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संस्कार दर्शन
आलोट। समीपस्थ ग्राम अरवलिया भामा में 25 जनवरी से सात दिवसीय श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा कथामृत रस पंडित कैलाश नारायण शर्मा माऊखेड़ा सीतामऊ के मुखारविंद से प्रवाहित हो रहा है। कथा के प्रथम दिवस भव्य कलश यात्रा के साथ कथा प्रारंभ हुई ।
कथा का ज्ञानामृत कराते हुए पंडित कैलाश नारायण शर्मा ने कहा कि मनुष्य को जीवन में आवेश गुस्सा और धन दौलत पर कभी घमंड तथा कदाचार कि और कभी नहीं जाना चाहिए। जिन्होंने गुस्सा धन दौलत पर घमंड और कदाचार किया उनका विनाश हुआ। ऐसी शिक्षा रामायण में रावण महाभारत में कंस,कौरवों और श्रीमद् भागवत कथा के धुंधकारी और गोकर्ण का सुंदर प्रसंग सिखने को मिलती है।पं श्री शर्मा ने कहा कि माता पिता अपनी संतानों को गोकर्ण की तरह संस्कारित शिक्षित राष्ट्रभक्त पित्र भक्त गौ भक्त बनाएं ना कि धुंधकारी की तरह दुष्ट खल व्यभिचारी भ्रष्टाचारी बनाएं माता पिता ही अपनी संतानों के सच्चे संरक्षक होते हैं जिन्हें संस्कार और सेवा की शिक्षा प्रदान कर सकते हैं पहला गुरु मां और दूसरा गुरु पिता होता है आज की युवा पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति को अपनाकर अपने जीवन को खराब कर रही है पश्चात संस्कृति सुविचारों से कुविचार और एकल परिवार कि ओर ले जाती है। जबकि हमारी सनातन संस्कृति मान सम्मान सुविचारों कि ओर ले जाती है। अतः युवा पीढ़ी को हमारी ऋषियों की सनातन संस्कृति अपना करके अपने गांव नगर जिले और राष्ट्र को गौरवान्वित कर जीवन को आनंदमय बनाएं। मनुष्य जीवन मिलना बड़ा दुर्लभ है इसके लिए देवता भी तरसते हैं अतः जीवन को बर्बाद ना करें। इस अवसर पर उपस्थित भक्तजनों ने कथा श्रवण लाभ प्राप्त कर भगवान श्री कृष्ण श्रीमद् भागवत पौथी कि पुजा अर्चना कर महाआरती कर दर्शन आशीर्वाद प्राप्त किया।