समस्यामंदसौरमंदसौर जिला

नाले से लगी सड़क पर गलत जगह रेलिंग, मौत को दे रहा न्योता, ईशाकपुर फंटे-राणाखेड़ा मार्ग पर पीडब्ल्यूडी की लापरवाही उजागर

नाले से लगी सड़क पर गलत जगह रेलिंग, मौत को दे रहा न्योता, ईशाकपुर फंटे-राणाखेड़ा मार्ग पर पीडब्ल्यूडी की लापरवाही उजागर

मंदसौर। जिले के ईशाकपुर फंटे से राणाखेड़ा मार्ग पर बनी सड़क पर किया गया गलत निर्माण अब आम जनता के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। सुरक्षा के नाम पर बनाई गई रेलिंग खुद जानलेवा साबित हो रही है। नियमों के अनुसार जहां रेलिंग केवल नाले (खाल) की ओर लगाई जानी थी, वहीं निर्माण एजेंसी ने सड़क के बीचों-बीच भी रेलिंग खड़ी कर दी है, जिससे यह मार्ग अब दुर्घटनाओं का केंद्र बनता जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि निर्माण स्थल पर कोई सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। न ठेकेदार का नाम, न निर्माण लागत, न योजना का विवरण, न ही विभागीय जानकारी। इससे साफ जाहिर होता है कि पारदर्शिता के नियमों की खुली अवहेलना की गई है और यह पूरा काम अज्ञात ठेकेदार के भरोसे छोड़ दिया गया।

रोजाना सैकड़ों लोग जोखिम भरें रास्ते से गुजरते-

यह मार्ग कई गांवों को जोड़ता है, जिससे रोजाना दोपहिया, चारपहिया वाहन, ट्रैक्टर, स्कूल वाहन और पैदल यात्री गुजरते हैं। सड़क के बीच लगी रेलिंग रात के समय दिखाई नहीं देती, खासकर बरसात और कोहरे में यह मौत का फंदा साबित हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार वाहन चालक आखिरी समय पर ब्रेक लगाकर हादसे से बचे हैं।

लोक निर्माण विभाग की निगरानी पर सवाल-

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब लोक निर्माण विभाग PWD विभाग की लापरवाही का नतीजा है। बिना तकनीकी निरीक्षण, बिना मानकों के पालन और बिना सूचना बोर्ड लगाए निर्माण को स्वीकृति देना गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया? क्या डिजाइन की जांच हुई? क्या सुरक्षा मानकों का पालन हुआ? इन सभी सवालों के जवाब अभी तक प्रशासन ने नहीं दिए हैं।

सड़क निर्माण मानकों का खुला उल्लंघन-

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की रेलिंग दिशा-निर्देशों के खिलाफ है। रेलिंग का उद्देश्य दुर्घटनाओं से बचाव करना होता है, लेकिन गलत स्थान पर लगी रेलिंग खुद दुर्घटना का कारण बन रही है।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा कार्रवाई कि मांग 

ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि पूरी सड़क का तकनीकी ऑडिट कराया जाए, दोषी PWD अधिकारियों पर कारवाई हो, अज्ञात ठेकेदार की पहचान की जाए, गलत जगह लगी रेलिंग तुरंत हटाई जाए, निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाया जाए। ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ और कोई बड़ा हादसा हुआ, तो इसकी परी जिम्मेदारी प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की होगी। यह मामला सिर्फ एक सड़क का नहीं, बल्कि जन सुरक्षा को लेकर सरकारी जवाबदेही का है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
WhatsApp Icon
Whatsapp
ज्वॉइन करें
site-below-footer-wrap[data-section="section-below-footer-builder"] { margin-bottom: 40px;}