
डग-गैबशाह बाबा के आस्ताने मुबारक पर दूसरे दिन भी महफिल में श्रोता भोर तक जमे रहे
डग हजरत गैब शाह बाबा के आस्ताने मुबारक पर उर्स कमेटी द्वारा बाहर से आए मेहमानों की दस्तार बंदी की गई ,अकिदतमंद कोई चादर तो कोई इत्र ,फुल पेश कर हिंदू, मुस्लिम,सिख,इसाई मनोकामना पूर्ण होने पर आस्था अनुसार यहां पर चडावा पेश करते हैं,दूसरे दिन सरफराज अनवर साबरी ने भी उम्दा कलाम पेश किया ,हिंदू भी तेरे नाम के दीवाने लगे हैं, तू ही मेरे ख्वाजा हिंद का ख्वाजा है,
बाहर से आए मेहमानों की उर्स कमेटी द्वारा दस्तार बंदी की गई रात्रि एक बजे रईस मियां साबरी ने, में दरे पाक पर आया हू, भिखारी बनकर ,तेरे करम का ताज रखा है, हर बादशाह को अपनी हुकूमत में व्यापार नजर आता है, मेरे रसूल को उसकी उम्मीद उम्मत मैं प्यार नजर आता है।
अली मौला, अली मौला,यह मेरे नबी का करम है, कलाम पेश किया महिलाओं के लिए बैठने की विशेष व्यवस्था की गई थी पुलिस की भी माकुल व्यवस्था रही, उर्स कमेटी सदर आशिक अली ने बताया कि 3 अप्रैल को चांद कादरी दिल्ली वाले अपना कलाम पेश करेंगे।