राजस्थान में धनखड़ के इस्तीफे का असर जाट मतों पर होता है तो ……………

राजस्थान में धनखड़ के इस्तीफे का असर जाट मतों पर होता है तो भाजपा भागीरथ चौधरी, सतीश पूनिया, कैलाश चौधरी जैसे नेताओं को आगे लाएगी
भाजपा से ज्यादा जाट विधायक कांग्रेस के हैं।
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जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति के पद से 21 जुलाई की रात 9 बजे इस्तीफा दिया था। तीन रात और तीन दिन गुजर जाने के बाद भी धनखड़ की ओर से मीडिया को कोई बयान जारी नहीं किया गया है। धनखड़ की चुप्पी को लेकर मीडिया में लगातार खबरें आ रही है। राष्ट्रीय न्यूज चैनलों के पूर्व संवाद को और एंकर तो अपने यूट्यूब चैनल पर धनखड़ के सबसे बड़े हमदर्द बने हुए है। ऐसे यूट्यूबर्स 21 जुलाई से पहले तक धनखड़ की आलोचना करते है नहीं थक रहे थे, लेकिन अब उनकी नजर में धनखउ़ सबसे उपयुक्त उपराष्ट्रपति हो गए है। धनखड़ के इस्तीफे की आड़ में ऐसे यूट्यूबर्स को मोदी सरकार पर हमला करने का अवसर मिल गया है। धनखड़ राजस्थान के झुंझुनूं जिले के है, इसलिए माना जा रहा है कि इस्तीफे का असर राजस्थान की जाट राजनीति पर पड़ेगा। कांग्रेस के नेताओं ने धनखड़ के प्रति हमदर्दी दिखाना शुरू कर दिया है ताकि यह प्रसारित किया जाए कि भाजपा में जाट समुदाय के नेताओं का सम्मान नहीं है। कांग्रेस ने धनखड़ को लेकर जो अभियान चलाया है, उसका असर यदि राजस्थान के जाट मतदाताओं पर होता है तो भाजपा ने भी मुकाबला करने की रणनीति बनाई है। जानकारी के अनुसार भागीरथ चौधरी, सतीश पूनिया, कैलाश चौधरी जैसे जाट नेताओं को भाजपा आगे करेगी। भागीरथ चौधरी भाजपा के किसान मोर्चे के अध्यक्ष रहे है तथा मौजूदा समय में केंद्र में कृषि राज्यमंत्री है। सतीश पूनिया प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहे और मौजूदा समय में हरियाणा के प्रभारी है। कैलाश चौधरी बाड़मेर के सांसद और केंद्र में कृषि राज्यमंत्री रह चुके हैं। हालांकि धनखड़ ने अभी अपने इस्तीफे पर सरकार विरोधी कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन यदि धनखड़ कांग्रेस की मंशा के अनुरूप कोई बयान देते हैं या राजस्थान की राजनीति में सक्रिय होते हैं तो भाजपा भागीरथ चौधरी, सतीश पूनिया, कैलाश चौधरी जैसे नेताओं से जवाब दिलवाएगी। इन तीनों नेताओं का भी प्रदेश के जाट समुदाय पर खासा प्रभाव है। राजस्थान की राजनीति में जाट समुदाय का दबदबा है। मौजूदा समय में भी 200 में से 37 विधायक जाट समुदाय के हैं। भाजपा के मुकाबले कांग्रेस के जाट विधायकों की संख्या ज्यादा है। कांग्रेस के 18 और भाजपा के 16 विधायक है। 37 विधायकों के साथ साथ 25 में से 7 जाट समुदाय के सांसद होने से भी राजनीति में प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। कांग्रेस ने तो जाट समुदाय के गोविंद सिंह डोटासरा को प्रदेश अध्यक्ष बना रखा है, जबकि भाजपा सरकार ने भी 4 मंत्री सुमित गोदारा, झाबर सिंह खर्रा, कन्हैयालाल चौधरी, और विजय सिंह जाट समुदाय से है। यूं तो उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में भी जाट समुदाय का दबदबा है। लेकिन धनखड़ के इस्तीफे का असर सबसे ज्यादा राजस्थान में माना जा रहा है। धनखड़ राजस्थान के झुंझुनूं से सांसद और अजमेर के किशनगढ़ से विधायक भी रह चुके है। यह बात अलग है कि धनखड़ के उपराष्ट्रपति रहते हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा को उनके गृह जिले झुंझुनूं से भी हार का सामना करना पड़ा। इसी प्रकार जाट बाहुल्य सीकर, चूरू, नागौर, बाड़मेर आदि में भी भाजपा उम्मीदवारों की हार हुई। भाजपा के रणनीतिकार धनखड़ की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं।
S.P.MITTAL BLOGGER (25-07-2025)



