मंदसौर जिलासीतामऊ

छोटी काशी में साहित्य महोत्सव का आगाज, 29 से तीन दिवसीय होगा आयोजन

06 को साहित्य महोत्सव के शुभारंभ और छात्र अपनी विभिन्न प्रतिभाओं का करेंगे प्रदर्शन

एसडीएम गर्ग ने कहा कि सीतामऊ क्षेत्र पर्यावरण पर्यटन और प्रतिभाओं से भरा है आगे लाने से रोजगार के अवसर बढ़ सकतें

संस्कार दर्शन

सीतामऊ। सीतामऊ नगरी को धर्म शिक्षा साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यहां के राजा ने यहां सिर्फ शासन ही नहीं किया बल्कि नगर को चिकित्सा शिक्षा सुविधा के साथ इतिहास साहित्य में देश ही नहीं विश्व स्तरीय पहचान सीतामऊ नगरी को दिलाई है। यही कारण है कि यहां पर दुनिया भर के साहित्य प्रेमियों का आवागमन लगा रहता है। इसलिए इसे छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता था।इस अमुल्य धरोहर के साथ यहां के कल्चर संस्कृति तथा पर्यावरण में भोगोलिक दृष्टि से अवगत कराने को लेकर साहित्यिक महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है जिसका आगाज़ 06 जनवरी को विभिन्न विद्यालयों के छात्र प्रतिभाओं का प्रदर्शन करेंगे वहीं शाम पांच बजे लदुना स्थित लव सागर गढ़ में मटरु के फेस और लेम्प बलून आकाश में उड़ाकर साहित्यिक महोत्सव -2026 का शुभारंभ किया जाएगा। उसके बाद 29 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक तीन दिवसीय कला संस्कृति शिक्षा पर्यावरण तथा खेती विभिन्न विषयों साहित्य महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।

आयोजन को लेकर अनुविभागीय अधिकारी शिवानी गर्ग ने बताया कि यु तो मंदसौर कि पहचान भगवान पशुपतिनाथ से विश्व स्तर तक बनीं हुई है। ऐसे ही पूरे जिले में हर क्षेत्र कि अपनी पहचान होना चाहिए इससे क्षेत्र कि प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है उसी के साथ आर्थिक रोजगार व्यापार आदि क्षेत्रों में भी प्रगति होती है। यहां पर पर्यावरण के क्षेत्र में भी बहुत अवसर पर्यटन के रुप में देखने को मिलते हैं। सीतामऊ क्षेत्र के फेतहपुर चिकली गांव में एक आस्ट्रेलियाई पक्षी देखने को मिला। यहां अपने देश ही नहीं विदेशी पक्षी भी देखने को मिल रहें हैं। पक्षियों कि विभिन्न प्रजातियों को देखने और खोजकर उनको लेकर जानकारी कि पुस्तक हमारे द्वारा बनाई जा रही है। पक्षियों को लेकर विदेश से एक वेबसाइट चल रही है जिसमें पक्षियों को लेकर आप भी जानकारी फोटो सहित भेज सकते हैं। हमारे द्वारा भेजी गई जानकारी पर विदेश से एक डेलीगेशन फतेहपुर चिकली आया और उस स्थान पक्षी को देखा। राजस्थान में पशु पक्षियों पर शोध करने वाली मेम चंद्रा जिनको सर कि उपाधि प्राप्त हैं उन्होंने घोड़े पर रिसर्च किया जिसमें बताया कि घोड़ा भी इंसानों कि तरह सुन समझने कि क्षमता रखता है। एसडीएम गर्ग ने आगे कहा कि अपने देश के कई लोग हजारों किलोमीटर दूर बाहर घुमने जाते हैं तो वहां गोल्डन वाटर, ट्युलिप गार्डन, थाईलैंड आदि देखते हैं तो वहां रंग-बिरंगे फूलों सुंदर से गार्डन बने हुए हैं। केवल गार्डन सुंदरता ही पर्यटकों को आने के लिए आकर्षित करती है ऐसे ही हम विभिन्न क्षेत्रों में पर्यटकों के आने के लिए कार्य कर सकते हैं। एसडीएम गर्ग ने कहा कि क्षेत्र में दो महाविद्यालय है दोनों में शिक्षा मिल सकती है पर रोजगार तो क्रिएट करना होगा।आने वाले समय में सीतामऊ क्षेत्र चारों ओर से बड़े महानगरों से जुड़ जायेगा। तथा सिंहस्थ भी 2028 में आ रहा है। तो यहा भी पर्यटकों का आवागमन बढ़े और रोजगार के अवसर मिले।यह कार्य हम सबको मिलकर करना है।

एसडीएम गर्ग ने कहा कि इसी को लेकर सीतामऊ में तीन दिवसीय साहित्य महोत्सव -2026 का तीन दिवसीय आयोजन 29 जनवरी से 31 जनवरी तक विभिन्न विषयों पर होगा। तथा 06 जनवरी को दोपहर दो बजे से छात्र प्रतिभाओं के प्रदर्शन करेंगे तथा शाम 5.30 बजे लदुना तालाब किनारे गढ़ में मटरु फेस और लेंप बलुन आकाश में उड़ाकर साहित्यिक महोत्सव का आगाज शुभारंभ किया जाएगा।

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