श्रीराम से दूरी बनाकर सोनिया गांधी ने ठोकी ताबूत में आखिरी कील

क्या गांधी परिवार का राजनीतिक अंत करीब आ चुका है
राहुल गांधी की न्याय यात्रा और बिखरती कांग्रेस
✍️ चैतन्य सिंह राजपूत
मन्दसौर मध्यप्रदेश 7722918506
एक समय था जब लोग बहुत भावुक और भोले भाले होते थे तब कांग्रेसी नेताओं ने जनता की भावनाओं का जमकर दुरुपयोग किया और गलत इतिहास पढ़ाकर देश की जनता को कांग्रेसी सोच का गुलाम बना दिया था। अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिलते ही जनता कांग्रेस की गुलाम बना दी गई। आमजन की खोपड़ी में फिट उस सोच को बदलने में जनसंघ और फिर भाजपा को लगभग 6 दशक लग गए। आज जब अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर तैयार हुआ तो देश के सनातन धर्म के अनुयायियों को पूर्ण विश्वास हो गया की भाजपा जो कहती है वो करती है।
गांधी परिवार से उठता भरोसा
पिछले 10 वर्षों से देश में हो रहे विकास, आतंक का अंत, कश्मीर से आर्टिकल 370 का हटाना और दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत देखकर आमजन बहुत खुश है और यही खुशी कांग्रेस का दुख दिन पर दिन बड़ा रही है। उधर कॉमेडियन की पहचान बना चुके राहुल गांधी की न्याय यात्रा चल रही है जिससे आमजन कितना कांग्रेस से जुड़ रहा है यह तो कहना मुश्किल है लेकिन आए दिन कांग्रेस के नेताओं का भाजपा में शामिल होना बताता है की कांग्रेसी नेताओं को ही राहुल गांधी सोनिया गांधी प्रियंका गांधी पर भरोसा नहीं रहा है इसीलिए वो अपना भविष्य भाजपा में तलाश रहे हैं। यानी जिस गांधी परिवार के नाम से कांग्रेस नेता चुनाव जीत जाया करते थे सरकारें बन जाया करती थी उस गांधी परिवार की हालत यह हो गई है की आमजन छोड़िए कांग्रेसी नेता ही गांधी परिवार पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। तो क्या यह मान लिया जाए की गांधी परिवार का राजनीतिक अंत करीब है ?
कांग्रेस से क्यों उठा जनता का भरोसा
एक जमाना था जब कांग्रेसी परचम पूरे देश में लहराता था लेकिन धीरे धीरे लोगों को समझ आने लगा की सच क्या है झूठ क्या है। आज हालात यह है की कांग्रेस सिमटती जा रही है, इसका कारण कांग्रेस का एक समाज विशेष को खुला समर्थन और सनातन धर्म को मानने वालों की अनदेखी करना। सनातन धर्म को बढ़ावा ना देकर अन्य धर्मों को आगे लाना। आतंकवाद एवं कश्मीर समस्या को समाप्त करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाना और कांग्रेस के ताबूत में आखरी कील ठोकने का काम सोनिया गांधी ने कर दिखाया जब उन्होंने रामलला के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का न्यौता ठुकरा दिया। कांग्रेस के इस कदम से भारत की जनता को विश्वास हो गया की कांग्रेस और उसके नेता प्रभु श्रीराम के खिलाफ है इसलिए लोग दूर होने लगे।
नाथ बंधु बने संदिग्ध
कांग्रेसी सूबे में कमलनाथ और नकूलनाथ संदिग्ध बन चुके हैं, अब कांग्रेस नेताओं को नाथ बंधुओं पर विश्वास नहीं रहा है, दोनों के माथे पर उभरी लकीरों को देखकर कोई भी कह सकता है की ये बाप बेटे अपना कारोबार बचाने के चक्कर में कभी भी भाजपा की ओर गुलाटी खा सकते है। यह देखकर अन्य कांग्रेस नेता भी भाजपा के साथ जाने लगे हैं। सुरेश पचौरी, गजेंद्रसिंह राजुखेड़ी, संजय शुक्ला, विशाल पटेल और भोपाल जिला कांग्रेस अध्यक्ष सहित लगभग 15 कांग्रेसी आज भाजपाई हो गए। यह सिलसिला अब जारी रहेगा क्योंकि कांग्रेस नेताओं को अच्छे से पता है की अभी मोदी फिर अमित शाह उनके बाद योगी या नितिन गडकरी जैसे धुरंधर खिलाड़ी भाजपा को लंबी पारी खेलने में मददगार साबित होंगे।
मन्दसौर नीमच लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस के पास खिलाड़ी नहीं
भाजपा ने पहली ही सूची में मन्दसौर नीमच जावरा संसदीय क्षेत्र से सांसद सुधीर गुप्ता पर भरोसा जताते हुए अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया लेकिन कांग्रेस के पास ऐसा कोई खिलाड़ी नहीं जो यह मैच कांग्रेस को जीता दे। सभी कांग्रेस नेताओं को लग रहा है की चुनाव लड़ना और पैसा बर्बाद करना है क्योंकि मोदी की सुनामी उन्हें टिकने नहीं देगी इसलिए क्लीन बोल्ड होने से अच्छा है इस मैच से दूर रहो। इधर भाजपा ने प्रदेश में 24 लोकसभा क्षेत्र में अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए, सभी लोकसभा क्षेत्र में अपने चुनावी रथ रवाना कर दिए और उधर कांग्रेस में अभी उम्मीदवारों के नामों पर विचार ही चल रहा है इससे हालात का अंदाजा लगाया जा सकता है।