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मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण से किसानों में जागी उद्यमिता की नई अलख

मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण से किसानों में जागी उद्यमिता की नई अलख

गोरखपुर पीपीगंज महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र, चौकमाफी, गोरखपुर वर्षों से किसानों की आय बढ़ाने और उनमें उद्यमिता विकसित करने के लिए विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी प्रदान करता आ रहा है। इन प्रयासों में मशरूम उत्पादन तकनीक विशेष रूप से कारगर साबित हो रही है, जो न केवल अतिरिक्त आय का स्रोत बन रही है बल्कि ग्रामीण युवाओं और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।इसका जीवंत उदाहरण हैं घघसरा ब्लॉक के ग्राम डुमरी निवास के निलेश गुप्ता और सहजनवा क्षेत्र के किशन चंद्र। दोनों किसानों ने सितंबर 2025 में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. संदीप प्रकाश उपाध्याय से मशरूम उत्पादन तकनीक का प्रशिक्षण लिया और तुरंत इसे अमल में लाना शुरू कर दिया। प्रशिक्षण के बाद वे डॉ. उपाध्याय के निरंतर संपर्क में रहे और मार्गदर्शन लेते रहे।निलेश गुप्ता ने 700 वर्ग फीट के बंद कमरों में मशरूम उत्पादन शुरू किया। उन्होंने 10 क्विंटल भूसे से तैयार खाद को 200 बैगों में स्पॉन रनिंग की। पहले दो हफ्तों तक प्रतिदिन 20 किलोग्राम बटन मशरूम का उत्पादन हुआ, इसके बाद भी रोजाना औसतन 10 किलोग्राम उत्पादन जारी रहा। डेढ़ महीने में उन्हें करीब 35,000 रुपये की कमाई हुई, जबकि खाद तैयार करने, स्पॉन, पॉलीथिन और अन्य सामग्री पर कुल खर्च मात्र 10,000 रुपये आया। निलेश बताते हैं कि यह कार्य उनके लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है और गांव के अन्य किसान भी इससे प्रेरित होकर मशरूम उत्पादन शुरू करने की योजना बना रहे हैं।
डॉ. संदीप प्रकाश उपाध्याय ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र समय-समय पर किसानों को नवीन तकनीकों की जानकारी देता रहता है। सतत मार्गदर्शन के लिए विशेष व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया गया है, जिसमें किसान अपनी समस्याएं और अनुभव साझा कर सकते हैं। केंद्र की यह पहल न केवल व्यक्तिगत सफलताएं उत्पन्न कर रही है बल्कि पूरे क्षेत्र में मशरूम उत्पादन को एक नई मिसाल के रूप में स्थापित कर रही है।

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