द वॉयस ऑफ यूथ’ से ‘अंतर बैंड’ तक का सफर, आज रिलीज होगा संविधान सांग

‘द वॉयस ऑफ यूथ’ से ‘अंतर बैंड’ तक का सफर, आज रिलीज होगा संविधान सांग
हरदा जिले के छोटे से गाँव अबगाँव से निकलकर संगीत के मंचों तक पहुँचे दो युवाओं— अनूज और जनार्दन—की कलात्मक यात्रा आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर है। सिनर्जी संस्थान की ‘चन्जुलूम फेलोशिप’ से शुरू हुआ यह सफर आज ‘अंतर बैंड’ के पहले आधिकारिक गाने के रिलीज के साथ एक नई ऊंचाई छूने जा रहा है। लगभग चार साल पहले फेलोशिप के दौरान, अनूज और जनार्दन ने ‘द वॉयस ऑफ यूथ’ (The Voice of Youth) नामक प्रोजेक्ट की नींव रखी थी। उनका उद्देश्य युवाओं को अभिव्यक्ति का एक मंच देना था। वक्त के साथ यह विचार और गहरा हुआ और इसने *अंतरा बैंड* का स्वरूप ले लिया। आज यह बैंड केवल संगीत नहीं, बल्कि एक नवाचार भरी वैचारिक बन चुका है। अंतर बैंड’ की पहचान उनका अनूठा संगीत है। जहाँ एक ओर वे संत कबीर की निर्गुण विचारधारा के जरिए इंसानी जड़ों की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय संविधान के मूल्यों (समता, बंधुत्व और न्याय) को अपने सुरों में पिरोते हैं। हरदा के विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में अपनी छाप छोड़ने के बाद, अब वे डिजिटल दुनिया में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। संविधान को समर्पित सुर
यह गीत केवल संगीत नहीं, बल्कि देश के प्रति एक अटूट निष्ठा है। अनूज और जनार्दन का मानना है कि संगीत के जरिए संविधान के संदेश को समाज की आखिरी पंक्ति तक पहुँचाया जा सकता है। इस गाने के शब्द हर भारतीय के गौरव को झकझोरते हैं।
गाने की मुख्य पंक्तियाँ इस प्रकार हैं
“मान मेरा संविधान, इससे चले भारत देश मेरा…” तो यह महज गीत की पंक्तियाँ नहीं रह जातीं, बल्कि यह हर भारतीय की सामूहिक प्रतिज्ञा बन जाती है। यह गीत हमें याद दिलाता है कि हमारा देश किसी भीड़ से नहीं, बल्कि उस संविधान से चलता है जो हम सबको एक धागे में पिरोता है।


