परिवार के साथ बैठ कीर्तन करें घर ही बैकुंठ बन जायेंगा – स्वामी आनन्दस्वरूपानंदजी सरस्वती

मन्दसौर। श्री केशव सत्संग भवन खानपुरा मंदसौर पर दिव्य चातुर्मास पूज्यपाद 1008 स्वामी आनन्दस्वरूपानंदजी सरस्वती ऋषिकेश के सानिध्य में प्रारंभ हो चुका है। स्वामी जी द्वारा प्रतिदिन प्रात: 8.30 से 10 बजे तक श्रीमद् भागवद् महापुराण के एकादश स्कन्द का का वाचन किया जा रहा है।
रविवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए स्वामी श्री आनन्दस्वरूपानंदजी सरस्वती ने कहा कि हमें हमारें मन को भगवान की भक्ति में लगाकर मन और इंद्रियों को काबू में करना सिखना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार सत्संग को सुने और ध्यान रखें कि संत महात्मो को सुनते समय श्रवण और दृश्टि दोनों उनकी ओर होना चाहिए। कीर्तन करते समय में आपके मन में रोमांच होना चाहिए प्रभु भक्ति में खो जाना चाहिए सांसारिक चीजों को भुलकर पूरी तरह से कीर्तन में रम जाना चाहिए। लेकिन हमारे साथ उल्टा है हम बैठगे जरूर सत्संग या कीर्तन में लेकिन हमारा मन तो सांसारिक जीवन में ही लगा रहता है इसलिए मोह को त्याग कर मन को एकाग्र कर सत्संग सुने और कीर्तन करें।
स्वामीजी ने कहा कि आप आपके परिवार के साथ सुबह या शाम जब भी समय मिलें 10 से 15 मिनिट जब सभी घर के सदस्य घर में मौजूद हो तब एक साथ भगवान का भजन करें कीर्तन करें उनका नाम लें। इससे घर का वातावरण शुद्ध होगा मन में शांति आयेगी और आपका घर ही बैकुंठ बन जायेगा। जिस घर में पवित्र भाव से भगवान का नाम लिया जाता है वहां पर कभी अशांति नहीं होती है इसलिए परिवार के साथ बैठकर कीर्तन अवश्य करें।
भगवान का जन्म नहीं होता है वे अजन्म है
स्वामी जी ने बताया कि हम भगवान का जन्मोत्सव मनाते है यह केवल हमारे समझने के लिए है क्योंकि भगवान तो अजन्म है उनका जन्म नहीं होता है वे तो प्रकट होते है इसलिए भगवान का प्रकटोत्सव मनाया जाता है। संसार में पाप की समाप्ति हेतु भगवान प्रकट होते है।
कार्यक्रम के अंत में भगवान की आरती उतारी गई एवं प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर जगदीशचन्द्र सेठिया, कारूलाल सोनी, पं षकरलाल त्रिवेदी, विक्रमंिसंह झाला, जगदीश गर्ग, आर सी पंवार, इंजी आर सी पाण्डे, पं शिवनारायण शर्मा, प्रवीण देवडा, घनश्याम भावसार, शंकरलाल सोनी, रामचंद्र कोकन्दा, बाल किशन चैधरी, महेष गेहलोद सहित बडी संख्या में महिलाएं पुरूष उपस्थित थे।