भाजपा चार सीटों पर मान रही है हार, चार में फंसा पेच

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रीवा। मतदान के बाद प्रत्याशी अपने-अपने जीत हार का आंकड़ा लगा बैठे है। सिरमौर विधानसभा से सपा के प्रत्याशी लक्ष्मण तिवारी ने अपने हार की घोषणा भी कर दी आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी चुप्पी साध कर बैठे हैं। और बैठे भी क्यों ना कोई वर्षों पुरानी जमीनी कार्यकर्ता की पीठ पर छुरा घोप कर नेता का चोला ओढ़ने के लिए टिकट खरीद कर आया तो राजनीति की सीढ़ी ही आम आदमी पार्टी से करनी शुरू की कांग्रेस प्रत्याशी और कार्यकर्ताओं में जरूर उत्साह देखा जा रहा है। एक और जहां प्रदेश में कांग्रेस का सरकार बनने का दावा करते हुए रीवा मऊगंज से ऑटो विधायक कांग्रेस के होने का दावा कर रहे हैं। तो वही इनके दावे सुनकर भाजपाइयों के होश उड़ रहे हुए हैं। भाजपाइयों का कहना है कि परिवर्तन की लहर में वे रीवा मऊगंज से अपनी चार सीटों खो रहे हैं। जिसमें कांग्रेस सहित अन्य दलों प्रत्याशियों के जीतने की आशंका जताई है। राजनीति के गलियारों में इस बात की हवा तेज चल रही है कि भाजपा के हाथ से गुढ़, मऊगंज, त्योथर और सिरमौर की सीट खिसक रही है। वहीं सेमरिया विधानसभा के बारे में चर्चा है कि वहां त्रिकोणीय संघर्ष फस गया है। एक ओर जहा भाजपा कांग्रेस अपने-अपने जीत के दावे कर रही है। तो वही दूसरी ओर बसपा भी 3 दिसंबर की ओर टकटकी लगाए बैठी है।
दिग्गजो के दिलो की बढ़ रही धड़कने, मन को दे रहे सात्वना
रीवा और देवतालाब विधानसभा से लगातार विधायक बनने वाले दिग्गज भी परिवर्तन की लहर से सहमे हुए हैं प्रदेश के अंदर चलने वाली परिवर्तन की बयार से रीवा विधायक एवं जनसंपर्क मंत्री राजेंद्र शुक्ला एवं देवतालाब विधानसभा के प्रत्याशी विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के दिलों की धड़कनें बढ़ने लगी है। रीवा में हुए पंचायत चुनाव का परिणाम और नगर निगम से भाजपा का पांव उखाड़ना इस ओर दर्शाता है। कि जनता भाजपा से ऊब चुकी है। रीवा विधानसभा में भले ही भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र शुक्ला के जीत की हवाएं जोरों पर है। लेकिन लोग दबी जीभ से राजेंद्र शर्मा का भी नाम ले रहे है।
लोग दबी जुबान पर कांग्रेस प्रत्याशी इंजीनियर राजेंद्र शर्मा को भी काम नहीं आ रहे हैं। रही बात जहां देवतालाब विधानसभा की तो वहां भाजपा प्रत्याशी विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम तीन ओर से गिरे हुए हैं। एक और जहां उनका हमेशा टक्कर देने वाले सपा प्रत्याशी सीमा जयवीर सिंह है। तो वहीं दूसरी ओर उनके सामने भतीजा पद्मेश गौतम कांग्रेस का झंडा लेकर खड़े हैं पद्मेश गौतम का तो देवतालाब विधानसभा में व्यक्तिगत वोट नहीं है। उनके खाते में जो वोट जाएगी वह कांग्रेस का वोट बैंक माना जा रहा है।
साथ ही कुछ ब्राह्मण वोट भी पद्मेश गौतम के साथ बतौर सहन भूति जुड़ गए हैं। लेकिन सीमा जयवीर सिंह की बात करें तो उनके व्यक्तिगत वोट ही भाजपा प्रत्याशी को हिलाने के लिए काफी है।