प्राकृतिक रूप से सुंदरता बटोरे हुए तीर्थो में तीर्थ तक्षकेश्वर (ताखाजी) महादेव तीर्थ

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तक्षकेश्वर महादेव-
भानपुरा:- नागों के राजा तक्षक का तक्षकेश्वर मंदिर, तेह. भानपुरा मंदसौर जिले का ही नहीं प्रदेश व देश का जाना-पहचाना मंदिर है। ये स्थान प्राकृतिक रूप से सुंदरता बटोरे हुए है। हिंगलाज रोड पर जिले से 122 किलोमीटर दूर नावली भानपुरा में यह स्थित है। यहां हर मौसम में ही टूरिस्टों का आवागमन लगा रहता है। क्षेत्रीय लोग इसे तखाजी मंदिर के नाम से भी जानते हैं। –
यहां नागराज तक्षक की प्रतिमा पत्नी व पुत्र के साथ मौजूद है। उनके एक हाथ में मानव सिर को दिखाया गया है। यह 12वीं सदी की होना होना बताई जा रही है। इसी प्रकार तक्षक प्रतिमा के सामने ही भगवान धनवंतरी की प्रतिमा भी यहां स्थापित है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार बैसाख माह की पूर्णिमा को यहां प्रतिवर्ष एक मेला भरा जाता है।
राजा परिक्षित को मिले नागों के राजा तक्षक द्वारा डसे जाने के श्राप के बाद उन्होंने भगवान धनवंतरी को बुलावा भेजा, ताकि तक्षक के जहर को तोड़ निकाला जा सके।सूचना पर धनवंतरी परिक्षित से मिलने जा रहे थे। तभी ये बात तक्षक को पता चली और वे चिंतित हो गए कि यदि धनवंतरी ने उन्हें दवा बता दी, तो श्राप निष्फल हो जाएगा। इस पर उन्होंने तरकीब सोची और लकड़ी बनकर उनके मार्ग में आ गिरे। तभी धनवंतरी की पीठ में खुजली हुई और उन्होंने उसी लकड़ी को उठाकर पीठ पर खुजला लिया। इस पर तक्षक ने फौरन ही नाग का स्वरूप रख उन्हें डस लिया।
कहा जाता है कि जिस स्थान पर तक्षक ने धनवंतरी को डसा था ये वही स्थान है जिसे अब तक्षकेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है। बाद में ईश्वर की कृपा से धनवंतरी ठीक हुए और इस स्थान को तक्षकेश्वर नाम दिया गया। यहां कई प्रजाति के नाग अक्सर ही देखने मिलते हैं। हालांकि सावधानी बरतने पर ये किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते।
तक्षकेश्वर मंदिर के पास ही एक कुण्ड व प्राकृतिक झरना स्थित हे जिसे ताखाजी कुण्ड कहते हे पुराणों में इसका काफी महत्व बताया गया हे माँ गंगा के समान फल देने वाला ये कुण्ड अपने आप में कई रहस्य छुपाये हे इसकी गहराई आज तक कोई पता नहीं कर पाया साथ ही कितनी भी भीषण गर्मी हो इसमें कभी पानी की कमी नहीं होती इसके आसपास की सुंदरता बस देखते ही बनती हे । सभी एक बार जरूर पधार कर इस कुण्ड में स्नान कर यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य को जरूर देखे ।