मल्हारगढ़मंदसौर जिला
ज्योतिबाफुले का जीवन और उनके विचार व महान कार्य आज भी प्रेरणा का स्त्रोत बने हुए है – अनिल शर्मा

मल्हारगढ़। महान समाज सुधारक शिक्षाविद ज्योतिबाफुले का जीवन और उनके विचार व महान कार्य आज भी लोगो के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बने हुए है,आज देश के महान समाज सुधारक गरीबो,महिलाओं,दलितों एवं पिछड़ावर्ग के उत्थान के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती है उनका जन्म 11 अप्रेल 1827 को पुणे में हुवा था।
उक्त बात मल्हारगढ़ ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अनिल शर्मा ने मंडलम एवं नगर कांग्रेस कमेटी द्वारा गुरुवार को महात्मा फुले की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही शर्मा ने कहा कि महात्मा फुले ने समय रहते शिक्षा के महत्व को पहचाना,उन्होंने महसूस किया कि दलितों ओर समाज के तमाम तबकों की महिलाएं शिक्षा की कमी के कारण गुलामी की स्थिति में जी रही है।उन्होंने कहा कि इस दुर्भाग्य की जड़ अज्ञानता है शिक्षा का महत्व जानकर उन्होंने ताने सहकर ओर गालियां सुनकर भी अपनी पत्नी को पढ़ाया।ज्योतिबाफुले ने लगातार भारतीय समाज मे व्याप्त बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई।वह बाल विवाह विरोधी ओर विधवा विवाह के समर्थक थे।शर्मा ने कहा कि वह अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए लड़े,उन्होंने 1848 में पुणे में लड़कियों के लिए देश का पहला महिला स्कूल खोला।फुले दम्पत्ति ने देश मे कुल 18 स्कूल खोले थे।ज्योतिबाफुले ने दलितों और वंचितों को न्याय दिलाने के लिए सत्यशोधक समाज की स्थापना की थी।समाज सुधारक के इन अथक प्रयासों के चलते 1888 में मुंबई की एक विशाल सभा मे उन्हें महात्मा की उपाधि दी गई।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में प्रातः 9 बजे ज्योतिबाफुले की प्रतिमा को स्नान करवाकर उनकी विधि विधान के साथ पूजा अर्चना कर मौजूद कांग्रेस जनों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
इस मौके पर जिला कांग्रेस के महामन्त्री अनिल बोराना,वरिष्ठ कांग्रेस नेता घीसालाल उणियारा, नगर कांग्रेस अध्यक्ष रामप्रसाद फरक्या,मंडलम अध्यक्ष द्वय किशोर उणियारा, दिनेश गुप्ता काचरिया,अम्बालाल पाटीदार,पप्पू गुर्जर,किशनलाल चौहान,बंशीलाल पाटीदार काचरिया,पंकज बोराना,राजेन्द्र महावर,आदि मौजूद थे।
उक्त बात मल्हारगढ़ ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अनिल शर्मा ने मंडलम एवं नगर कांग्रेस कमेटी द्वारा गुरुवार को महात्मा फुले की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही शर्मा ने कहा कि महात्मा फुले ने समय रहते शिक्षा के महत्व को पहचाना,उन्होंने महसूस किया कि दलितों ओर समाज के तमाम तबकों की महिलाएं शिक्षा की कमी के कारण गुलामी की स्थिति में जी रही है।उन्होंने कहा कि इस दुर्भाग्य की जड़ अज्ञानता है शिक्षा का महत्व जानकर उन्होंने ताने सहकर ओर गालियां सुनकर भी अपनी पत्नी को पढ़ाया।ज्योतिबाफुले ने लगातार भारतीय समाज मे व्याप्त बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई।वह बाल विवाह विरोधी ओर विधवा विवाह के समर्थक थे।शर्मा ने कहा कि वह अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए लड़े,उन्होंने 1848 में पुणे में लड़कियों के लिए देश का पहला महिला स्कूल खोला।फुले दम्पत्ति ने देश मे कुल 18 स्कूल खोले थे।ज्योतिबाफुले ने दलितों और वंचितों को न्याय दिलाने के लिए सत्यशोधक समाज की स्थापना की थी।समाज सुधारक के इन अथक प्रयासों के चलते 1888 में मुंबई की एक विशाल सभा मे उन्हें महात्मा की उपाधि दी गई।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में प्रातः 9 बजे ज्योतिबाफुले की प्रतिमा को स्नान करवाकर उनकी विधि विधान के साथ पूजा अर्चना कर मौजूद कांग्रेस जनों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
इस मौके पर जिला कांग्रेस के महामन्त्री अनिल बोराना,वरिष्ठ कांग्रेस नेता घीसालाल उणियारा, नगर कांग्रेस अध्यक्ष रामप्रसाद फरक्या,मंडलम अध्यक्ष द्वय किशोर उणियारा, दिनेश गुप्ता काचरिया,अम्बालाल पाटीदार,पप्पू गुर्जर,किशनलाल चौहान,बंशीलाल पाटीदार काचरिया,पंकज बोराना,राजेन्द्र महावर,आदि मौजूद थे।