भगवान राम से हममें दस बुराईयों का हराने और अच्छाईयों का आशीर्वाद प्रदान करने कि प्रार्थना करने का पर्व है दशहरा – बीके कृष्णा दीदी

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सीतामऊ में दशहरा उत्सव मनाया गया
सीतामऊ। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय प्रभु उपहार भवन सीतामऊ विजयादशमी दशहरा उत्सव मनाया गया।
इस अवसर पर अपने आध्यात्म वचन में बीके कृष्णा दीदी ने कहा कि रावण बहुत विद्वान बुद्धिमान था बहुत ही चमत्कारिक था।आज पूरे विश्व में रावण दहन किया जा रहा है।
कृष्णा दीदी ने कहा कि अभिमान कि देह से रावण कि उत्पत्ति हुई।जब देवताओं में विकारों का प्रवेश होने लगा ऐसे ही विकारों से रावण कि उत्पत्ति हुई है। पुरुष और महिला के पांच पांच विकारों को मिलाकर रावण बना। रावण एक ही सिर वाला था पर उसमें दस विकार समाएं हुए थे। ये दस विकार काम, क्रोध, लोभ, मोह, द्वेष, घृणा, पक्षपात, अहंकार, व्यभिचार और धोखा उसके सिर में चलते रहते थे इसलिए दस गलत विचार मन सिर में होने से उसकी आंखों से नजर भी दस विचारों के अनुसार देखती थी इसलिए दशानन कहते हैं।
कृष्णा दीदी ने आगे कहा कि आज रावण जगह जगह जलाया जाता है और सभी खुश होकर देखने जाते देखते हैं। रावण में आसुरी वृतियां बुराईयां थी उस कारण उसे हम सब मारते हैं। हम नवरात्रि में नौ दिनों तक मां कि पूजा करते फिर दशहरा विजयादशमी मनाते हैं।हम रावण तों मार रहे पर असली में जो बुराई रावण में थी वे बुराईयां हम मानव समाज में आ गई है। आज हम रावण को जलाने जातें हैं पर अपनी बुराईयां समाप्त करने का संकल्प नहीं लेते हैं तो रावण कैसे जलेगा जो जल रहा वो केवल दिखावा कर रहे है। वर्तमान समय में देखा जाए तो दशहरा भगवान राम से हममें दस बुराईयों का हराने और अच्छाईयों का आशीर्वाद प्रदान करने कि प्रार्थना करने का पर्व है। इसलिए सच्चा रावण जलाने के लिए हममें जो बुराई थी वह रावण के पूतले में समर्पित कर जलाएंगे। जब हम सभी बुराई को छोड़ देंगे तो यह बाबा का धाम बन जाएगा तथा घर घर समाज में खुशीयों स्वर्ग कि तरह लोट आएगी।
बीके प्रिति दीदी ने कहा कि हममें पांच बुराईयां है। उन्हे त्यागने के संकल्प का दिन विजयादशमी पर्व है।का रावण जब सीता मैया को लेने आया तो सीता मैया को भी उस लक्ष्मण रेखा से अंदर रहना था।सीता मैया ने लक्ष्मण रेखा को लांघ दी तो क्या हुआ माता का उस राक्षस ने अपहरण करने का अवसर मिल गया। इसलिए हम सबको अपनी मर्यादा में रहना है। मर्यादा में रहकर राम मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम हो गये।
जलते पुतले में बुराईयां कि अर्पित
उत्सव में कागज के पुतला बनाकर उसमें सभी उपस्थित जनों ने अपनी अपनी बुराईयों को लिखकर जल रहे रावण के पूतले में अर्पित कर लिखी बुराई को छोड़ने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर वरिष्ठ नरेंद्र जैन अधिवक्ता पियुष मेहरा, संपादक लक्ष्मीनारायण मांदलिया, गौरव जैन, मोहन लाल भोई, दशरथ पाटीदार, कारुलाल धनोतिया सहित पुरुष एवं मातृशक्ति उपस्थित रहे।