खामोशी से इबादत में मसरूफ मुस्लिम समाज

अपने रब को राजी करने के लिए रोजा रखने के साथ ही पांच वक्त की नमाज भी पाबंदी के साथ अदा कर रहे हैं
साबिर पटेल
सीतामऊ/ इस्लाम के पांच मूलभूत सिद्धांतों में से एक सिद्धांत रोजा रखना भी है जो हर बालिग महिला पुरुष पर अनिवार्य है। इस बार रमजान के इस मुकद्दस पर्व की शुरुआत 1 मार्च से चांद दिखाई देने पर हुई थी। 2 मार्च को पहला रोजा रखा गया था।अब मुस्लिम समाज रमजान पर्व के अंतिम पड़ाव में व्यस्त है। बच्चे बूढ़े महिलाएं कामकाजी पुरुष एवं व्यवसायी आदि सभी अपने अल्लाह को राजी करने के लिए भीषण गर्मी में रोजे रखकर इबादत कर रहे हैं।
“आखिरी अशरा”
एक अशरा (दस दिनों) को कहते हैं। रमजान के पवित्र महीने को 3 अशरे में बांटकर तीनों अशरे की खास फजीलत (गुण) बयां की गई हैं।
इस्लाम में रमजान के शुरुआती 10 दिन या पहले अशरे को “रहमत का अशरा” बताया गया है। दूसरे अशरे को “बरकत का अशरा” और तीसरे और आखिरी अशरे को “जहन्नुम से आज़ादी” का अशरा कहा गया है।
रमज़ान का आखिरी अशरा सबसे महत्वपूर्ण है। इसी अशरे की 5 पाक रातों 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं में से किसी एक रात में पवित्र कुरान शरीफ नाजिल हुई थी। इन रातों में से जिस रात कुरान शरीफ नाजिल हुई, उसे “शब-ए-कद्र” की रात कहते हैं। इसलिए इन रातों की अहमियत काफी बढ़ जाती है।
लैल का अर्थ “रात” और क़द्र का अर्थ होता है “महान”। रमज़ान में “लैलतुल क़दर” अर्थात महान रात को खोजने के लिए कहा गया है। क्योंकि इन 5 रातों में ही लैलतुल कद्र की वह रात हो सकती है।लैलतुल कद्र की रात को कुरान में हज़ार महीनों से बेहतर रात घोषित किया गया है।
“लैलतुल कद्र की रात हज़ार महीनों से बेहतर है। उस रात फ़रिश्ते और पवित्र रूहें हर महत्वपूर्ण मामलें में अपने रब की अनुमति से उतरते है (97:4) वह रात पूर्णतः शान्ति और सलामती है, सुबह के उदय होने तक पौ फटने तक सब शांति है।” अल कुरान 97:3-5
इसलिए आखिरी अशरे में ‘ऐतकाफ’ करने अर्थात दुनियावी ज़िन्दगी छोड़कर पूरी रात मस्जिद में बैठ कर इबादत करते हैं।
एतेकाफ का अज्र (पुण्य) बहुत ही ज्यादा है। नबी पैगंबर हज़रत मुहम्मद ﷺ अपनी ज़िंदगी के आखिरी दिनों तक रमज़ान के आखिरी अशरे में एतकाफ किया करते थे। इस रमज़ान का यह आखिरी अशरा चल रहा है। इसके साथ ही मुस्लिम समाज द्वारा गुरुवार को होने वाले शबे कद्र के लिए विशेष तैयारी की गई है। सीतामऊ नगर की सभी मस्जिदों को विशेष रूप से आकर्षक विद्युत साज सज्जा से सजाया गया है। लैलतुल कद्र के दिन समाजजन पूरी रात जाग कर मस्जिदों में इबादत करेंगे। रमजान माह के अंतिम शुक्रवार को नगर की सभी मस्जिदों में अलविदा माहे रमजान का विशेष ख़ुत्बा व नमाज अदा की जाएगी। इसके तीन दिन बाद चांद दिखाई देने पर ईद मनाई जाएगी।
ईद की तैयारी के क्रम में मार्केट में चहल-पहल दिखाई देने लगी है विशेष कर रेडीमेड कपड़े, जूते चप्पल, श्रृंगारसामग्री, किराना दुकानों पर महिलाओं युवाओं और बच्चों की भीड़ दिखाई दे रही है। युवाओं में इस बार परंपरागत लिबाज़ कुर्ता पजामा का चलन अधिक देखा गया है रेडीमेड कुर्ते सहित टेलर के यहां कुर्ता पजामा सिलवाने वाले की भीड लगी हुई है।