भवानीमंडी में हार्ट सेफ के लिए सीपीआर मित्र अभियान की शुरुआत एसडीएम कार्यालय से की गई

भवानीमंडी में हार्ट सेफ के लिए सीपीआर मित्र अभियान की शुरुआत एसडीएम कार्यालय से की गई
भवानीमंडी । ( जगदीश पोरवाल )मंगलवार को हार्ट सेफ बनाने के लिए ऐतिहासिक पहल करते हुए उपखंड कार्यालय में “सीपीआर मित्र अभियान ” के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण सीपीआर, बीएलएस एवं फर्स्ट-एड प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया । झालावाड जिले में 25,000 से अधिक नागरिकों को सीपीआर में प्रशिक्षित किया जा चुका है,जिला कलेक्टर श्री अजय सिंह राठौड़ के निर्देश एवं सीएमएचओ डॉ. साजिद खान तथा बीसीएमओ डॉ. सुनील मीणा के मार्गदर्शन में भवानीमंडी उपखंड कार्यालय में ‘हार्ट सेफ झालावाड़ – सीपीआर मित्र अभियान’ के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण सीपीआर, बीएलएस एवं फर्स्ट-एड प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एसडीएम श्रद्धा गोमे (आईएएस) ने की।
इस अवसर पर पुलिस विभाग, शिक्षा विभाग, विभिन्न कार्यालयों के अधिकारी-कर्मचारी एवं आम नागरिकों ने सहभागिता करते हुए सीपीआर, बेसिक लाइफ सपोर्ट, स्नेक बाइट, रैबीज़, चोकिंग एवं ट्रॉमा के दौरान जीवन-रक्षक तकनीकें सीखी।
प्रशिक्षण का संचालन जिला सीपीआर नोडल अधिकारी डॉ. शुभम पाटीदार एवं उनकी टीम सदस्य त्रिलोक नागर द्वारा किया गया। कार्यक्रम में डीवाईएसपी श्री प्रेम चौधरी RPS सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
सीपीआर किसी भी व्यक्ति की जान बचा सकता है :-
एसडीएम श्रद्धा गोमे (आईएएस) ने अपने संबोधन में कहा कि कार्डियक अरेस्ट के पहले 10 मिनट—गोल्डन टाइम—में दिया गया सीपीआर किसी भी व्यक्ति की जान बचा सकता है, इसलिए प्रत्येक नागरिक को यह जीवन-रक्षक कौशल अवश्य सीखना चाहिए। उन्होंने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए इसे जन-स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।
सीपीआर प्रशिक्षण देने का कार्य निरंतर जारी रहेगा :-
उपखंड अधिकारी श्रद्धा गोमे ने कहा कि सीपीआर के प्रशिक्षण देने के अभियान को निरंतर जारी रखते हुए सम्पूर्ण भवानीमंडी उपखंड में इसे विस्तार देने हेतु प्रशासन पूर्ण सहयोग करेगा और जनभागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा।
झालावाड़ जिले में 25000 नागरिकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है :-
‘हार्ट सेफ झालावाड़ – सीपीआर मित्र अभियान’ के अंतर्गत अब तक जिले में 25,000 से अधिक नागरिकों को सीपीआर में प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिससे झालावाड़ को एक सुरक्षित, सजग और जीवन-रक्षक समुदाय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
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