आध्यात्ममंदसौरमध्यप्रदेश

मित्रता हो तो राम सुग्रीव और कृष्ण सुदामा जैसी- श्री रामदयालजी महाराज

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पंचम दिवस प्रवचन माला में वंदन दास्य और सख्य का हुआ निरूपण

भगवान से विमुक्त रहता है कंगाल और सम्मुख हो जाता है मालामाल-पूज्य आचार्य

मन्दसौर। भगवान जो भी करते है अच्छा ही करते है परन्तु हम समझ नहीं पाते और ईश्वर में दोष निकालने लगते है। जो राम भरोसे रहता है उसका सब काम ईश्वर संभाल लेते है।

स्थानीय धर्मधाम गीता भवन में आयोजित नवधा भक्ति प्रवचन माला के पंचम दिवस रामस्नेही सम्प्रदाय के शाहपुरा पीठाधीश्वर एवं धर्मधाम गीता भवन के परम संरक्षक जगद्गुरू पूज्य आचार्य श्री रामदयालजी महाराज ने वंदन भक्ति के संबंध में उक्त विचार प्रकट करते हुए पूज्य ने कहा कि गुरू को, देव को, भगवान को, विद्वतजनों को इनमें से जो भी जहां भी मिल जाये सम्मुख आने उन्हें वंदन, प्रणाम अवश्य करो। आप दो सेकेण्ड के लिये वंदन करोगे और आपको जीवन भर के लिये उनका आशीर्वाद मिलेगा जो आपको धन्य और कृतार्थ कर देगा।

जो वंदन करते है उनकी रक्षा का समस्त भार भगवान स्वयं वहन करते है। भीष्म पितामह का उदाहरण देकर पूज्य श्री ने कहा कि वंदन दो तरह किया जाता है जैसे कि भीष्म पितामह ने अपने अंतर में भगवान के निराकार निगुर्ण रूप का ध्यान करते रहे और सम्मुख आने पर भगवान के साथ-साथ दर्शन करते हुए अपने शरीर को त्यागकर अपने आत्म ज्योति को भगवान में विलीन कर दिया।

जीवन में कम से कम एक बार ही सही सच्चे मन दिल से भगवान का वंदन कर प्रार्थना करो। हे परमात्मा, आप अंतसमय में अपने नाम का स्मरण मुझे अवश्य करा देवे।

भगवान के नाम का वंदन कर ने मात्र से अश्वमेघ यज्ञ का फल प्राप्त हो जाता है और पुनः जन्म मृत्यु के बंधन में पड़ना नहीं पड़ता।

प्रतिदिन सद्गुरू, माता-पिता इनके उपकार और आशीर्वाद को लेना नहीं भूले। हमें हमारे जन्म का समय, तारीख, जवानी की तारीख, बुढ़ापा की तारीख किस समय आई और निकल गई कोई बता नहीं सकता। अर्चना भक्ति परिपक्व होने के बाद फिर सीधा बंधन भक्ति में प्रवेश हो जाता है।

वंदन भक्ति का गीता सबसे उत्कृष्ट अद्भूत और विलक्षण उदाहरण है। हमें चराचर जगत में दाये, बाये, सीधे, उपर नीचे सब ओर भगवान को ही देखना, अनुभव करना चाहिये। चराचर को इस प्रकार से देखने, सुनने, और वंदन करने का वैदो, पुराणों सभी में वर्णन किया गया है कोई भी ऐसा शास्त्र नहीं है जिसमें वंदन को महत्व नहीं दिया गया हो।

प्रातः उठते ही, घर से बाहर जाते समय, दुकान नौकरी आदि कार्य करते समय और वापस काम से घर लौटते समय भोजन करने से पहले अन्नदेव को और सभी को शयन से पूर्व भगवान को वंदन कर देना चाहिये फिर देखो जीवन में कितना उत्साह, कितनी शांति और प्रत्येक कार्य में किस प्रकार सफलता प्राप्त होगी।

दास भक्ति के संबंध में आपने सीधा-सीधा बताया कि दास शब्द को उल्टा करने पर जो शब्द बनता है वह होता है सदा अर्थात सदा राम, गुरू को अपना स्वामी मानकर उनकी आज्ञा, उनकी सेवा में तनमन से हनुमान की तरह लगे रहना यह है दास भक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण। दास जीवन में भोगवाद नहीं त्यागवाद होता है परन्तु दास बनना सरल नहीं बहुत टेड़ा काम है जिसमें पहले अपने आपा को खोना पड़ता है। दास के लिये यह नियम लागू होता है कि कानून न कायदा जी हुजुरी (स्वामी की आज्ञा पालन में फायदा)। अपने स्वामी के लिये समर्पित हो जाना, स्वामी के प्रति एक भाव होना दास भक्ति का एक उदाहरण है।

संत श्री शंभुरामजी महाराज धलपट, नरपतरामजी महाराज उदयपुर, स्वामी रामनारायणजी महाराज, स्वामी दिवेशरामजी महाराज, स्वामी निर्मलरामजी महाराज, स्वामी ईश्वरदासजी महाराज मचलाना आदि का सानिध्य प्राप्त हुआ।

आरती कैलाश रत्नावत, राजेन्द्र अखावत, बद्रीलाल पोरवाल पिपलिया, सूर्यनगरी अफजलपुर वाला, रामेश्वर गर्ग, महेश गर्ग, सूरजमल गर्ग चाचा ने किया। चढ़ावा दिनेश शर्मा, प्रीति बहन शर्मा, माता सुधाकर द्वारा चढ़ाया गया।

पर्यावरण मंत्री हरदीपसिंग डंग ने पूज्य स्वामी का चरण वंदन का आशीर्वाद लिया। नपाध्यक्ष रमादेवी बंशीलाल गुर्जर ने पूरे समय कथा पाण्डाल में महिलाओं के बीच बैठकर कथा श्रवण का लाभ लिया। गीता भवन ट्रस्ट की ओर से पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया गया।

इस अवसर पर पूज्य आचार्य श्री गीता भवन परिवार तथा नगरवासियांे की ओर से पूज्य आचार्यश्री और स्वामी रामनिवासजी महाराज को अभिनंदन पत्र भेंट किया गया।

उपस्थित रहे- न्यायमूर्ति श्री गिरीराज सक्सेना, लक्ष्मणदास चारण इंदौर, रामदान चारण, सीताराम चारण, बाबू हाराज, मागीलाल बर्रामा, संयोजक सम्पलाल कालिया, राधा कालिया, अध्यक्ष प्रहलाद काबरा, आशा काबरा, सत्यनारायण पलोड़, सुभाष अग्रवाल, ओम फरक्या, जगदीश चौधरी, सुमित्रा चौधरी, प्रेम सिसौदिया, रजनीश पुरोहित, अभिषेक शर्मा, बालू रावत, हर्षद भाई डोडिया प्रेमचंद सिसौदिया, सुभाष अग्रवाल, विद्या उपाध्याय, पुष्पा पाटीदार, अनुपमा बैरागी, निर्मला माली, उमा करंजिया, सुधा फरक्या, टीना दीदी, रक्षा जैन, ज्योति विजयवर्गीय, पुष्पा गौड़, शशि सांखला, कविता आदि। मंच संचालन सचिव पं. अशोक त्रिपाठी ने किया।

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