मंदसौर जिलासीतामऊ

श्री सिद्धाचल धाम जहाँज मंदिर के भव्यातिभव्य प्रतिष्ठा महामहोत्सव की तैयारियां, श्री संघ की उपस्थिति में बैठक सम्पन्न

सीतामऊ :-विश्वविख्यात श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ के समीप सीतामऊ लदूना के बीच स्थित आने वाले समय मे तीर्थस्थल के रूप में विकसित होने वाले श्री सिद्धाचल धाम जहाँज मंदिर की होने वाली भव्यातिभव्य प्रतिष्ठा महामहोत्सव की तैयारीयों को लेकर प्रथम बैठक आराधना भवन में सम्पन्न हुई।

श्री सिद्धाचल धाम जहाँज मंदिर के ट्रस्टी डॉ.अरविंद जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि आयोजित बैठक में प्रतिष्ठा महामहोत्सव को भव्य रूप प्रदान करने हेतु प्रतिष्ठा महोत्सव समिति का गठन शासनरत्न मनोज जी हरण के मार्गदर्शन में किया गया जिसमें अध्यक्ष पद हेतु अरविंद पोरवाल उपाध्यक्ष भूपेन्द्र राजगुरु, कोषाध्यक्ष डॉ.अरविंद जैन, सचिव महेंद्र ओस्तवाल व सदस्य किशोर जैन (बापू), सुरेश दसेड़ा, दिलीप पटवा, प्रदीप बोहरा, नीलेश पटवा, अतीत जैन, अशोक पोरवाल, अभय ओस्तवाल, हैमन्त जैन (बोहरा), अजित तातेड़, शैलेन्द्र भंसाली, सुरेन्द्र ओस्तवाल, अजित ओस्तवाल, हैमन्त श्रीमाल, संजय भंसाली, राजेन्द्र ओस्तवाल, संतोष भंडारी को मनोनीत किया गया।

प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के चैयरमेन पारसमल भंडारी ने कहा कि प्रतिष्ठा महोत्सव को सफल बनाने के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया, जीसमें विशेष रूप से मंदिर पूजन व्यवस्था समिति, प्रचार प्रसार समिति, वैयावच्च समिति, आवास व्यवस्था समिति, पांडाल व्यवस्था समिति, भोजन शाला समिति,जल व्यवस्था समिति, कार्यालय व अर्थव्यवस्था समिति, वाहन व्यवस्था समिति आदि समितियों का गठन किया गया। इस अवसर पर सकल श्रीसंघ के सदस्यगण उपस्थित रहे।

प्रतिष्ठा महोत्सव समिति सदस्य अतीत जैन (सर) ने बताया कि प्रतिष्ठा महोत्सव को भव्यता प्रदान करने के लिए नवअपूर्वअमर कृपापात्र शिष्य बन्धुत्रिपुटी आगम-प्रश्म-वज्र रत्न सागर जी म.सा आदि साधु-साध्वी जी का पदार्पण होगा व सिरोही निवासी शासनरत्न मनोजकुमार जी हरण का विशेष मार्गदर्शन भी प्रतिष्ठा महोत्सव के दरम्यान प्राप्त होगा। भव्यातिभव्य प्रतिष्ठा महोत्सव 23 अप्रैल से 27 अप्रैल तक भव्य रूप से आयोजित होगा। जिसमे आस पास के श्रीसंघों सहित अनेक संघों से विशेष अतिथियों का आगमन भी होना सुनिश्चित है।

युवा समाजसेवी नयन जैन ने बताया कि नवनिर्मित जहाँज मंदिर का शिलान्यास आचार्य भगवंत श्री नवरत्न सागर जी म.सा. की पावन निश्रा में व शासनरत्न मनोज कुमार हरण की प्रेरणा व मार्गदर्शन में 17 अप्रैल 2008 को बड़े हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ था। भूमिपूजन व शिलान्यास के बाद जहाँज मंदिर के प्रांगण का नाम श्री सिद्धाचल धाम व मार्ग का नाम प्रभुमिलन मार्ग रखने का निर्णय भी ट्रस्ट मंडल द्वारा लिया गया। मंदिर,उपाश्रय व धर्मशाला निर्माण हेतु उदारमना स्व डॉ. बाबूलालजी ओस्तवाल ने अपनी भूमि प्रदान की जहाँ आज जहाँज के आकार का विशाल जिनालय बनकर प्रतिष्ठा हेतु परमात्मा सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा के लिए प्रतिक्षारत है।

युवा समाजसेवी उत्सव जैन ने बताया कि नवनिर्मित जहाँज मंदिर के मुलगंभारे में मूलनायक के रूप में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान व मुलगंभारे के ठीक नीचे वाले गंभारे में 23वें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ भगवान की लगभग 3000 वर्ष प्राचीन प्रतिमा जी 108 पार्श्वनाथ के दर्शन कराते परिकर सहित नयनरम्य प्रतिमाजी प्रतिष्ठित होगी। मूलनायक दादा के साथ ही अन्य तीर्थंकर भगवंतों की प्रतिमाजी भी विराजमान होकर भक्तो के मन मे शांति व आनंद की अनुभूति महसूस करवाएगा। जिनालय में नवनिर्मित विभिन्न देहरियों में गणधर श्री गौतम स्वामी,श्री शांति सूरिजी, अधिष्ठायक श्री नाकोडा भैरवदेव,श्री घंटाकर्ण महावीर, श्री भोमिया, श्री मणिभद्रवीर देव, श्री पद्मावती देवी, श्री लक्ष्मी देवी, श्री सरस्वती देवी, श्री अम्बिका देवी, श्री ओसिया देवी एवं यक्ष-यक्षिणी व अन्य मंगल मूर्तियां भी विराजमान होकर भक्तो को आशीर्वाद प्रदान करेंगे।

 

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