पहले बेटी कि नजर में माता पिता से बढ़कर कुछ नहीं था और अब माता पिता को पहचानने से इंकार कर देती है – पं श्री शास्त्री जी

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पं श्री शास्त्री जी ने व्यास पीठ से गौ शाला अध्यक्ष एवं समिति कि गौ माता कि अच्छी सेवा करने कि प्रसंशा कि
कथा के अवसर पर श्री शास्त्री जी ने आशीर्वचन के साथ विधायक श्री डंग एवं पत्रकारों का किया अभिनंदन
सीतामऊ।सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित भीमाशंकर जी शास्त्री ने कथा का ज्ञान अमृत पान करते हुए कहा कि भागवत के तीसरे अक्षर व से वैराग्य की व्याख्या करते हुए कहा कि जीवन में आश्क्ती प्राप्त व्यक्ति भगवत ज्ञान को प्राप्त कर लेता है श्री शास्त्री जी ने कहा कि आज की स्थिति में यह है कि जिस दिन व्रत उपवास होता है उसे दिन हर दिन से ज्यादा खा रहे हैं। जो ज्यादा खा रहे हैं उनका अपने मन पर काबू नहीं है जो मन करता है वह कर रहे हैं मन पर अपना काबू होना चाहिए।
श्री शास्त्री जी ने कहा कि आज के मनुष्य का मन अपनी थाली में कर रहे भोजन से हटकर दूसरे के भोजन देखकर विचलित हो जाते हैं उधर ध्यान चला जाता है जो अपने पास है उसी में संतुष्ट रहना चाहिए। जिसने मन पर काबू पा लिया उसने राम रतन धन प्राप्त कर लिया।सुखी हो गया। शास्त्री जी ने माता पिता का पुत्री के प्रति प्रेम प्रसंग सुनाते हुए कहा कि बेटी की नजर में माता पिता से बढ़कर कुछ नहीं होता है पर आजकल सुनने में आता है की बेटी सोशल मीडिया से ब्वायफ्रेंड की बात मानकर जन्म देने वाले अपनें माता पिता पर प्रहार करने से नहीं चूक रही है और माता पिता को पहचानने से भी इनकार कर देती है।
श्री शास्त्री जी ने उपस्थित माता बहनों भक्तों से आह्वान करते हुए कहा कि हमारे बेटा बेटी संस्कारित वातावरण में रहना चाहिये उन्हें मोबाइल फोन की नहीं बल्कि संस्कार की आवश्यकता है से शास्त्री जी ने कहा कि बेटी को पढ़ा लिखाए परंतु बेटी का ख्याल रखना और समय पर का ब्याह कर देना चाहिए यह माता-पिता की पहली जिम्मेदारी है। श्री शास्त्री जी ने राजा परीक्षित के जन्म एवं उनकी माता उतरा का प्रसंग श्रवण कराते हुए कहा कि राजस्थान के झुंझुनू में दादी रानी सती के नाम से माता उत्तर का बहुत बड़ा मंदिर हैं। माता सती के रूप में नीमच और राजस्थान में बड़ी संख्या में भक्ति पूजा करते हैं। शास्त्री जी ने कहा कि ज्योतिषियों ने राजा परीक्षित का नामकरण करते हुए कहां की इनकी उम्र सर्प दंश के कारण ज्यादा नहीं होगी। तथा भागवत कथा के श्रवण से अकाल मृत्यु नहीं होगी।
गौ शाला अध्यक्ष एवं समिति के गौ माता कि सेवा कि प्रसंशा कि
शास्त्री जी ने कहा कि युधिष्ठिर महाराज गाय और बैल को लेकर धर्म की प्रचार को के लिए निकले बैल आकाश है तो गाय पृथ्वी हैं। पंडित से शास्त्री जी ने श्री हंडिया बाग गौशाला अध्यक्ष श्री संजय जाट लाला एवं समिति को विकास गाड़ी से धन्यवाद देते हुए कहा कि यहां गौशाला में गौ माता बहुत ही आराम से निवास कर रही है। श्री शास्त्री जी ने कहा कि गौ माता की सेवा से 33 कोटि देवताओं की सेवा हो जाती है एक किसान यदि गौ माता की सेवा करता है तो वह 33 कोटि देवता की सेवा कर रहा है।
माताएं बहने सुर्फनखा कि तरह नहीं राधा सीता सावित्री कि तरह श्रंगार करें
शास्त्री जी ने कहा कि आज की माताएं बहने घंटा श्रृंगार में गुजार देता है। माता बहनों को श्रृंगार करना चाहिए पर श्रृंगार शास्त्रोंक्त सरस्वती लक्ष्मी राधा सीता सावित्री दुर्गा माता कि तरह होना चाहिए परंतु माता बहने सूर्पनखा राक्षस ने की तरह सज रही है बड़े-बड़े नाखून और छोटे कपड़े पहन कर जो दिखावा करती हैं वह एक पशुता की निशानी है। श्री शास्त्री ने कहा कि गौ माता में भगवान ने गंगा और लक्ष्मी को भी गोमूत्र व गोबर में वास प्रदान किया है श्री शास्त्री ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि मैं गाय पालन कर रहा हूं वह गलत है क्योंकि गौ हमारा पालन कर रही है हम गौ माता का पालन नहीं कर रहे हैं।
गौ माता कि सेवा के लिए आगे आने का आह्वान
इस अवसर पर व्यास गादी से सभी उपस्थित भक्तों से गौ माता की सेवा हेतु आगे आने का संकल्प को लेकर कहा कि हम घर पर बहुत माता को नहीं पालन कर सकते हैं तो वह वार्षिक सहयोग राशि गौशाला में प्रदान कर गौ माता की सेवा में सहभागिता कर सकते हैं। श्री शास्त्री जी ने कहा कि गौशाला के साथ-साथ मंडी शाला का भी में भक्तों से खोलने का आह्वान करता हूं क्योंकि गौ माता का तो हम पालन कर रहे हैं पर बेल को यूं कह कर भेज दिए जाते हैं कि अब इनका कोई काम नहीं रहा है जब नंदी महाराज नहीं बचेंगे तो हम आगे गौ माता के दर्शन कैसे कर पाएंगे गौ माता के साथ-साथ नंदी महाराज का की भी सेवा होना चाहिए नंदी महाराज के जहां पैर पड़ जाते हैं वह खेती धरती खेती उपजाऊ हो जाती है। शास्त्री जी ने सभी से गौ चरनोई भूमि छोड़ने का आह्वान किया और कहा कि जिसने गो चरनोई भूमि पर अतिक्रमण कर रखा है वह कभी सुखी नहीं हो सकता है। सरकार कब सजा देगी पर मेरे नारायण गोपाल कि गाय कि चरनोई पर कब्जा कर बैठ गया वो आशीर्वाद नहीं सजा देगा। जीवन में सुखी रहना है तो गौ चरनोई को छोड़ देना।
पं श्री शास्त्री जी ने कहा कि सनातन धर्म में बहुत बड़ी शक्ति है। सतयुग, त्रेता द्वापर के बाद कलयुग आया है त्रेता युग में रावण को मारा पर हम आज तक उसे मार रहे हैं।राजा परीक्षित ने कहा कि कलयुग बहुत बड़ा ताकवर है।
शास्त्री जी ने समाज सेवा के प्रति लग्न रखने वाले कथाकार का प्रसंग श्रवण कराते हुए कहा कि पं पू रामचंद्र जी केशव डोंगरे जी विश्व प्रसिद्ध कथाकार श्रीमन्नारायण के सह किर्तन डोंगरे जी महाराज ने अपनी पत्नी कि मृत्यु पर मंगल सुत्र बेचर अंतिम संस्कार किया। डोंगरे जी महाराज ने लाखों रुपए कथा के अपने समाज सेवा में दान दे दिया था। उनके जैसे कथा कार अभी दान दाता नहीं देखा।
पंडित श्री शास्त्री जी ने कहा कि कलयुग का आवास वहां होता है जहां काम क्रोध धर्म और पाप दुराचार के व्यभीचार रहता है। राजा परीक्षित को जब राजतिलक हुआ तो उनको दुर्योधन का मुकुट पहनाया गया। दुर्योधन के मुकुट में काम क्रोध धर्म और पाप का वास था ऐसे में राजा परीक्षित के सर पर कलयुग का वास हो गया। कलयुग के सवार होते ही उनको सिर्फ अपने स्वार्थ के अलावा कुछ नहीं दिखाई देने लगा।
जो जैसा करता उसे ऐसा ही फल मिलता
श्री शास्त्री जी ने राजा धतराष्ट्र ने निर्दोष हंस हंसिनी के 100 बच्चों का शिकार किया ऐसे में हंस हंसिनी बहुत विचलित हुए और उन्होंने श्राप दिया कि हम अपने बच्चों के लिए विचलित है तू भी अपने बच्चों के लिए विचलित रहेगा। पंडित श्री शास्त्री जी ने एक कहानी के माध्यम से कहा कि जो जैसा करता उसे ऐसा ही फल मिलता है एक व्यक्ति रेल में बैठने के लिए गया वहां बहुत भीड़ देखकर उसने एक नया तरीका अपनाया और कहां की इस डिब्बे में सांप घुस गया है। ऐसे में सभी यात्री उतरकर निकल गए और वह अकेला उस डिब्बे में पूरी सीट पर पैर पसार कर सो गया उसने सोचा कि अपना तारिक काम आ गया बड़ा खुश हो रहा था तीन घंटे बीत जाने के बाद एक डिब्बे में चाय वाला आया उससे पूछा भाई साहब कौन से स्टेशन आ गई। चाय वाला बोला आप जिस स्टेशन से बैठे वहीं स्टेशन पर ही हो। क्योंकि इस डिब्बे में सांप घुस गया था इसलिए रेलवे ने यह डब्बा हटाकर दूसरा डिब्बा लगा दिया और रेल चली गई।
पत्रकारों का व्यास गादी से अभिनंदन, कर दिया आशीर्वाद
कथा में उपस्थित सभी पत्रकारों का व्यास गादी से अभिनंदन करते हुए पंडित श्री शास्त्री जी ने कहा कि भगवान नारायण के पुत्र देव ऋषि के सभी पत्रकार बंधु शिष्य हैं और नारद ऐसा नाम है जिनका लिखा कभी रेड नहीं होता है ऐसे ही पत्रकार की कलम होती है जिनका लिखा पुलिस प्रशासन और हमको भी मानना पड़ता है।
मोबाईल फोन में हम अपनों को भूल गए
पंडित से शास्त्री जी ने कहा कि जीवन में सबको अपना फर्ज निभाना है परंतु कमी को भी और लालची बनकर नहीं हम यहां अपना अपना फर्ज निभाने आए हैं पंडित श्री शास्त्री जी ने कहा कि लोग भगवान कि भक्ति दर्शन करने मंदिर जाते हैं पर दर्शन करते-करते मोबाइल पर बात कर रहे हैं वह भक्ति प्रार्थना कैसे सफल हो सकती है श्री शास्त्री जी ने कहा कि हम मोबाइल का इतना उपयोग करने लगे हैं हम की अपनों को ही भूल गए हैं हम अपनों से पास होते हुए भी दूर हो गए हैं सुरेश शास्त्री ने कहा कि हाथ में घड़ी बंधी उसकी गारंटी है पर धनी की घड़ी की गारंटी नहीं है।
श्री शास्त्री जी ने मौसर को लेकर कहा कि मौसर अपने श्रद्धा के अनुसार करना चाहिए और जो लोग मौसर का खाने से कहते हैं कि पुण्य क्षीण हो जाते हैं वह गलत है क्योंकि 13 दिन का भोग भगवान को लगाते हैं वह भोग लगाने के बाद भोजन करने से पूण्य क्षीण नहीं होता है।
सनातन धर्म में कोई जाति नहीं कोई ऊंचा कोई ऊंचा नहीं
पंडित श्री शास्त्री जी ने कहा कि जात-पात हमें तोड़ रही है सब लोग अपने-अपने महापुरुषों को मानने में लगे हुए हैं भेदभाव के चक्कर में हम केवल एक संगठन की तरह सिकुड़ रहे हैं एक विराट समाज से दूर होते जा रहे हैं सनातन धर्म में कोई जाति नहीं कोई ऊंचा कोई ऊंचा नहीं सबमें नारायण समाया हुआ है इसलिए हम सब एक हैं।
पंडित श्री शास्त्री ने कहा कि व्यक्ति को घमंड नहीं करना चाहिए क्योंकि सप्ताह में 7 दिन होते हैं और 7 दिनों में अपना कर्म और व्यवहार सबको ठीक लगे ऐसा हमें बनकर रहना है और 7 दिनों में एक दिन हमको यहां से जाना है हमें पैसा बदलाव करना चाहिए की 7 दिन सातों वार और एक परिवार होता है हम को अपने परिवार से जुड़कर रहना है कभी किसी से सुनने वाली बात नहीं बोलना चाहिए सबसे अच्छा बोले और अच्छा बनकर रहे। कहते हैं कि जो अच्छा होता है उसे ही लोग सुनते हैं जैसे आम को लोग पत्थर मारते हैं और आम बदले में फल देता है पर बबुल को लोग पत्थर नहीं मारते हैं बल्कि पेड़ को ही काट कर ले जाते हैं। इसलिए हमें आम बनना है बबुल नहीं।
पंडित श्री शास्त्री जी ने राजा परीक्षित की कथा का आगे श्रवण करते हुए कहा कि परीक्षित को सातवें दिन की मृत्यु का श्राप लगा। पहले मृत्यु हो जाती तो परिजनों द्वारा उसके मुक्ति का उपाय करते थे लगता है वह मुक्ति शब्द आज मुक्ति जो मरने के बाद मुक्ति बनने की परंपरा शुरू हुई और अब मुक्ति से नुक्ता हो गया और नुक्ता कैसा हो रहा है आप सब जानते हैं शास्त्री जी ने कहा कि असल में मर्द आत्मा की मुक्ति के लिए हमें दान कर्म पूर्ण निष्ठा के साथ करना चाहिए।
श्री शास्त्री जी ने कहा कि माता बहनों से धान पीसना, दाल खांडना, बुहारी लगाना चुल्हा जलाना, पंडेरी पर पानी भरना अनजाने में पांच बार जीवों की हत्या हो जाती है उनकी हत्या के पाप से वंचित होने के लिए भगवान नारायण का स्मरण करना चाहिए वह है है।
पंडित श्री शास्त्री जी का शाल श्रीफल भेंट कर वंदन किया
कथा में पंडित से शास्त्री जी ने पूर्व मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक हरदीप सिंह डंग तथा पधारे सभी समाजसेवी जनों जनप्रतिनिधियों का आशीर्वचन के साथ अभिनंदन किया। इस अवसर पर श्री डंग व समाजसेवी गणों ने पं श्री भीमशंकर जी शर्मा शास्त्री का शाल श्रीफल फुल माला पहनाकर वंदन किया। तत्पश्चात सभी उपस्थित भक्त जनों द्वारा महा आरती के साथ कथा विश्राम किया गया।
इस अवसर पर स्वागत मंचीय संचालन को अमृत सेवा समिति अध्यक्ष डॉ अर्जुन पाटीदार शिक्षक श्री मनोल लोहारद्वारा किया गया।