समाचार मध्यप्रदेश मंदसौर 02 फरवरी 2025 रविवार

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साहित्य महोत्सव से छोटी काशी ने इतिहास रचा है : श्री बंजारा (कैबिनेट मंत्री दर्जा)
साहित्य महोत्सव से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छोटी काशी का नाम बड़ा है : विधायक श्री डंग
साहित्य वह है जो सबके हित में है : कलेक्टर श्रीमती गर्ग
सीतामऊ साहित्य महोत्सव ने इतिहास और साहित्य की हर विधा में गागर में सागर भर दिया
त्रिदिवसीय सीतामऊ साहित्य महोत्सव का आज हुआ समापन
मंदसौर 1 फरवरी 25/ त्रिदिवसीय सीतामऊ साहित्य महोत्सव का शानदार ज्ञानवर्धक समापन हुआ। महोत्सव का शुभारंभ 30 जनवरी को हुआ था। इन तीन दिवस में सीतामऊ नगरी ने अपनी वैभवशाली संस्कृति का गान किया। साहित्य, कला एवं दर्शन क्षेत्र से जुड़ी देश की जानी मानी हस्तियों की उपस्थिति में मुख्य आयोजन 30, 31 जनवरी व 1 फरवरी को सीतामऊ में किया गया। इतिहास, साहित्य, कला, पर्यावरण, अन्य सभी क्षेत्र में कार्यरत देश की प्रमुख हस्तियां इसमें शामिल हुई। आयोजन को यादगार बनाने के लिए तीन दिवसीय कार्यक्रम में अलग-अलग दिन कई विधाओं से जुड़े रुचिकर कार्यक्रम भी किए गए। इतिहास, साहित्य, मुद्राशास्त्र, सिक्कों की यात्रा, सीतामऊ इतिहास का प्रदर्शन, यशोधर्मन और हूण संघर्ष का चित्रण, पर्यावरण और सभ्यता पर संवाद, संगीतमय शाम इत्यादि तरह-तरह के आयोजन हुए। चंबल नदी में सफारी, पक्षियों को देखने के साथ ट्रैकिंग की गई।
तृतीय दिवस महोत्सव की शुरुवात प्रात: 10:30 बजे से श्री कल्ला जी वैदिक विश्वविद्यालय, राजस्थान के संस्थापक डॉ वीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा भारतीय सांस्कृतिक परम्परा में शक्ति एवं शक्तिपीठ के विषय पर व्याख्यान के साथ प्रारंभ की गई। महोत्सव के दौरान मालवी संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मालवी संगोष्ठी श्री बृजेश जोशी, श्रीमती माया बदेका, श्रीमती यशिता दवे, श्री नरेंद्र त्रिवेदी, श्री नरेंद्र भावसार, श्री नंदकिशोर राठौर, श्रीमती रुपाली, श्री गोपाल बैरागी, श्री बंशीलाल टांक द्वारा आयोजित की गई। संगोष्ठी संस्कार, संस्कृति, लोक संस्कृति पर केंद्रित रही। पैरामाउंट एकेडमी सीतामऊ के बच्चों द्वारा नृत्य प्रस्तुत किए गए। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं डीन श्री शिव कुमार भनोट द्वारा डॉ. रघुवीर सिंह के ऐतिहासिक योगदान के विषय पर व्याख्यान दिया। एडिनबर्ग विश्वविद्यालय, स्कॉटलैंड लेखिका डॉ.यशस्विनी चंद्रा द्वारा युद्ध में घोड़े विषय पर वर्च्यूअल व्याख्यान दिया। कहानी लेखन प्रतियोगिता के तीन विजेताओं को पुरस्कार वितरण किया गया। साथ ही मंदसौर की वनस्पतियों और जीवों के प्रकाशन पर पुस्तक के बारे में सीईओ श्री प्रभांशु द्वारा जानकारी दी गई। समापन अवसर पर पूर्व विधायक श्री राधेश्याम पाटीदार, श्री निहालचंद मालवीय, श्री अनील पांडे, नगर परिषद अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष, जनपद पंचायत अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष सहित सभी जनप्रतिनिधि, एसडीएम श्रीमती शिवानी गर्ग, जनपद सीईओ श्री प्रभांशु, जिला अधिकारी, ब्लॉक स्तरीय अधिकारी, बड़ी संख्या में श्रोता, विद्यार्थी, पत्रकार मौजूद थे।
समापन अवसर पर मध्य प्रदेश राज्य विमुक्त घुमक्कड़ एवं अर्ध घुमक्कड़ जाति विकास अभिकरण के अध्यक्ष श्री बाबूलाल बंजारा (कैबिनेट मंत्री दर्जा ) द्वारा कहा गया कि, साहित्य महोत्सव से छोटी काशी ने इतिहास रचा है। पहले कपड़े कैसे बनते थे, कैसे उनका परिवहन होता था। इतिहास की विस्तार से जानकारी प्रदान की। एक समय था जब पूरे भारत में बैलगाड़ी से परिवहन होता था और यह परिवहन का काम बंजारा समुदाय के लोग किया करते थे। इतिहास में बंजारा समाज का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है।
विधायक श्री डंग द्वारा कहा गया कि साहित्य महोत्सव से आज छोटी काशी सीतामऊ का महत्व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ गया है। साहित्यकार, इतिहासकार, पर्यावरणविद से सबको सीखने को मिला। बंजारा समाज का देशभक्ति का इतिहास देखें। उनके जज्बे को देखें।
देश के लिए काम नहीं आए तो यह जीवन व्यर्थ हैं, इतिहास उन्हीं को याद करता है, जो जीवन में अच्छा काम करते हैं। इसलिए देश के लिए काम करें, देश सेवा से बड़ा कोई काम नहीं।
कलेक्टर श्रीमती गर्ग ने साहित्य महोत्सव कार्यक्रम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस वर्ष 26 जनवरी गणतंत्र दिवस की थीम थी, विरासत और विकास। इस थीम को एक रूप और आकार दिया गया। थीम को विरासत से जोड़ा गया। इस तरह की आयोजन हर साल होते रहे, साहित्य वह है जो सबके हित में होता है। तीन दिवसीय महोत्सव के आयोजन का सभी ने लुफ्त उठाया। लोग आपस में जुड़े, यादें लेकर गए। सभी को सीखने का अवसर मिला। अलग-अलग क्षेत्र के विद्वानों से कुछ नया-नया जानने को मिला। सौंदर्य की झलक, इतिहास के अनुभव, सिक्कों से कहानी मिली, पर्यावरण संरक्षण की बातें मिली, तारों और विचारों पर चर्चा मिली। विचारों को नई ऊर्जा और प्रवाह मिली। फोटो संलग्न
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सीतामऊ महोत्सव में ऐतिहासिक धरोहरों और वन्य प्राणियों के छायाचित्रों की प्रदर्शनी को मिली सराहना
मंदसौर 1 फरवरी 25/सीतामऊ महोत्सव के दौरान संयुक्त कलेक्टर राहुल चौहान द्वारा अपने कैमरे में क़ैद किए गए ऐतिहासिक धरोहरों और वन्य प्राणियों के छायाचित्रों की प्रदर्शनी को काफी सराहना मिली। उनकी शौकिया फोटोग्राफी में प्राकृतिक सौंदर्य, वन्य जीवन और ऐतिहासिक विरासत का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। जिससे दर्शकों को विरासत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी मिला। प्रदर्शनी में प्रदर्शित छायाचित्रों को सराहे जाने से यह स्पष्ट होता है कि लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति की सुंदरता को संजोने के प्रति रुचि रखते हैं। ऐसे आयोजन न केवल कला और फोटोग्राफी के महत्व को उजागर करते हैं, बल्कि पर्यावरण और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में जागरूकता भी बढ़ाते हैं। राहुल चौहान शौकिया तौर पर फोटोग्राफी का काम करते हैं और यदा कदा उन्हें अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते रहते हैं। श्री चौहान बतलाते हैं कि जब यह बात मंदसौर कलेक्टर अदिति गर्ग के संज्ञान में आई तो उन्होंने कहा कि सीतामऊ महोत्सव ऐसे ही कलाकारों को प्रोत्साहित करने का आयोजन है। इसमें आपको जरूर अपने कार्यों को पब्लिक करना चाहिए। इस तरह ये प्रदर्शनी लगाने के काम ने मूर्त रूप धारण किया।संयुक्त कलेक्टर राहुल चौहान द्वारा लिए गए चंबल वैली के छायाचित्रों ने सीतामऊ महोत्सव में दर्शकों का ध्यान खींचा। उनके कैमरे ने चंबल घाटी की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, वहां की वनस्पति, दुर्लभ वन्यजीवों को खूबसूरती से कैद किया। गांधीसागर में चंबल नदी के शांत जल, घाटियों और घने जंगलों की खूबसूरती, रहस्यमयी इतिहास और समृद्ध जैव विविधता को इन छायाचित्रों ने इसकी अनूठी विरासत को जीवंत कर दिया। रॉक पेंटिंग्स (शैल चित्रों) की छवियों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। ये प्राचीन चित्र चंबल घाटी और उसके आसपास की गुफाओं व चट्टानों पर पाए जाते हैं, जो हजारों साल पुराने मानव सभ्यता के प्रमाण माने जाते हैं। इनमें शिकार के दृश्य, युद्ध की झलक, पशु-पक्षी, मानव आकृतियाँ और दैनिक जीवन से जुड़ी गतिविधियाँ शामिल थीं. ये चित्र प्राकृतिक रंगों से बनाए गए हैं, जिनमें गेरुआ, काला, सफेद और पीला प्रमुख हैं। ये रॉक पेंटिंग्स न केवल प्राचीन मानव सभ्यता की झलक दिखाती हैं, बल्कि इतिहास और कला प्रेमियों के लिए शोध और अध्ययन का महत्वपूर्ण स्रोत भी हैं। धर्मराजेश्वर मंदिर के छायाचित्र इस महोत्सव की प्रमुख आकर्षण रहे। इन चित्रों ने मंदिर की ऐतिहासिक भव्यता और प्राकृतिक सौंदर्य को जीवंत कर दिया। यह मंदिर चंबल घाटी के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों में से एक है और अपनी अद्भुत शिल्पकला व प्राकृतिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।यह मंदिर एकाश्मीय (एक ही चट्टान को काटकर बनाए गए) गुफा मंदिर है, जो भीमबेटका और एलीफेंटा गुफाओं की तरह ही अद्भुत शिल्पकला को दर्शाता है।यहाँ भगवान शिव की शिवलिंग विराजमान है, जिसे भक्त धर्मराजेश्वर महादेव के रूप में पूजते हैं। माना जाता है कि यह मंदिर 5वीं से 6वीं शताब्दी के दौरान गुप्त काल में बनाया गया था।संयुक्त कलेक्टर राहुल चौहान द्वारा ली गई बौद्ध गुफाओं के छायाचित्रों ने इतिहास प्रेमियों को आकर्षित किया। इन तस्वीरों में गुफाओं की अनूठी वास्तुकला, मूर्तिकला और प्राकृतिक सौंदर्य को बारीकी से कैद किया गया, जिससे दर्शकों को बौद्ध संस्कृति और विरासत को करीब से समझने का मौका मिला।
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कचनारा चौकी प्रभारी को किया लाईन हाजिर
दलौदा।रात्रि को कांबिंग गश्त के दौरान पुलिस अधीक्षक श्री अभिषेक आनंद अचानक से निरीक्षण करने दलौदा थाने पहुंचे।
दलौदा थाना प्रभारी बलदेव सिंह चौधरी अवकाश पर चल रहे हैं, इस कारण प्रभार कचनारा चौकी प्रभारी पूर्णिमा सिंह के पास था।
निरीक्षण के दौरान पूर्णिमा सिंह थाने पर उपस्थित नहीं मिली, इस पर पूर्णिमा सिंह को पुलिस अधीक्षक श्री अभिषेक आनंद ने ने लाइन कर दिया।
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रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) योजना के अंतर्गत लगभग 17 हजार आवास
मंदसौर- जिले को प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) योजना के अंतर्गत लगभग 17 हजार आवास का नया लक्ष्य प्रदान करने पर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, देश के कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल का हार्दिक आभार…….
इस वित्तीय वर्ष में मंदसौर जिले को कुल 25 हजार प्रधानमंत्री आवास का लक्ष्य प्राप्त हो चुका है , जो ऐतिहासिक है । निश्चित रूप से इस योजना के माध्यम से मंदसौर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले ग्राम वासियों को पक्के मकान उपलब्ध हो सकेंगे ।
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युवाओं के लिए कई सेक्टर्स के दरवाजे खुलेंगें
प्रधामंत्री नरेन्द्र मादी सरकार का ’ज्ञान’ पर फोकस है, ज्ञान मतलब- गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति। वित्त मंत्री ने कहा कि 10 साल में हमने बहुमुखी विकास किया है। इस बार बजट मे सरकार के 10,000 करोड़ रुपये के योगदान से स्टार्टअप्स के लिए फंड की व्यवस्था की गई। युवाओं के लिए कई सेक्टर्स के दरवाजे खुलेंगें। सरकार पहली बार पांच लाख महिलाओं, एससी और एसटी उद्यमियों के लिए 2 करोड़ रुपये का ऋण देगी। इस बजट से आम आदमी को बहुत फायदा मिलेगाण् इससे बड़ा परिवर्तन आएगा, इस बजट से आत्मनिर्भर भारत को गति मिलेगी। -राधेश्याम मारू डॉयरेक्टर रूरल पब्लिक सर्विसेस, गैर सरकारी संगठन, मंदसौर, म.प्र.
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