समस्यातालरतलाम

निजी स्कूलों की तानाशाई से छात्र -छात्राएं और पालक हो रहे परेशान, छपे मुल्य से अधिक रुपए में बेची जा रही पुस्तकें 

 

 

किशनगढ़ ताल

ठाकुर शंभू सिंह तंवर

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में अमूल चूल परिवर्तन किए जा रहा हे उनके द्वारा जहां शिक्षा के व्यवसायीकरण पर अंकुश लगाने के लिए नित नए प्रयोग किए जा रहे हे वही शिक्षा माफियाओं द्वारा सरकार के नियमों को धता बताकर पलकों के साथ खुली लूट की जा रही हे आलोट नगर में छोटे बड़े कई निजी विद्यालय संचालित हे जिनके द्वारा या तो हर वर्ष ड्रेस या कोर्स बदल दिया जाता है।

ओर इन्हे खरीदने के लिए भी एक दुकान निर्धारित कर रखी हे और खास बात यह हे की दुकानदार द्वारा जो किताबे दी जा रही हे वह भी प्रिंट रेट से बेची जा रही हे जिसकी शिकायत भाजपा पार्षद रीना अनिल भरावा ने जिला शिक्षा अधिकारी कृष्णकांत शर्मा से की हे इन किताबों की कई पालक गणों ने आनलाइन कीमत तलास की तो प्रति किताब में 150 से 200 रुपए का अंतर आ रहा हे वही 1200 रुपए की ड्रेस 2200 से 2500 रुपए में बेची जा रही हे इस प्रकार पलकगणों की जेब पर डाका डाला जा रहा हे और वे अपने बच्चो की खुशी के लिए शिक्षा माफिया द्वारा लादे गए भार को मजबूरन वहन कर रहे हैं ।

ये तो शुरुवात हे इन विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रम या अन्य गतिविधियों के नाम पर पूरे वर्ष भर पलकों से राशि वसूली जाती हे

जहा जिलाधीश के स्पष्ट निर्देश हे की किसी भी विद्यालय द्वारा बार बार कोर्स या ड्रेस नही बदले जाएंगे और ये सभी सामग्री सभी दुकानों पर उपलब्ध रहेगी कोई भी एक दुकान से लेने के लिए पालक को बाध्य नही किया जाएगा लेकिन कई विद्यालय इसका पालन नहीं कर रहे हे और आज भी इन निजी विद्यालयों द्वारा अपनी अपनी दुकानें अधिकृत की गई हे जहा पर बच्चो की भीड़ पड़ रही हे और ये उनसे मनमाना शुल्क वसूल रहे स्कूल की ड्रेस में ब्लेजर भी शामिल किया गया हे जिसको पहनने से गर्मी के समय में बच्चो को काफी परेशानी का सामना करना पढ़ रहा है।

भाजपा पार्षद रीना भरावा ने कहा की शिक्षा माफियाओ द्वारा की जा रही खुली लूट की शुक्ष्मता से जांच की जाए ।

ताकि आम जनता को इस ठगी से बचाया जा सके खासकर गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवार बच्चो की शिक्षा पर हो रहे भारी भरकम व्यय से काफी परेशान हैं।

अगर समय रहते कार्यवाही नही की गई तो प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से शिकायत की जाएगी।

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