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जलकुंभी से भी संक्रामक रोग फैलने का खतरा – डॉ.पृथ्वीसिंह वर्मा

जलकुंभी से भी संक्रामक रोग फैलने का खतरा – डॉ.पृथ्वीसिंह वर्मा
नीमच के नालों में जलकुंभी संक्रामक रोगों का कारण बन सकती है, जो महामारी का रूप भी ले सकती है।
उक्त आशय का बयान जारी करते हुए नगरपालिका के पूर्व स्वास्थ्य सभापति डॉ.पृथ्वीसिंह वर्मा ने कहा कि जलकुंभी से पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिसके कारण बैक्टीरिया और कीटाणु पनपते हैं जो दूषित जल से होने वाले रोग जैसे हैजा, टाइफाइड, पेचिश, पीलिया और पेट खराबी से उत्पन्न कई रोग पैदा करते हैं। इसके जल के सम्पर्क में आने से त्वचाजनित रोग और फंगल इंफेक्शन और जलन भी होती है। इसके दूषित पानी में रहने से मछलियां और अन्य जलजीव भी मर जाते हैं। यह पानी मच्छर और अन्य बीमारियों का प्रजनन स्थल बन जाता है।
डॉ. वर्मा ने कहा कि जलकुंभ से पास की कॉलोनियों और बस्ती के कुएं और नलकूप भी दूषित हो सकते हैं। इन्दौर में हुई दूषित पानी से सैंकडों लोग बीमार हो गए और बीस से अधिक लोग मृत्यु का शिकार हो गए। इस कारण विकासनगर, हुडको, जवाहर नगर, शास्त्री नगर, एकता कॉलोनी, स्कीम नं.9 और नीमच सिटी के लोगों में डर का माहौल है, कहीं जलकुंभी के दूषित जल से वे इसकी चपेट में नहीं आ जाएं। इन नालों के पानी से आसपास के खेतों में उगाई जाने वाली सब्जियों की खेती की सिंचाई भी होती है। उस पानी में जलकुंभी के अलावा शहर की नालियों का दूषित जल भी मिला होता है जो इनमें उगाई और सिंचित खेतों की सब्जियों को सौ प्रतिशत तक प्रदूषित कर रही हैं। इन खेतों की सब्जियों से दुर्गध भी आती है। सब्जी खाने वालों को पता नहीं रहता कि यह सब्जी नाले के पानी से सिंचित है या कुंए के पानी से। अनजाने ही वे सब्जियों के मार्फत अपने घर में बीमारी खरीद कर ला रहे हैं।
डॉ.वर्मा ने कहा कि नीमच नगरपालिका अध्यक्ष पिछले तीन साल से इन नालों की सफाई करवाने की बात कह रही हैं, मगर आज तक एक फीट भी नालों की सफाई नहीं हुई है, बल्कि प्रदुषण हजार गुना बढा है। डॉ.वर्मा ने कहा कि जिला प्रशासन को इसे प्राथमिकता के आधार पर लेकर इन नालों की सफाई करवाना चाहिए और ऐसी व्यवस्था करना चाहिए कि इन नालों के पानी से सिंचाई नही ंहो और ये नाले प्रदूषित नहीं हों, वरना एक दिन नीमच शहर भी किसी महामारी की चपेट में आ सकता है। बरसात का मौसम निकल गया है, इन नालों को फिर से भरने की संभावना इस कारण नहीं है। यही उचित समय है इन नालों से जलकुंभी हटाई जाए और इनकी सफाई की जाए।
उक्त आशय का बयान जारी करते हुए नगरपालिका के पूर्व स्वास्थ्य सभापति डॉ.पृथ्वीसिंह वर्मा ने कहा कि जलकुंभी से पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिसके कारण बैक्टीरिया और कीटाणु पनपते हैं जो दूषित जल से होने वाले रोग जैसे हैजा, टाइफाइड, पेचिश, पीलिया और पेट खराबी से उत्पन्न कई रोग पैदा करते हैं। इसके जल के सम्पर्क में आने से त्वचाजनित रोग और फंगल इंफेक्शन और जलन भी होती है। इसके दूषित पानी में रहने से मछलियां और अन्य जलजीव भी मर जाते हैं। यह पानी मच्छर और अन्य बीमारियों का प्रजनन स्थल बन जाता है।
डॉ. वर्मा ने कहा कि जलकुंभ से पास की कॉलोनियों और बस्ती के कुएं और नलकूप भी दूषित हो सकते हैं। इन्दौर में हुई दूषित पानी से सैंकडों लोग बीमार हो गए और बीस से अधिक लोग मृत्यु का शिकार हो गए। इस कारण विकासनगर, हुडको, जवाहर नगर, शास्त्री नगर, एकता कॉलोनी, स्कीम नं.9 और नीमच सिटी के लोगों में डर का माहौल है, कहीं जलकुंभी के दूषित जल से वे इसकी चपेट में नहीं आ जाएं। इन नालों के पानी से आसपास के खेतों में उगाई जाने वाली सब्जियों की खेती की सिंचाई भी होती है। उस पानी में जलकुंभी के अलावा शहर की नालियों का दूषित जल भी मिला होता है जो इनमें उगाई और सिंचित खेतों की सब्जियों को सौ प्रतिशत तक प्रदूषित कर रही हैं। इन खेतों की सब्जियों से दुर्गध भी आती है। सब्जी खाने वालों को पता नहीं रहता कि यह सब्जी नाले के पानी से सिंचित है या कुंए के पानी से। अनजाने ही वे सब्जियों के मार्फत अपने घर में बीमारी खरीद कर ला रहे हैं।
डॉ.वर्मा ने कहा कि नीमच नगरपालिका अध्यक्ष पिछले तीन साल से इन नालों की सफाई करवाने की बात कह रही हैं, मगर आज तक एक फीट भी नालों की सफाई नहीं हुई है, बल्कि प्रदुषण हजार गुना बढा है। डॉ.वर्मा ने कहा कि जिला प्रशासन को इसे प्राथमिकता के आधार पर लेकर इन नालों की सफाई करवाना चाहिए और ऐसी व्यवस्था करना चाहिए कि इन नालों के पानी से सिंचाई नही ंहो और ये नाले प्रदूषित नहीं हों, वरना एक दिन नीमच शहर भी किसी महामारी की चपेट में आ सकता है। बरसात का मौसम निकल गया है, इन नालों को फिर से भरने की संभावना इस कारण नहीं है। यही उचित समय है इन नालों से जलकुंभी हटाई जाए और इनकी सफाई की जाए।



