महाकाल मुक्तिधाम में मनाया मकर संक्रांति पर्व, मिठाई खिलाकर दी बधाईयां शुभकामनाएं


जीवन में पंतग कि तरह उड़ कर ऊंचाईयां हासिल करें पर परिवार भगवान से डोर बंधन मत तोड़ना -महाराज श्री
सीतामऊ।मकर संक्रांति और लोहड़ी का त्योहार यह त्योहार सर्दी के अंत और नई फसल के आगमन का प्रतीक है। जो अच्छी फसल और घर में खुशहाली व समृद्धि लाता हैं लोहड़ी शब्द ‘तिल’ और ‘रोड़ी’ के मेल से बना माना जाता है, और इस त्योहार पर सूर्य देव और अग्नि देव का आभार व्यक्त करने के लिए तिल, गुड़, रेवड़ी, गजक, मूंगफली आदि चीज़ें अलाव में अर्पित कर भगवान का धन्यवाद ज्ञापित करते हैं।वही इस दिन गुल्ली डंडा खेलने पतंग उड़ाते हैं। और एक दूसरे को खिलाकर खुशियां मनाते है।
इस क्रम में नगर के महाकाल मुक्तिधाम परिसर में आज बुधवार को मकर संक्रांति लोहड़ी पर्व पर मिलन समारोह श्रम दान का आयोजन किया गया। इस दौरान गिल्ली डंडा प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया तत्पश्चात महाकाल मुक्तिधाम समिति के तत्वाधान में महंत श्री जितेंद्र दास जी महाराज वरिष्ठ समाजसेवी श्री दिनेश सेठिया श्री अशोक जैन विवेकानंद श्री चंद्रबिहारी चौहान समाजसेवी डा अरविंद जैन के सानिध्य में समिति अध्यक्ष मुकेश चौरड़िया लक्ष्मीनारायण मांदलिया , मनोज माली संजय चौहान हेमंत जैन अरुण जैन अंशुल कोठारी श्याम ग्वाला, प्रदीप चौरडिया, सागरमल राठौर, भरत सोनगरा लक्ष्मीनारायण कारा अशोक शुक्ला, भावेश राव,अर्जून गौड़ जितेंद्र सिंह राधेश्याम ग्वाला गौरव जैन अनुप सेन भाजपा मंडल अध्यक्ष जितेंद्र बामनिया जंप सभापति कन्हैयालाल राठौर दिलीप आंजना मनोहर लोहार ईश्वर चौहान आदित्य सेठिया राम राठौर लखन राठौर भरत राठौर सहित समिति के कार्यकर्ता तथा कई उपस्थित जनों ने परिसर में श्रमदान किया तथा एक दुसरे को तिल गुड़ कि मिठाई खिलाकर बधाईयां शुभकामनाएं दी और खुशीयां मनाई।
इस अवसर पर महंत जितेंद्र दास महाराज ने सभी को शुभ आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि जिस प्रकार पतंग आकाश में उड़कर ऊंचाईयों को छू लेती है। और उसकी डोर जब तक उसके मालिक उड़ने वाले के हाथ में रहती हैं तब तब मालिक उड़ानें वाला उसे ऊंचाईयों पर भेजने के लिए निरंतर प्रयास करता है। उस पतंग को ऊंचा उड़ता देख सभी आंनद महसूस कर खुशी मनाते हैं। पर जब पतंग डोर कट बंधन तोड़ कर लेता है तो वह पतंग अनाथ होकर वह चारों ओर हवाओं के झोंके खाता तो कोई पक्षी उसको चोंच मारता फिर कही गिरे या टुट जाए,वह अनाथ कि तरह हो जाता है। इसलिए जीवन में पतंग बनकर ऊंची उड़ान भरते रहो पर डोर बंधन से आगे कि उडान मत भरना अपने परिवार भगवान से डोर कट बंधन टुटने पर वह अकेला होकर रह जाता है। इसलिए परिवार भगवान से डोर बंधन कभी मत तोड़ना बंधें जुड़े रहना।
इस अवसर पर समाजसेवी श्री दिनेश सेठिया एवं अशोक जैन विवेकानंद ने बधाई शुभकामनाए देते हुए कहा कि मकर संक्रांति पर्व पर तिल गुड़ कि मिठाई सिर्फ मिठाई खाने पर्व कि खुशीयां मनाने तक ही सीमित नहीं है।तिल के साथ गुड़ मिल बनी मिठाई एकता का प्रतीक है।जिस प्रकार तिल हम गुड़ रुपी मिठास वाणी व्यवहार से रहते हैं तो एक जुट होकर तिल पपड़ी कि तरह जुड़ कर आगे बढ़ते रहेंगे। यह मिठाई सर्दी के मौसम में खाने से हमारे स्वास्थ्य को भी ठीक करती है।



