झारडा, जग्गाखेड़ी, दलोदा, अफजलपुर मे शराब दुकानों का विरोध ,आखिर महिलाओ को क्यों करना पड़ी शराब दुकान मे तोड़फोड़?

बार बार शराब दुकान हटाने को लेकर ग्रामीणों ने किया विरोध तों आबकारी अधिकारी ने क्यों नहीं दिया ध्यान!
क्या इनमे आबकारी अधिकारी दोषी नहीं है क्या उन पर समय पर ध्यान नहीं देने व ऐसे हालात पैदा होने पर लापरवाही की कारवाही नहीं होना चाहिए?
क्या 15-20 ग्रामीणों पर कारवाही करने से समस्या हल हो जाएगी?
क्या झारडा मे भी यही स्थिति होंगी?
टकरावद (पंकज जैन )
जिले के जग्गाखेड़ी गांव में शराब दुकान से परेशान महिलाओ ने बार बार विरोध किया व ग्राम पंचायत द्वारा एक आवेदन आबकारी विभाग को दिया गया लेकिन विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया व अंततःमाँ के दिनो नवरात्रि मे महिलाओं को आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने खुद माँ काली बन शराब दुकान पर धावा बोल दिया, जिसे लेकर पुलिस द्वारा मौके पर स्थिति संभाली गई व 15-20 ग्रामीणों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया परंतु सबसे आम सवाल यह है कि आम जनता द्वारा गांधीवादी तरीके से अपनी बात शासन प्रशासन तक पहुंचाई जाती है आवेदन, निवेदन किया जाता है परंतु उसके बावजूद भी जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती है क्या आबकारी विभाग आम जनता के धैर्य की परीक्षा ले रहा है वही शराब दुकान लाइसेंस दुकान की आड़ में ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध रूप से डायरी सिस्टम से अवैध शराब बेची जा रही है जिसकी आड़ में नकली और मिलावटी शराब भी विक्रय हो रही है परंतु जिम्मेदारों का ईस और ध्यान तक नहीं जाता।
झारडा मे भी शराब दुकान हटाने को लेकर जोकचंद्र के नेतृत्व मे होगा बड़ा आंदोलन
झारडा मे रिहायशी इलाके व कोचिंग सेंटर के पास शराब दुकान लगाने का महिलाओ ने विरोध कर चक्काकिया जिसको प्रसासन ने हटवा तों दिया लेकिन क्षेत्रवासियो का आक्रोश थमने की बजाय और बड़ रहा है व 8 अप्रेल को किसान नेता श्यामलाल जोकचंद के नेतृत्व मे बड़ा आंदोलन किया जावेगा।
ज़ब प्रदेश के मुखिया मोहन खुद चाहते की जो जनता चाहती वह हो तों फिर उनके राज मे अफसर क्यों तानाशाही रवैया अपना कर ग्रामीणो की भावनाओ को ध्यान मे रखकर काम क्यों नहीं करते!