मुस्लिम परिवार ने बेटे की शादी में राम जी कि जय जय कार के साथ करवाया सुंदरकांड के पाठ

आयोजनकर्ता बोले ऊपर वाले ने एक समान पैदा किया,धरती पर आने के बाद जाति, धर्म बना
कुचड़ौद। गांव में मुस्लिम परिवार में एक अनोखी शादी हुई। जिसमें परिवार मुस्लिम होते हुए भी इन के द्वारा सुंदरकांड के पाठ करवाए गए। यह सुन एवं देखकर लोगों ने खुशी जाहिर की। एवं आयोजन कर्ता के ऐसे निर्णय की प्रशंसा की। गांव सहित अंचल में यह पहला मामला है। जिसमें इस तरह मुस्लिम की शादी में हिंदू धर्म ग्रंथ रामायण के सुंदरकांड के पाठ हुए। यह आश्चर्यजनक देखने को मिला। इससे पहले गांव में आज तक हिंदू, मुस्लिम या जैन धर्म के किसी भी परिवार में शादी, मांगलिक कार्य या अन्य आयोजन हुए। पर किसी भी संप्रदाय के लोगों ने दूसरे धर्म ग्रंथ गीता, रामायण, कुरान या सुंदरकांड के पाठ नहीं कराए गए।
गांव वालों ने तारीफ करते हुए खुशी जताई
मुस्लिम द्वारा हिंदू धर्म के सुंदरकांड के पाठ करवाने की गांव वालों ने तारीफ करते हुए खुशी जताई। एवं एक दूसरे के धर्म का इसी तरह सम्मान करने की सोच रखने की जरूरत बताया। आयोजन कर्ता ने कहा कि ऊपर वाले ने सभी को एक समान बनाया है। धरती पर आने के बाद ही जाति, धर्म में बंटे हैं। राम और रहीम एक है। गीता और कुरान एक है। हनुमान जी में पूरी आस्था है। हनुमान जी सबका कार्य पूर्ण करते हैं।
गांव के नभीनूर शाह के परिवार में अपने बेटे इरफान शाह की शादी 7 मई को थी। जो मुस्लिम परिवार से हैं। इसी शादी में हिंदू धर्म ग्रंथ रामायण, रामचरितमानस के सुंदरकांड के पाठ हुए। शाह ने बताया गांव में सभी भाईचारे से रहते हैं। एक दूसरे का सम्मान करते हैं। शादी, ब्याह, मांगलिक कार्यक्रम या अन्य आयोजन में आते- जाते रहते हैं। बेटे इरफान शाह की शादी में सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। कई दिनों से सोच रहा था, हम गांव में सभी भाईचारे से रहते हैं। एक दूसरे का धर्म का सम्मान करते हैं। अपने-अपने धर्म का गुणगान तो सभी करते हैं। पर दूसरे धर्म का सम्मान करना सबसे बड़ा धर्म है। बेटे की शादी को यादगार बनाना चाहता था। इस कारण सुंदरकांड पाठ करने का विचार मन में आया। यह विचार मैंने अपनी पत्नी, बेटे, माता एवं भाइयों के सामने प्रकट किया। सभी ने मेरे निर्णय की प्रशंसा करते हुए कहा, ऐसी सोच हर किसी के बस की बात नहीं है। सुंदरकांड पाठ के निर्णय की सराहना करते हुए सहमति दी। सोच रहा था मुस्लिम परिवार निर्णय खुश नहीं होंगे। पर सभी परिवार जनों एवं भाइयों ने मेरे निर्णय की प्रशंसा कर, सुंदरकांड के पाठ पर सहमति जताई। हिंदू धर्म में बताया गया हनुमान जी से शक्तिमान कोई नहीं है। इनका नाम लेने मात्र से सभी कार्य सफलता पूर्वक होते हैं। इसी आस्था से सुंदरकांड के पाठ करवाए। शाम को हनुमान जी की पूजा अर्चना करने के बाद, सुंदरकांड के पाठ विधि विधान से करवाए। सुंदरकांड के पाठ का वाचन करने वालों का सम्मान किया गया।
मौलाना ने भी कि तारीफ- मैंने सुंदरकांड के पाठ करवाने की बात परिवार से पहले मौलाना मुन्ना मंसुरी को बताई, तो मौलाना ने मेरी इच्छा की तारीफ करते हुए बताया, एक दूसरे के धर्म का सम्मान करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
गांव में हम हिंदू मुस्लिम को एक परिवार मानते हैं। मेरे पिता शुभान शाह बस्ती में फेरी लगाकर आटा मांग लाते थे। वह हिंदू, मुस्लिम, जैन सभी परिवार से मिलता था। उन्होंने बताया था ईश्वर अल्लाह में भेदभाव नहीं करना। राम रहीम एक है। गीता और कुरान एक है। दूसरों से भी अपेक्षा है, ऐसे ही धर्म को लेकर भेदभाव ना करते हुए एक दूसरे के धर्म का सम्मान करें। ताकि आने वाली पीढ़ी धर्म को लेकर गुमराह ना हो। क्योंकि ईश्वर के घर से अपन सब एक समान उत्पन्न हुए। जन्म लिया। जाति, धर्म, मजहब यह सब धरती पर आने के बाद बने हैं।
शाह ने बताया बेटे इरफान शाह की शादी में हिंदू धर्म के लोगों के लिए सुंदरकांड के पाठ आयोजन करवाया। ऐसे ही मेरे परिवार मुस्लिम भाइयों के लिए भी तकरीर और मिलाद शरीफ रखी गई। शाह ने बताया हिंदू परिवारों के साथ ही पले बड़े है। हम तीनों भाई हमारी वालिदा अम्मी जान कुबरा बाई को, वालिदा अम्मी जान ना कहते हुए *बाई* बुलाते हैं।
शाह की माता कुबरा बाई ने बताया बेटे ने अपने बेटे की शादी में सुंदरकांड पाठ की बताया। तो मन बड़ा प्रसन्न हुआ। आपस में भाईचारा प्रेम, अमन चेन, शांति बनी रहे। हनुमान जी से यही आशीर्वाद चाहते हैं।