भक्ति/ आस्थाझालावाड़डग

गोमाता के नेत्रों को देखने से सर्वश्रेष्ठ ध्यान होता है- गोवत्स राधाकृष्ण जी महाराज

गोमाता के नेत्रों को देखने से सर्वश्रेष्ठ ध्यान होता है- गोवत्स राधाकृष्ण जी महाराज

 

सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित “गोवंश रक्षा वर्ष” के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के समापन दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि भारत को भारत की संस्कृति चाहिए और भारत की संस्कृति का प्राण गायमाता है और उसी के लिए मंगल पांडे ने बंदूक उठाई थी । मंगल पांडे को अंग्रेजों ने फांसी तो दे दी लेकिन वे उनके विचारों को नहीं मार पाएं और आज भी उनके विचार जीवित है और हमें उनके विचारों को जीवित रखना है तो उसके लिए सेवा ही एक सर्वोत्तम साधन है और वह मनुष्य ही कर सकता है क्योंकि परमात्मा के पास जाने का एक मात्र साधन मनुष्य के पास है और सेवा के माध्यम से ही वह भगवती गोमाता की सेवा कर परमात्मा के पास जा सकता है।

 

एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के समापन पर्व एवं उपसंहार उत्सव पर गोवत्स राधाकृष्ण जी महाराज के श्रीमुख से प्रारम्भ हुई तीन दिवसीय नरसी जी के मायरा कथा के शुभारंभ दिवस पर महाराज जी ने बताया कि प्रारंभ में लोग आश्चर्य करते थे कि एक वर्ष की भी कोई कथा होती है क्या क्योंकि जो पुस्तकीय ज्ञान से कथा करते है उसकी एक सीमा होती है लेकिन स्वामी गोपालानंद जी महाराज ने जो एक वर्ष की कथा श्रवण करवाई है वह भगवती गोमाता जो सब वेद पुराणों को अपने अन्दर समाहित रखती हैं उसकी कथा उसके सम्मुख गोमाता को दिखाते हुए गोमाता की महिमा वर्षभर गाई गई है और भगवती गोमाता की महिमा तो इतनी है कि उसे पांच वर्ष में भी पूरा नहीं किया जा सकता है और साथ ही बताया कि इस सृष्टि में सबसे सर्वश्रेष्ठ ध्यान गोमाता के नेत्रों को देखकर ध्यान करने को बताया और कहा कि आपने गोमाता की आंखों को निरंतर देखा तो आपको गोमाता की आंखों में साक्षात श्री कृष्ण के दर्शन होंगे ।

महाराज जी ने बताया कि नरसी जी के मन में। अच्छी गोसेवा रही है और उन्होंने अपनी युवावस्था गोमाता के गोष्ठ में रहकर ही बिताई है और भगवती गोमाता की कृपा से ही वे प्रभु के करीब पहुंचे है क्योंकि ईश्वर तक पहुंचाने का एक मात्र माध्यम गोमाता ही है ।

महाराज जी ने 144 साल बाद आए महाकुंभ की सारी व्यवस्था की बहुत प्रशंसा की और बताया कि इस महाकुंभ में गोरक्षा की दृष्टि से कोई ठोस निर्णय हो जाता तो यह महाकुंभ आनंददाई हो जाता ।

महाराज जी ने गोरक्षक भगवान दत्तात्रेय भगवान के बारे में बताते हुए कहां कि वे किसी एक सम्प्रदाय के आचार्य नहीं थे बल्कि वे कल्पगुरु थे और भक्त नरसी जी को उन्होंने ही वाणी थी थी और उस वाणी से ही नरसी जी जीवंत पर्यंत तक केवल हरिभजन करते रहें और उन्होंने अपने जीवन में कभी भी अपनी तारीफ एवं दूसरों की बुराई नहीं की और इसी श्रेष्ठ गुण से वे भगवान के अतिप्रिय भक्तों की श्रेणी में अपना नाम अमर कर गए ।

एक वर्षीय महामहोत्सव के समापन पर्व पर स्वामी देवानंद सरस्वती जी, लक्षानन्द जी बावजी,प्रकाश बाबाजी,चंद्रमदास जी महाराज एवं यज्ञाचार्य गंगाधर जी पाठक सभी संतो एवं विद्वानों ने भगवती गोमाता की महिमा के बारे में बताते हुए कहां कि जिनके अंतःकरण में पंचगव्य है वे ही वेद को ग्रहण कर सकते है और लोग पशु को हीन भावना से देखते है लेकिन जिनके दर्शन मात्र से ब्रह्मांड नायक के दर्शन हो वह पशु हैं और इसी विशेषता के कारण से ही तो भगवान शंकर पशुपति नाथ कहलाएं और सभी संतो ने एक स्वर से कहा कि आज कथा का समापन नहीं बल्कि एक विराम है और यह क्रम निरंतर चलता रहना चाहिए इस पर पूज्य स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी ने बताया कि शेष कथा का क्रम जारी रहेगा ।

श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार  अगवाल ने बताया कि भगवान कृष्ण ने ग्वाल के रूप में काम किया है और वहीं काम अब ग्वालशक्ति सेना एवं धेनु शक्ति संघ को भगवान कृष्ण का कार्य मानकर कार्य करना होगा साथ ही कार्यपालन अधिकारी आलोक सिंहल,प्रबंध न्यासी अम्बा लाल सुथार, क्षेत्रीय निदेशक ब्रह्मदत्त व्यास,न्यासी भूर सिंह राजपुरोहित आदि ने एक वर्षीय महामहोत्सव के मुख्य यजमान चिमन भाई अग्रवाल के परिवार एवं इस महोत्सव में हर प्रकार से सहयोग करने वाले सभी सज्जनों का आभार जताया

*पूज्य गोवत्स राधाकृष्ण जी महाराज का पूज्य स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज सहित सभी संतो एवं कार्यकर्ताओं ने गो अभयारण्य पर पधारने पर स्वागत किया*

 

*एक वर्षीय महोत्सव के समापन दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गो सेवा आयाम के अखिल भारतीय अधिकारी शंकर लाल भी भाईसाहब, गो संवर्धन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष मेघराज जी जैन सहित गो सेवा विभाग के मालवा प्रान्त के अधिकारी आदि अतिथि उपस्थित रहें ।

एक वर्षीय गोकृपा कथा के समापन दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के गो प्रेमियों की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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