मंदसौरमध्यप्रदेश
देश की आर्थिक सुधार कर 2047 तक विकसित भारत बनने का लक्ष्य

सांसद गुप्ता के विकसित भारत पर विश्व बैंक की रिपोर्ट को लेकर पूछे गए प्रश्न के जवाब पर
मंदसौर – प्रश्नकाल के दौरान सांसद सुधीर गुप्ता ने विकसित भारत पर विश्व बैंक की रिपोर्ट के संबंध में प्रश्न किया। सांसद गुप्ता ने कहा कि विश्व बैंक ने ऐसी कोई रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें इस बात पर बल दिया गया है कि भारत त्वरित सुधारों और अपनी वार्षिक विकास दर को बढ़ाकर ही 2047 तक अपने विकसित भारत के सपने को साकार कर सकता है। सरकार की इस पर क्या प्रतिक्रिया है। रिपोर्ट के अनुसार विश्व भर में व्यापार बाधाओं तथा अन्य कारकों के पुनर्गठन के कारण भारत की विकास दर वर्तमान 7.2 प्रतिशत से घटकर 6.4 प्रतिशत रहने की संभावना है उन्होने कहा कि सरकार द्वारा वर्ष 2047 तक ष्विकसित भारतष् का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को और और अधिक खोलने हेतु किए जा रहे उपायों क्या है।
प्रश्न के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि फरवरी 2025 में प्रकाशित इंडिया कंट्री इकोनॉमिक मैमोरेंडमः विकमिंग ए हाई-इन्कम इकोनॉमी इन ए जनरेशन शीर्षक वाली विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, त्वरित सुधारों का परिदृश्य भारत को वर्ष 2047 तक उच्च आय स्तर हासिल करने की ओर ले जाएगा। वित्तीय क्षेत्र, श्रम बाजार, भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण, व्यापारिक सुगमता, कर प्रशासन, सेवा वितरण, विनियामक ढांचा, डिजिटलीकरण और निवेश तथा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र जैसे क्षेत्रों में सरकार की पहलों और सुधारों से आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। उन्होने बताया कि जनवरी 2025 में प्रकाशित श्ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्सश् शीर्षक वाली विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत और वर्ष 2025-26 एवं 2026-27. प्रत्येक में 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। केंद्रीय बजट 2025-26 में विकसित भारत के विज़न को साकार करने के लिए विकास के उपायों और मार्ग को रेखांकित किया गया है। प्रस्तावित विकास उपायों में दस प्रमुख क्षेत्र निहित हैं जिनमें कृषि विकास और उत्पादकता, ग्रामीण समृद्धि और समुत्थानशीलता का निर्माण, समावेशी विकास को बढ़ावा देना, विनिर्माण को प्रोत्साहित करना, एमएसएमई की सहायता करना, रोजगार-आधारित विकास को सक्षम बनाना, लोगों, अर्थव्यवस्था और नवाचार में निवेश करना, ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना, निर्यात को बढ़ावा देना और नवाचार को संपोषित करना शामिल हैं। सरकार ने कृषि, एमएसएमई, निवेश तथा निर्यातों की पहचान विकास के इंजन के रूप में तथा कराधान, वित्तीय क्षेत्र, विनियमों और अन्य क्षेत्रों में सुधारों की पहचान समावेशी विकास के उत्प्रेरक के रूप में की है।