झालावाड़डग

चौमहला में शीतला सप्तमी का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया

चौमहला में शीतला सप्तमी का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया

चौमहला / झालावाड़

रिपोर्ट रमेश मोदी

गंगधार–चौमहला क्षेत्र में सोमवार को शीतला सप्तमी का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने ठंडे पकवानों से शीतला माता की पूजा-अर्चना कर घर-परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की।

कुछ राज्यों में शीतला माता का पूजन अष्टमी के दिन भी किया जाता है। इस दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता है, इसलिए लोग एक दिन पहले ही भोजन तैयार कर लेते हैं और अगले दिन बासी भोजन करते हैं। इसी कारण इस पर्व को “बासौड़ा” भी कहा जाता है, जो होलिका दहन के सात दिन बाद मनाया जाता है।

चौमहला कस्बे के राम-हनुमान मंदिर परिसर स्थित शीतला माता मंदिर में तड़के चार बजे से ही महिलाओं की भीड़ उमड़ने लगी, जो दोपहर तक जारी रही। महिलाएं सोलह श्रृंगार कर और सुंदर परिधानों में सजधज कर मंदिर पहुंचीं तथा माता का पूजन कर ठंडे पकवानों का भोग लगाया और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

पूजन की पूर्व संध्या यानी रविवार शाम को महिलाओं ने माता की पूजा के लिए बासौड़ा और विभिन्न पकवान तैयार किए। सोमवार सुबह इन पकवानों से माता की पूजा-अर्चना कर परिवार की खुशहाली की कामना की।

पूजन के बाद महिलाओ ने घर लौटकर दरवाजे के बाहर कुमकुम और हल्दी से स्वास्तिक बनाकर अपने हाथों के निशान लगाए , जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहे। इसके बाद परिवार के सभी सदस्यों के साथ एक दिन पहले बनाया हुआ ठंडा एवं बासी भोजन ग्रहण किया ।

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