झालावाड़पचपहाड़ (Pachpahar)

दो बैलों की मौत के बाद किसान परिवार ने किया उनका मौसर , 2000 लोगों के भंडारे का किया आयोजन 

दो बैलों की मौत के बाद किसान परिवार ने किया उनका मौसर , 2000 लोगों के भंडारे का किया आयोजन 

भवानीमंडी. । ( जगदीश पोरवाल ) ग्रामीण क्षेत्रों में जब से ट्रैक्टर का चलन प्रारंभ हुआ उसके बाद से धीरे-धीरे कर बैल जोड़ी से खेती का हांकने और जोतने का काम भी नहीं के बराबर रह गया है । बावजूद जिसके पास बैल जोड़ी है वह बैलों से आज भी अघात प्रेम कर घर के सदस्य जैसा मानते हैं ।

बैलों से परिवार के सदस्यों जैसा लगाव भवानीमंडी उपखंड के ग्राम सरकनिया में देखने को मिला अलग-अलग समय पर दो बैलों की मृत्यु के बाद उनके मालिकों ने उनका दाह संस्कार कर तथा शोक पत्रिका छपवाकर भण्डारे का आयोजन किया उन्हें केवल पशु नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य मानते हुए परम्परागत रीति-रिवाजों के साथ सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर श्रद्धांजलि दी।

विगत 20 वर्षों से यह बैल जोड़ी किसान के पास परिवार के सदस्यों की तरह रह रही थी :-

किसान सौदान सिंह, कुशाल सिंह, उमराव सिंह, धीरप सिंह, मेघ सिंह, मनोहर सिंह और बहादुर सिंह ने बताया कि उनके परिवार में 20 साल से 2 बैल थे। जिनमे से एक बैल रूपालिया की मौत कुछ दिनों पूर्व हो गई थी। वही दूसरे बैल सागु की मौत 9 जनवरी को हो गई। जिसको लेकर किसान परिवार ने रविवार को विधिवत पूजा-पाठ कर बैलों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

बैल किसान के जीवन में खेती की रीढ़ होते हैं :-

ग्रामीणों का कहना है कि बैल किसान के जीवन और खेती की रीढ़ होते हैं, ऐसे में उनकी सेवा और सम्मान करना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। इस भावुक और प्रेरणादायक घटना ने यह संदेश दिया कि परम्पराएं केवल रस्म नहीं, बल्कि संस्कार होती हैं।

क्षेत्र में किसान की इस पहल की सराहना हो रही है और इसे मानवीय मूल्यों की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

बैलो की अस्तियों को गंगा जी में विसर्जन किया गया एवं भंडारे का आयोजन भी किया :- 

किसान परिवार ने अपने अन्नदाता बैलों के निधन पर बाकायदा शोक पत्रिका छपवाई और शोकाकुल परिवार की तरह ग्रामीणों व परिचितों को कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया। एक फरवरी को आयोजित कार्यक्रम में सत्यनारायण भगवान की कथा हुई, गंगा माता का गंगोज किया गया और पूर्णिमा रविवार को 2000 लोगों के भंडारे का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पहुंचकर बैलों को श्रद्धांजलि अर्पित की ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
WhatsApp Icon
Whatsapp
ज्वॉइन करें
site-below-footer-wrap[data-section="section-below-footer-builder"] { margin-bottom: 40px;}