आध्यात्ममंदसौर जिलासीतामऊ

प्रजापिता ब्रह्मा बाबा जो परमात्मा शिव के साकार माध्यम थे- बीके कृष्णा दीदी

प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की 56 वी पुण्यतिथि मनाई गई

सीतामऊ । प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संस्था के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा को पुष्पांजलि अर्पित कर 56 वीं पुण्यतिथि मनाई गई।

इस अवसर पर राजयोगी ब्रह्माकुमारी कृष्णा दीदी ने ईश्वरी महा वाक्य सभी भाई बहनों को सुनाते हुए कहा कि प्रजापिता ब्रह्मा बाबा जो परमात्मा शिव के साकार माध्यम थे उन्होंने अपने जीवन को संपूर्ण ईश्वरी सेवा में समर्पित किया और अपना तन मन धन जन सेवा में लगाकर इस संस्था की स्थापना की उन्होंने आठ माता बहनों के नाम पर अपना सारी प्रॉपर्टी व धन नाम की और उन्हीं के द्वारा संस्था का कारोबार चलता था आज भारत सहित अनेक देशों में यह संस्था अपनी सेवाएं दे रही है जिससे सारे विश्व में अनेक आत्माओं का जीवन श्रेष्ठ बनता जा रहा है ।बाबा चार चार घंटे भक्ति क्यो कि उसको क्या कमी थी कोई कमी नहीं थी। पर बाब ने सबके लिए त्याग किया। बाबा ने अपने स्वयं के बच्चों कि नहीं सोचा उनका स्वयं के लिए नहीं समाज के लिए त्याग का भी त्याग किया। बाबा ने संपूर्ण रिती से तपस्या कर इसी जनवरी माह में अव्यक्त से व्यक्त हुए। बाबा अभी भी संपूर्ण बनकर सुक्ष्म वतन में बैठे हुए हैं। हमारे पूर्ण बनने का इंतजार कर रहे हैं।आज खास दिन बाबा के प्रति योग करना है।बाबा 18,19,20 जनवरी को दर्शन के लिए रखा था। बाबा ने सभी को दर्शन आशीर्वाद दिया। बाबा आज भी हमें दर्शन आशीर्वाद दे रहे हैं।

उसके पश्चात गौरव भाई द्वारा कामेंन्टीॅ के माध्यम से आत्मा अनुभूति वह परमात्मा अनुभूति कराई गई । आगे कहा कि जन्म 1980 में एक गांव में शिक्षक के घर में बाबा दादा लेखराज कृपलानी का जन्म हुआ। बाबा ने छोटी सी उम्र में अनेक काम किया फिर उन्होंने हीरे जवाहरात का व्यवसाय शुरू किया इसके बाद उन्होंने हीरा व्यापारी के रूप में अपनी एक पहचान बनाई। दादा लेखराज और यह पांच भाई थे जिसमें दादा लेखराज सबसे आगे से अग्रसर थे जो सामाजिक कार्यों के लिए जाने जाते थे 1936 में दादा लेखराज जी ब्रह्मा बाबा अपने लौकिक जीवन से निवृत होने की तैयारी करते हुए समाज के सेवा में सक्रिय जीवन की ओर आगे बढ़े दादा लेखराज को जब आध्यात्मिक ज्ञान का साक्षात्कार हुआ और भगवान शिव के दर्शन हुए तत्पश्चात उन्होंने अपने व्यवसाय को सबमिट कर समय शक्ति और धन को आध्यात्मिक शिक्षा की ओर बढ़ते हुए 1937-38 में आठ युवा भाई बहनों की एक व्यवस्थापक कमेटी ट्रस्ट बनाया और अपनी सारी चल -अचल संपत्ति ट्रस्ट को समर्पित करते हुए ब्रह्माकुमारी सेवा केदो की स्थापना करते हुए मार्गदर्शन किया और 18 जनवरी 1969 को 56 वर्ष की आयु में अपना भौतिक देहात त्याग दिया।

जगदीश भाई नाटाराम ने भी ब्रह्मा बाबा के जीवन के अनुभव को सुनाया पूजा बहन द्वारा ब्रह्मा बाबा के जीवन कहानी पर प्रकाश डाला गया ।

बीके प्रीति बहन द्वारा ब्रह्मा बाबा ने कैसे जीवन में इकोनॉमी की उसका अनुभव सुनाया । मोङीराम पंथी द्वारा सभी को योग की अनुभूति कराई गई तत्पश्चात ब्रह्मा बाबा वह शिव बाबा को भोग लगाया गया तथा सभी भाई बहनों ने ब्रह्मा बाबा के चित्र पर माल अर्पण किया वह श्रद्धांजलि दी ।

कार्यक्रम में गुणवंती कोठारी पदमा  मेहरा लक्ष्मीनारायण मांदलिया नरेंद्र  जैन दिनेश सेठिया लदुना दीपक पाटीदार नरेंद्र लालावत, गोपाल गौङ व सीतामऊ के सहित नागरिक बहिनें भ्राता उपस्थित रहे।अंत में सभी को ईश्वरी प्रसाद वितरित की गई।

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