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शंकराचार्य के कथित अपमान पर भगवा परिषद का तीव्र रोष, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग

शंकराचार्य के कथित अपमान पर भगवा परिषद का तीव्र रोष, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग

बरेली/ प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ कथित अभद्र व्यवहार और उनके शिष्यों से मारपीट की घटना ने सनातन समाज में आक्रोश पैदा कर दिया है। इस मामले में भगवा परिषद, उत्तर प्रदेश ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे सनातन धर्म पर सीधा हमला करार दिया है।भगवा परिषद के प्रवक्ता संतोष कुमार उपाध्याय ने जारी प्रेस नोट में कहा कि हिंदुओं के देवतुल्य शंकराचार्य को माघ मेले में पैदल चलने के लिए मजबूर करना घोर पाप है। वे अकेले पालकी पर सवार थे, जबकि उनके शिष्य पैदल चल रहे थे। शंकराचार्य के साथ किया गया अभद्र व्यवहार और एक शिष्य की बेरहमी से पिटाई सनातन धर्म पर खुला हमला है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य कानून से बहुत ऊपर हैं, लेकिन सत्ता के नशे में नेता उन्हें दोषी ठहराने पर तुले हुए हैं। इस मानसिकता से हिंदू धर्म लगातार कमजोर हो रहा है।उपाध्याय ने आशंका जताई कि सरकार अपनी इज्जत बचाने के लिए शंकराचार्य को आतंकवादी घोषित कर सकती है। उन्होंने सभी सनातनियों से अपील की कि इस धार्मिक मुद्दे पर शंकराचार्य के साथ खड़े हों और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ ईशनिंदा के आरोप में सख्त कार्रवाई की मांग करें।घटना मौनी अमावस्या के दौरान हुई, जब शंकराचार्य संगम स्नान के लिए पालकी पर जा रहे थे। पुलिस ने पालकी रोक दी और पैदल चलने का अनुरोध किया, जिसके बाद शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। शंकराचार्य ने इसका विरोध करते हुए स्नान बहिष्कार कर दिया और अनशन पर बैठ गए। उनके समर्थकों का दावा है कि पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई शिष्य घायल हुए।दूसरी ओर, माघ मेला प्रशासन का कहना है कि शंकराचार्य को सम्मानपूर्वक पैदल चलने का अनुरोध किया गया था, क्योंकि परंपरा और सुरक्षा कारणों से पालकी की अनुमति नहीं थी। प्रशासन ने कोई अपमान होने से इनकार किया है। साथ ही, शंकराचार्य की उपाधि पर चल रहे कानूनी विवाद का हवाला देते हुए उन्हें नोटिस जारी किया गया है, जिसमें 24 घंटे में उपाधि साबित करने को कहा गया है।

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