चिंता दुखों का कारण, इससे व्यक्ति कमजोर होता है – संत श्री ज्ञानानंदजी महाराज

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केशव सत्संग भवन में चल रहे है चार्तुमासिक प्रवचन
मन्दसौर। नगर के खानपुरा स्थित श्री केशव सत्संग भवन में चातुर्मास हेतु ज्ञानानंदजी महाराज हरिद्वार विराजित है जिनके मुखारविन्द से प्रतिदिन श्रीमद भागवत कथा के एकादश स्कंद का वाचन किया जा रहा है, जिसका श्रवण करने के प्रतिदिन प्रातः 8.30 बजे से 10 बजे तक बडी संख्या में धर्मालुजन पधार रहे है।
मंगलवार को धर्मसभा में संतश्री ज्ञानानंदजी महाराज ने कहा कि सांसारिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति को चिंता सबसे ज्यादा सताती है। कभी परिवार की चिंता, कभी व्यापार की तो कभी स्वास्थ्य किसी न किसी कारण से व्यक्ति चिंता में घिरा रहता है जिससे व्यक्ति कमजोर होता है। आपने बताया कि एक व्यक्ति जब भी हाथी आता था उसे अपने बल से भगा देता था। सब उसकी तारीफ करते थे उसकी मां से पूछते थे कि इसे क्या खिलाते हो तब उसकी मां कहती थी हमारे पास कुछ नहीं है अत्यंत निर्धन है सिर्फ रोटी और नमक खाते है। एक दिन उसकी मां ने सिर्फ रोटी दी तो अगले दिन वह व्यक्ति हाथी से नहीं लड पाया क्योंकि वह चिंता में गिरा हुआ था अर्थात् चिंता व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर कर देती है।
इसलिए अपना मन ओर मस्तिष्क प्रभु भक्ति में लगाओं और अपने जीवन की बागडोर परमात्मा के हाथ में दे दो फिर अपनी चिंता परमात्मा करेंगे और अपना चिंता मुक्त रहो। आपने कहा कि आप जितना भरोसा ईश्वर पर करोगे उतना ही भरोसा ईश्वर आप पर करेंगे।
धर्मसभा में संतश्री ने कहा कि एकत्रित होकर रहना चाहिए। आजकल अकेले रहना का चलन है जो कि अत्यंत दुखदाई पहले के परिवारों में लोग साथ में एकजुट होकर रहते थे तो सब खुशहाल रहते थे।
मंगलवार को धर्मसभा के अंत में भगवान की आरती उतारी गई जिसके पश्चात् प्रसाद का वितरण किया गया। धर्मसभा में विशेष रूप से केशव सत्संग भवन के अध्यक्ष जगदीशचंद्र सेठिया, सचिव कारूलाल सोनी, प्रहलाद पंवार, प्रवीण देवडा, कमल देवडा, मदनलाल गेहलोत, घनश्याम मोदी, रविन्द्र पाण्डेय, कन्हैयालाल रायसिंघानी, राव विजयसिंह,भगवतीलाल पिलौदिया, जगदीश गर्ग, घनश्याम भावसार सहित बडी संख्या में महिलाएं पुरूष उपस्थित थे।