मंदसौरमंदसौर जिला
पाषाण से परमात्मा बन सकते है और आत्मा में भी परमात्मा बनने की शक्ति है-आचार्य श्री सुंदरसागरजी महाराज

पाषाण से परमात्मा बन सकते है और आत्मा में भी परमात्मा बनने की शक्ति है-आचार्य श्री सुंदरसागरजी महाराज
मन्दसौर। हम सौभाग्यशाली है कि इस कलिकाल में वर्तमान शासन नायक भगवान महावीर स्वामी की पावन देशना को सुनने को मिल रही है। भगवान के दर्शन, पूजन, स्वाध्याय सुनने से व दान देने की इन क्रियाओं से पुण्य का बंधन जरूर होता है लेकिन केवल पूण्य के बंधन से मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती है। आचार्य भगवन्तों के द्वारा वर्णित आगम शास्त्रों में बताया गया कि मोक्ष प्राप्ति के लिये निग्रंथ मुनि मुद्रा धारण कर, भावों की विशुद्धि का होना आवश्यक है। भावों की विशुद्धि के लिये मन में किसी प्रकार का विकल्प न रखते हुए आत्मा का सच्चा श्रद्धान मजबूत होना चाहिए क्योंकि हर आत्मा में परमात्मा बनने की शक्ति है।
उक्त उद्गार स्थानीय नाकोड़ा नगर स्थित श्री सन्मतिकुंज संत निवास में धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री सुंदरसागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहे। संघ में विराजित आर्यिका 105 श्री काव्यमति माताजी ने प्रवचन के दौरान बताया कि हर मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन सही तरीके से करते हुए जीवन निर्वहन करना चाहिये जो कर्तव्यों का पालन समुचित ढंग से करता है उनको सारे अधिकार भी सुलभता से प्राप्त हो जाते है। प्रतिदिन मंगल बैला में किये गये सारे मंगल कार्यों से जीवन में मंगल ही मंगल होता है।
धर्मसभा के प्रारंभ में पूर्वाचार्यों के चित्र व दीप प्रज्जवलन परम संरक्षक डॉ. एस.एम. जैन, तपस्वी सेवा ग्रुप के शांतिलाल जैन, विनोद जैन, अनिकेत जैन, सुरेश मिण्डा, संजय मिण्डा, अमित गोदावत के साथ प्रो. अशोक अग्रवाल, जयंतिलाल जुआं, विजयेन्द्र सेठी एवं शांतिलाल बड़जात्या द्वारा किया गया। मंगलाचरण सुश्री ईशानी शाह द्वारा प्रस्तुत किया गया। शब्द सुमन से अभिनन्दन नंदकिशोर अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन पं. विजय कुमार गांधी, कोमलप्रकाश जैन पंछी, मानमल जैन, मुकेश जैन गरोड़ा, अरविन्द मेहता, जयंतीलाल जुआं द्वारा किये गये। जिनवाणी भेंट ललित जैन, सनतकुमार गांधी, जितेन्द्र दोशी, दिलीप जैन, दिलीप अग्रवाल, महावीर अग्रवाल, राकेश डोसी, विनोद सिंहल, अनिल जैन द्वारा भेंट की गई। आचार्य संघ को रमेश अग्रवाल, हंसमुख रंगीला, हुकुमचंद भूता, उमेश जैन भड़का, अशोक जैन चयन, निर्मल जैन, पं. अरविन्द जैन, दिलीप जैन भोलिया, दीपक भूता, आदिश गर्ग, जयकुमार बड़जात्या, सुरेश तेलवाला, राजकुमार पाटनी, राजकुमार बाकलीवाल, वीसी ग्रुप जूना मंदिर, नरसिंगपुरा जैन समाज, अग्रवाल नेमीनाथ मंदिर, आदिनाथ विहार दिगम्बर जैन मंदिर, अभिनंदन दिगम्बर जैन मंदिर आदि द्वारा श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया गया। कार्यक्रम का संचालन कोमल प्रकाश जैन पंछी द्वारा किया गया तथा आभार अभय मांदावत ने माना।
उक्त उद्गार स्थानीय नाकोड़ा नगर स्थित श्री सन्मतिकुंज संत निवास में धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री सुंदरसागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहे। संघ में विराजित आर्यिका 105 श्री काव्यमति माताजी ने प्रवचन के दौरान बताया कि हर मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन सही तरीके से करते हुए जीवन निर्वहन करना चाहिये जो कर्तव्यों का पालन समुचित ढंग से करता है उनको सारे अधिकार भी सुलभता से प्राप्त हो जाते है। प्रतिदिन मंगल बैला में किये गये सारे मंगल कार्यों से जीवन में मंगल ही मंगल होता है।
धर्मसभा के प्रारंभ में पूर्वाचार्यों के चित्र व दीप प्रज्जवलन परम संरक्षक डॉ. एस.एम. जैन, तपस्वी सेवा ग्रुप के शांतिलाल जैन, विनोद जैन, अनिकेत जैन, सुरेश मिण्डा, संजय मिण्डा, अमित गोदावत के साथ प्रो. अशोक अग्रवाल, जयंतिलाल जुआं, विजयेन्द्र सेठी एवं शांतिलाल बड़जात्या द्वारा किया गया। मंगलाचरण सुश्री ईशानी शाह द्वारा प्रस्तुत किया गया। शब्द सुमन से अभिनन्दन नंदकिशोर अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन पं. विजय कुमार गांधी, कोमलप्रकाश जैन पंछी, मानमल जैन, मुकेश जैन गरोड़ा, अरविन्द मेहता, जयंतीलाल जुआं द्वारा किये गये। जिनवाणी भेंट ललित जैन, सनतकुमार गांधी, जितेन्द्र दोशी, दिलीप जैन, दिलीप अग्रवाल, महावीर अग्रवाल, राकेश डोसी, विनोद सिंहल, अनिल जैन द्वारा भेंट की गई। आचार्य संघ को रमेश अग्रवाल, हंसमुख रंगीला, हुकुमचंद भूता, उमेश जैन भड़का, अशोक जैन चयन, निर्मल जैन, पं. अरविन्द जैन, दिलीप जैन भोलिया, दीपक भूता, आदिश गर्ग, जयकुमार बड़जात्या, सुरेश तेलवाला, राजकुमार पाटनी, राजकुमार बाकलीवाल, वीसी ग्रुप जूना मंदिर, नरसिंगपुरा जैन समाज, अग्रवाल नेमीनाथ मंदिर, आदिनाथ विहार दिगम्बर जैन मंदिर, अभिनंदन दिगम्बर जैन मंदिर आदि द्वारा श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया गया। कार्यक्रम का संचालन कोमल प्रकाश जैन पंछी द्वारा किया गया तथा आभार अभय मांदावत ने माना।