सीतामऊ में अखिल भारतीय वैष्णव बैरागी समाज के तत्वाधान में जगदगुरु श्री रामानंदाचार्य जयंती धुमधाम से मनाई गई

सीतामऊ में अखिल भारतीय वैष्णव बैरागी समाज के तत्वाधान में जगदगुरु श्री रामानंदाचार्य जयंती धुमधाम से मनाई गई

सीतामऊ ।छोटी काशी कि पावन धरा पर अखिल भारतीय वैष्णव बैरागी समाज के तत्वाधान में जगदगुरु श्री रामानंदाचार्य जयंती के उपलक्ष्य में छोटी में धूमधाम से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें बड़ी संख्या मे नगर एवं तहसील क्षेत्र के समाज जनों ने भाग लिया।नगर की आराध्य देवी मयूर वाहिनी मोड़ीमाता मंदिर से ढोल एवं बेंड के साथ प्रारम्भ हुई शोभायात्रा में रथ में विराजित जगतगुरु स्वामी श्री 1008 श्री रामानंदाचार्य जी महाराज के चित्र के साथ सन्त व साध्वी भी विराजित थे। पूरे नगर में भ्रमण करती हुई लगभग 02 किलोमीटर दुरी कि शोभायात्रा श्री राधाबावड़ी हनुमान मंदिर सीतामऊ पहुंची जहां महामंडलेश्वर भुवानदास उज्जेन, महामंडलेश्वर महंत शालीग्राम दास काजरियाखेड़ी, भगवताचार्य महंत नरसिंह दास बेल्लारी,,साध्वी फाल्गुनी वैष्णव बरखेड़ा कला, साध्वी गांयत्री वैष्णव ताजखेड़ा आदि ने उपस्थित समाज जनो को जगदगुरु श्री रामानंदाचार्य जी के विषय मे बताया साथ ही वैष्णव कुल में जन्म होने पर स्वयं को गौरवान्वित होने की बात कही,
सन्तो ने अपने उद्धबोधन में कहा कि चारो वर्णों में वैष्णव किसी वर्ण में नही आते है हम श्री हरि नारायण की पूजा करने वाले साधुजन है इसलिए हम्हे वैष्णव जन कहते हे।। सन्तों ने युवाओं को व उपस्थित समाजजनों को अपने रीति रिवाजों,, परम्पराओं को सहेजे रखने व उनपर चलने की बात कही वैष्णव जनो के सर पर शिखा,,माथे पर वैष्णव तिलक व गले मे तुलसी माला की कंठी होना चाहिए और यह हमारे लिए शर्म की नही गर्व की बात है क्योंकि एक सच्चे वैष्णव की पहचान ही यही होती है। आदि विषयों पर सन्तों ने अपना सम्बोधन दिया जिसके बाद जगदगुरु श्री रामानंदाचार्य जी महाराज के चित्र कि महाआरती सम्पन्न हुई व प्रसादी वितरण के साथ सामाजिक भोज का आयोजन भी हुआ।
सीतामऊ नगर में 08 वर्षो बाद वैष्णव बैरागी समाज द्वारा अपने आराध्य श्री रामानंदाचार्य जी महाराज की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किया जो पूरे समाज के सहयोग से सफल आयोजन रहा व नगर में अनेको स्थानों पर शोभायात्रा का स्वागत हुआ।



