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उद्यानिकी महाविद्यालय, मंदसौर में तीन दिवसीय व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम का शुभारंभ

उद्यानिकी महाविद्यालय, मंदसौर में तीन दिवसीय व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम का शुभारंभ
उद्यानिकी महाविद्यालय, मंदसौर में आईसीएआर विकास अनुदान के अंतर्गत अनुसूचित जाति उपयोजना (एससी-एसपी) के तहत तीन दिवसीय अनुसूचित जाति लाभार्थी व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ उत्साहपूर्वक किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, संप्रेषण कौशल एवं नेतृत्व क्षमता का समग्र विकास करना है।
इस कार्यक्रम के मुख्य प्रशिक्षक डॉ. कुषाल राउत, निदेशक, कम्युनिकेयर, पुणे रहे। उन्होंने अपने प्रेरक एवं व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को सकारात्मक सोच, प्रभावी संवाद कौशल, समय प्रबंधन, लक्ष्य निर्धारण, टीम वर्क तथा साक्षात्कार कौशल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। प्रशिक्षण के दौरान समूह चर्चा, प्रस्तुतीकरण एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई।
इस कार्यक्रम के पीछे महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. दीपक हरि रानाडे की प्रेरणादायी भूमिका रही, जिन्होंने इस कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम के समन्वयक के रूप में डॉ. रूपेश चतुर्वेदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महाविद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के व्यक्तित्व विकास में मील का पत्थर सिद्ध होंगे तथा उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक परिवेश में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने हेतु प्रेरित करेंगे।
तीन दिवसीय यह कार्यक्रम उत्साहपूर्ण वातावरण में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें विश्वविद्यालय स्तर पर अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिभागी सक्रिय रूप से सहभागिता कर रहे हैं।
उद्यानिकी महाविद्यालय, मंदसौर में आईसीएआर विकास अनुदान के अंतर्गत अनुसूचित जाति उपयोजना (एससी-एसपी) के तहत तीन दिवसीय अनुसूचित जाति लाभार्थी व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ उत्साहपूर्वक किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, संप्रेषण कौशल एवं नेतृत्व क्षमता का समग्र विकास करना है।
इस कार्यक्रम के मुख्य प्रशिक्षक डॉ. कुषाल राउत, निदेशक, कम्युनिकेयर, पुणे रहे। उन्होंने अपने प्रेरक एवं व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को सकारात्मक सोच, प्रभावी संवाद कौशल, समय प्रबंधन, लक्ष्य निर्धारण, टीम वर्क तथा साक्षात्कार कौशल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। प्रशिक्षण के दौरान समूह चर्चा, प्रस्तुतीकरण एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई।
इस कार्यक्रम के पीछे महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. दीपक हरि रानाडे की प्रेरणादायी भूमिका रही, जिन्होंने इस कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम के समन्वयक के रूप में डॉ. रूपेश चतुर्वेदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महाविद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के व्यक्तित्व विकास में मील का पत्थर सिद्ध होंगे तथा उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक परिवेश में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने हेतु प्रेरित करेंगे।
तीन दिवसीय यह कार्यक्रम उत्साहपूर्ण वातावरण में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें विश्वविद्यालय स्तर पर अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिभागी सक्रिय रूप से सहभागिता कर रहे हैं।



