
रिपोर्टर जितेंद्र सिह चंद्रावत जडवासा
पुराने मीटर के मुकाबले 3 गुना तक ज्यादा आ रहे बिल, करणी सेना ने दी आंदोलन की चेतावनी
ढोढर। रतलाम जिले में बिजली कंपनी द्वारा लगाए जा रहे ‘स्मार्ट मीटर’ अब आम आदमी के लिए ‘आफत’ बन गए हैं। जावरा, पिपलोदा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन मीटरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि मीटर लगते ही उनके बिजली बिलों में 200 से 300 फीसदी तक का उछाल आया है। आलम यह है कि जो परिवार पहले ₹800 का बिल भरते थे, उन्हें अब ₹3000 से ₹4000 तक के बिल थमाए जा रहे हैं।
बिना सूचना कट रही बिजली, सर्वर की भी समस्या
स्मार्ट मीटर के सॉफ्टवेयर और सर्वर में तकनीकी खामियों के कारण उपभोक्ताओं को बैलेंस खत्म होने की सही जानकारी नहीं मिल रही है। बिना किसी पूर्व सूचना के आधी रात को भी बिजली काट दी जा रही है, जिससे बीमार बुजुर्गों और पढ़ाई कर रहे बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारियों के पास जाने पर वे इसे ‘तकनीकी सटीकता’ बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं, जिससे जनता में आक्रोश और बढ़ गया है।
07 दिन का अल्टीमेटम: चक्काजाम की तैयारी
इस मुद्दे को लेकर अब जिले का सामाजिक पारा चढ़ गया है। करणी सेना और कई स्थानीय संगठनों ने प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि 7 दिनों के भीतर मीटरों की लैब टेस्टिंग सार्वजनिक नहीं की गई और बढ़े हुए बिलों को वापस नहीं लिया गया, तो पूरे रतलाम जिले में उग्र आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा।
जनता के तीखे सवाल-
अगर खपत वही है, तो मीटर बदलने के तुरंत बाद यूनिट्स में इतना उछाल कैसे?
1.बिजली कंपनी ने मीटर लगाने से पहले जनता को इसके टैरिफ और सॉफ्टवेयर की ट्रेनिंग क्यों नहीं दी?
2.शिकायतों के निराकरण के लिए ग्राम पंचायत या वार्ड स्तर पर ‘हेल्प डेस्क’ क्यों नहीं बनाई गई?
क्या कहते हैं उपभोक्ता?
“मेरे घर में सिर्फ दो पंखे और एक टीवी चलता है। पुराना बिल ₹600 आता था, स्मार्ट मीटर लगने के बाद इस महीने ₹2800 का बिल आया है। यह सीधे तौर पर जनता की जेब पर डाका है।”



