आलेख/ विचारमंदसौरमध्यप्रदेश
ऐसा नव वर्ष मानना किस काम का जो ना तो प्रकृति में परिवर्तन लाए और न ही हमारे जीवन में

ऐसा नव वर्ष मानना किस काम का जो ना तो प्रकृति में परिवर्तन लाए और न ही हमारे जीवन में
आध्यात्मिक गुरु आचार्य हरीश भारद्वाज
पिपल्या जोधा
संदेश
हमारा नूतन वर्ष आधी रात को नशे में धूत नहीं हो सकता हम सनातन धर्म को मानने वाले भारत की पुण्य धरा पर अपना जीवन व्यतीत करने वाले भारतीय लोग हैं , ऐसा नव वर्ष किस काम का जो ना तो प्रकृति में परिवर्तन लाए ना ही हमारे जीवन में भारत में कुछ लोग अपना नूतन वर्ष भूल गए हैं और अंग्रेजों का नूतन वर्ष मना रहे हैं जब अंग्रेजों ने भारत में र मैं राज किया और उन्होंने हमारी संस्कृति खत्म कर अपनी पश्चिमी संस्कृति थोपनी चाही जिसके कारण आज भी कई भारतीय वासी मानसिक रूप से गुलाब है और वह भारतीय नव वर्ष भूल गए हैं आज अंग्रेजी नव वर्ष मना रहे है 31 दिसम्बर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर शराब पीते है, हंगामा करते हैं, रात को पीकर गाड़ी चलाने से दुर्घटना की सम्भावना, रेप जैसी वारदात, पुलिस प्रशासन बेहाल और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश। 1 जनवरी को जो नया वर्ष मनाते है उसमें कुछ तो नयी अनुभूति होनी चाहिए लेकिन ऐसा कुछ भी नही होता है । नहीं मौसम में प्रकृति मे, कृषि में ना किसी में परिवर्तन दिखाई नही देता है जबकी हिन्दू नववर्ष का प्रारंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा गुड़ी पड़वा से होता है। भारतीय हिंदू नूतन वर्ष में बहुत से परिवर्तन दिखाई देते हैं, ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था। इसी दिन से नया संवत्सर शुरू होता है। श्रीराम का राज्याभिषेक, माँ दुर्गा की उपासना की नवरात्र व्रत का प्रारंभ , प्रारम्भयुगाब्द (युधिष्ठिर संवत्) का आरम्भ , उज्जयिनी सम्राट- विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत्प्रारम्भ , शालिवाहन शक संवत् (भारत सरकार का राष्ट्रीय पंचांग)महर्षि दयानन्द द्वारा आर्य समाज की स्थापना ,भगवान झूलेलाल का अवतरण दिन , मत्स्यावतार दिन ,गणितज्ञ भास्कराचार्य ने सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन, महीना और वर्ष की गणना करते हुए ‘पंचांग ‘ की रचना की ।मार्च अप्रैल में स्कूलों का रिजल्ट आता है नई कक्षा नया सत्र शुरु होता है ,बैंकों का भी नया सत्र शुरू होता है। मार्च-अप्रैल में फसल कटती है नया अनाज घर में आता है तो किसानों का नया वर्ष और उत्साह I आप इन तथ्यों से समझ गए होंगे कि भारतीय संस्कृति कितनी महान है । सनातन (हिन्दू) धर्म में लगभग 40 त्यौहार आते हैं जिससे जीवन में हमेशा खुशियां बनी रहती हैं और बड़ी बात है कि हिन्दू त्यौहारों में एक भी ऐसा त्यौहार नही है जिसमें दारू पीना, पशु हत्या करना, मांस खाना, पार्टी करने आदि के नाम पर दुष्कर्म को बढ़ावा मिलता हो । ये सनातन हिन्दू धर्म की महिमा है। भारतीय हर त्यौहार के पीछे कुछ न कुछ वैज्ञानिक तथ्य भी छुपे होते हैं जो जीवन का सर्वांगीण विकास करते हैं ।