश की और ना ही क्षत्रिय की ,ना दलित की ,आज सिर्फ सफल व प्रबल हिंदूओ की आवश्यकता है। कथा यजमान सत्येंद्र रामेश्वर पाटीदार अमरपुरा, रमेशचंद विजयवर्गीय,शिवलाल पाटीदार जगदीशचंद्र विजयवर्गीय, संजय रत्नावत महेशचंद्र विजयवर्गीय, समाजसेवी ओमप्रकाश बटवाल ,नाहरगढ़ के सुरेश जैन शिक्षक कालुदास बैरागी ,नितिन शर्मा सहित अनेक भक्तजनों ने महाआरती का लाभ लिया। कथा बड़ी संख्या में महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित थे।



