
कड़ाके की ठंड में जंतर-मंतर पर मजदूरों का हुंकार न्यू लेबर लॉ रद्द करो, पुरानी पेंशन बहाल करो, निजीकरण बंद करो
नई दिल्ली ऐतिहासिक जंतर-मंतर मैदान पर कड़ाके की ठंड के बावजूद स्वतंत्र मजदूर यूनियन के नेतृत्व में आयोजित देशव्यापी विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर कर्मचारियों की एकजुटता और दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित किया। देश के विभिन्न कोनों से आए हजारों कर्मचारियों ने हाथों में तख्तियां थामे और नारे लगाते हुए केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।प्रदर्शन में मुख्य मांगें रही – नए श्रम कानूनों को रद्द करना, पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) की बहाली और सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण को तत्काल रोकना। SRBKU के राष्ट्रीय महासचिव विकास गौर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नए लेबर कोड मजदूरों के अधिकारों पर हमला हैं और इन्हें वापस लिया जाए।राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश चंद्रा ने चेतावनी दी कि नए श्रम कानून कर्मचारियों को कमजोर करने, नौकरी की सुरक्षा छीनने और कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने के लिए लाए गए हैं। वहीं स्वतंत्र मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेएस पाटिल ने निजीकरण पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र को बेचना देश और कर्मचारियों दोनों के लिए घातक है।ठंड के बावजूद घंटों डटे रहे प्रदर्शनकारियों ने साबित कर दिया कि कर्मचारी अब पीछे नहीं हटेंगे। विभिन्न राज्यों, विभागों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि यह संघर्ष पूरे मेहनतकश वर्ग का है। प्रदर्शन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश में यह संदेश गया कि यदि मांगें अनसुनी रहीं तो आंदोलन और तेज होगा।आयोजकों ने पूर्वोत्तर रेलवे सहित सभी शामिल संगठनों और साथियों का विशेष आभार व्यक्त किया। यह प्रदर्शन आने वाले समय में बड़े जनआंदोलन की नींव साबित हो सकता है, जो कर्मचारियों के अधिकार, सम्मान और सुरक्षित भविष्य की लड़ाई को नई दिशा देगा।



