मृत्यु के अंधेरे में भी जलाया उजाला; ललिता देवी के नेत्रदान से दो नेत्रहीनों को मिलेगी नई रोशनी, शोक में भी गुप्ता परिवार बना मिसाल

मृत्यु के अंधेरे में भी जलाया उजाला; ललिता देवी के नेत्रदान से दो नेत्रहीनों को मिलेगी नई रोशनी, शोक में भी गुप्ता परिवार बना मिसाल
भवानीमंडी। कहते हैं सच्चा परोपकार वही है, जो सबसे कठिन घड़ी में भी मानवता का साथ न छोड़े। झालरापाटन में गुप्ता परिवार ने यही कर दिखाया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा, लेकिन उसी क्षण उन्होंने ऐसा निर्णय लिया, जो दो नेत्रहीनों के जीवन में स्थायी प्रकाश बनकर पहुंचेगा।
मेड़तवाल समाज झालरापाटन के पूर्व अध्यक्ष सूरजमल गुप्ता की धर्मपत्नी ललिता देवी शनिवार रात्रि को पैर फिसलने से छत से नीचे गिर गईं। सिर पर गंभीर चोट और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उन्हें तत्काल कोटा ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने अंतिम सांस ली। यह समाचार परिवार और समाज के लिए अत्यंत हृदय विदारक था।
घर पर पार्थिव शरीर पहुंचते ही शोक का माहौल छा गया। रोते-बिलखते परिवार के बीच भी सूरजमल गुप्ता ने साहस का परिचय देते हुए पुत्र अशोक और निर्मल से ललिता देवी के नेत्रदान को लेकर चर्चा की। अशोक गुप्ता पूर्व से ही भारत विकास परिषद भवानीमंडी के नेत्रदान अभियान से जुड़े रहे हैं, इसलिए परिवार ने इस पुनीत कार्य के लिए सहमति दे दी।
दामाद मोहित गुप्ता के माध्यम से नेत्रदान संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा के नेत्र उत्सरक डॉ. कुलवंत गौड़ ज्योति-रथ के साथ प्रातः झालरापाटन पहुंचे। परिवारजनों और समाज के लोगों की उपस्थिति में विधिवत प्रक्रिया पूरी कर दोनों कॉर्निया सुरक्षित प्राप्त किए गए।
डॉ. कुलवंत गौड़ ने बताया कि ललिता देवी का कॉर्निया पूरी तरह स्वस्थ पाया गया है। इसे आई बैंक जयपुर भेज दिया गया है, जहां से यह दो असहाय नेत्रहीनों को नई दृष्टि प्रदान करेगा।
नेत्रदान की प्रक्रिया में पदम गुप्ता, अतुल गुप्ता, हरी गुप्ता और अजय गोयल सहित समाज के कई लोगों ने सक्रिय सहयोग किया।
इस हृदय विदारक घटना की सूचना मिलते ही कस्बे और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे। सभी ने गुप्ता परिवार के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।
नेत्रदान उपरांत शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा परिवार को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
डॉ. कुलवंत गौड़ ने कहा, “नेत्रदान ऐसा महादान है, जो किसी के जीवन के अंधकार को दूर कर देता है। गहन शोक के क्षणों में लिया गया यह निर्णय परिवार के लिए भी आत्मिक संतोष का कारण बनता है।”
ललिता देवी भले ही इस संसार से विदा हो गईं, लेकिन उनकी आंखों की रोशनी अब दो घरों में नई सुबह बनकर पहुंचेगी। यह निर्णय न केवल एक श्रद्धांजलि है, बल्कि समाज को नेत्रदान के प्रति जागरूक करने वाला प्रेरक संदेश भी है।



