समता मूलक समाज की स्थापना के लिए, समता मूलक विचारों की आवश्यकता

समता मूलक समाज की स्थापना के लिए, समता मूलक विचारों की आवश्यकता
-लेखक ईश्वर सुर्यवंशी खेताखेडा
भारत देश व मानव समाज में हजारों वर्षों पहले महान समाज सुधारको ने जन्म लेकर मानव समाज में व्याप्त कुरीतियों को खत्म करने की हजारों कोशिशें की जन आंदोलन किए भी किए कुछ महापुरुषों ने जन क्रांति ,विचार क्रांति, एकता क्रांति, जैसे अनेक प्रयास किए हजारों वर्ष पूर्व महापुरुषों ने समाज में व्याप्त कुरीतियों, पापाचार, आडंबरों, छुआछूत, भेदभाव, जैसे अनैतिक फैसलों में कुछ हद तक सफलता प्राप्त की लेकिन कुछ सफलता मानव समाज में अधूरी रह गई भारत देश की आजादी के बाद देश में भारतीय संविधान लागू हो गया संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने भारतीय संविधान में समता मूलक समाज जैसे प्रशंसनीय शब्दों का उल्लेख किया संविधान पुस्तक में किया उक्त शब्दों को उचित स्थान भी दिया परंतु देश व समाज में आज भी समता मूलक समाज की स्थापना अधूरी है। समता मूलक समाज से तात्पर जहां सभी को समान अवसर संसाधन, और समान अधिकार मिलते हैं जाति, लिंग, आर्थिक, रंग, रूप ,धर्म, के आधार पर कोई भेदभाव नहीं हो असमानताओं को समाप्त कर एक निष्पक्ष न्यायपूर्ण समाज बनाना है।सम्मानजनक ,कल्याणकारी जीवन जीने का अवसर सभी को मिले ।
लोकतंत्र के इस देश में आज भी मानव समाज में ऐसी कुरीतियों हावी है जिससे शिक्षित , स्वास्थ्य, स्वतंत्र , मानव समाज की स्थापना करना एक गंभीर विषय बनता जा रहा है समता मूलक समाज की स्थापना के लिए नेतृत्वकर्ता या सरकारों को स्वयं अपने कार्यक्षेत्र के अंदर समता मूलक विचार स्थापित करने होंगे लेखक का मानना है कि अगर नेतृत्वकर्ता या सरकारे एक स्वच्छ मानव समाज के प्रति समता मूलक विचार स्थापित कर लें तो निश्चित ही मानव समाज में व्याप्त कुरीतियों को खत्म किया जा सकता है
लेखक का मानना है कि समाज सुधारक के लिए या समाज में व्याप्त कुरीतियों को नष्ट करने के लिए आज के इस आधुनिक युग में हर एक कम से सफल प्रयास किया जा सकता है मानव समाज में शोषित, वंचित ,गरीब , असहाय की मदद ही मानव समाज में समता मूलक जैसे शब्द स्थापित करते हैं आज के वर्तमान दौर में विशेष कर बहुजन समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए आगे आने की आवश्यकता है अगर बहुजन वैचारिक व्यक्ति राजनीतिक क्षेत्र में कार्यरत हैं या प्रयासरत हैं तो ऐसे व्यक्ति का समर्थन करना उसकी मदद करना समता मूलक समाज की स्थापना में एक प्रयास भी कहलाता है।



