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हाईकोर्ट का फैसला, कांग्रेस विधायक मलोहत्रा  का चुनाव शून्य घोषित, बीजेपी के पूर्व मंत्री रावत को घोषित किया विधायक 

हाईकोर्ट का फैसला, कांग्रेस विधायक मलोहत्रा  का चुनाव शून्य घोषित, बीजेपी के पूर्व मंत्री रावत को घोषित किया विधायक 

ग्वालियर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने विजयपुर विधानसभा उपचुनाव 2024 से जुड़ी चुनाव याचिका पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन निरस्त कर दिया है।

मध्यप्रदेश की विजयपुर विधानसभा उपचुनाव से जुड़े विवादित मामले में सोमवार को ग्वालियर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया। यह फैसला जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद सुनाया।

न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ ने चुनाव याचिका क्रमांक 24/2024 पर फैसला सुनाते हुए कहा कि मुकेश मल्होत्रा ने फॉर्म-26 के शपथपत्र में लंबित आपराधिक मामलों में आरोप तय होने की जानकारी छिपाई और गलत घोषणा की कि आरोप तय नहीं हुए हैं। अदालत ने इसे मतदाताओं से महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना माना।

हाईकोर्ट ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में प्रत्याशी द्वारा आपराधिक पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी देना अनिवार्य है ताकि मतदाता उम्मीदवार के बारे में सही जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकें। लेकिन मुकेश मल्होत्रा ने दो लंबित आपराधिक मामलों में आरोप तय होने की जानकारी छिपाई और आरोपों की प्रकृति भी गलत बताई। अदालत के अनुसार यह आचरण मतदाताओं को गुमराह करने वाला है।

रिकॉर्ड से यह भी सामने आया कि एक मामले में महिलाओं सहित तीन लोगों से मारपीट के आरोप थे, जबकि शपथपत्र में इसे केवल मामूली विवाद बताया गया। कोर्ट ने माना कि प्रत्याशी को मामलों की पूरी जानकारी थी और वह कानून की पढ़ाई भी कर चुका है, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि गलत जानकारी अनजाने में दी गई।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उम्मीदवार द्वारा लंबित मामलों में आरोप तय होने की जानकारी छिपाना चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करता है और मतदाताओं के स्वतंत्र मताधिकार के प्रयोग में बाधा पैदा करता है। यह कृत्य जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत “अनुचित प्रभाव”  की श्रेणी में आता है और इसे भ्रष्ट आचरण माना जाएगा।

पूरे मामले में कोर्ट ने विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा को 15 दिन के भीतर अपील करने का मौका दिया है. वहीं हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद इसे बीजेपी के लिए बड़ी कानूनी जीत के रूप में देखा जा रहा है. वहीं आने वाले दिनों में इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई भी देखने को मिल सकती है.

क्यों निरस्त किया चुनाव?

बीजेपी प्रत्याशी रामनिवास रावत के वकील एम. पी. एस. रघुवंशी का कहना है कि न्यायालय बार-बार कर रहा है कि जन प्रतिनिधियों को एक एफिडेविट चुनाव लड़ने के पहले नामांकन पत्र के साथ देना चाहिए. ताकि उसमें अपने क्रिमिनल रिकॉर्ड को बताएगा. उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में जो भी संबंधित उम्मीदवार है, उसको यह बताना पड़ेगा कि हमारे ऊपर कितने क्रिमनल केस हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा द्वारा जो चार क्रिमिनल केस थे, उनकी अधूरी जानकारी दी गई. इसके अलावा, कुछ जानकारियां नहीं दी गई. जिसको माननीय उच्च न्यायालय ने गलत प्रैक्टिस मानते हुए कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त कर दिया है. जो दूसरे नंबर पर बीजेपी प्रत्याशी राम निवास रावत, तो उनको विजय घोषित किया गया है. वहां से विधायक घोषित कर दिया है।

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