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मैं मंदसौर संसदीय क्षेत्र हूँ..,संसदीय क्षेत्र का दोनों प्रत्याशियों को पत्र

राजनीतिक टिप्पणी

मैं मंदसौर संसदीय क्षेत्र हूँ..,संसदीय क्षेत्र का दोनों प्रत्याशियों को पत्र

लेखक -ललित एम पटेल

मंदसौर 7049016361

 

 

मैं मंदसौर संसदीय क्षेत्र हूं मैं इतना भोरा ढारा हूँ कि दशकों तक एक ही सांसद को झेलने की मुझमें अपार क्षमता है चाहे फिर मेरा समुचित विकास हो या न हो। क्यों क्योंकि मैं बहुत सीधा हूँ या यों कहो कि इन खद्दर धारियों के झूठे जुमले मेरे मासूम दिल को बहुत जल्दी पिघला देते हैं, लेकिन जितने के बाद आज तक किसी सांसद ने मुझे न तो कोई बहुत बड़ा उद्योग दिया, न मेरे सीने से निकलकर चंबल में पहुँच रही शिवना को शुद्ध कर पाया, न मेरे बाजुओं में बसे नारायणगढ़, मनासा बेल्ट में ईसबगोल का केंद्रीय प्रसंस्करण मंत्रालय से कोई बड़ा प्लांट डल पाया, न मेरे कलेजे में बसने वाले दलौदा को कभी फूड प्रोसेसिंग पार्क मिल सका, न ही मेरे छोटे बेटे जावरा को अपने समुचित विकास के लिए कभी सहयोग मिल सका, न कभी मेरे मझले पुत्र नीमच की सर्वांगीण विकास वाली किस्मत चमक सकी और सबसे खास मेरा बड़ा बेटा मंदसौर शहर जो पूरे संसदीय क्षेत्र परिवार का बड़ा घर होने के नाते न तो कभी अपने विकास के लिए हाथ फैला सका और न ही केंद्र ने उसकी इस उदारता पर रहम खाया। कई सांसद आए और चले गए और कुछ तो एक नहीं अनेक बार विजयश्री मुझसे लेकर दिल्ली जा बैठे, लेकिन मेरे वांछित विकास पर किसी सांसद ने कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया, जिसे मैं कह सकूं कि हां यह सिर्फ मेरे संसदीय क्षेत्र में हुआ। खैर पुराने सांसदों ने भले विकास न करवाया हो, लेकिन विकास की बात तो की, किन्तु वर्तमान दोनों ही दलों के प्रत्याशी विकास के वी तक भी नहीं पहुँच रहे हैं। भाजपा के लिए इसका कारण देश के पीएम नरेंद्र मोदी की लहर है तो वहीं कांग्रेस के प्रत्याशी व इनके साथी भी इस लहर को तोड़ने के लिए सिर्फ और सिर्फ मोदी… मोदी… ही रटे जा रहे हैं। अरे लेकिन कोई मेरी भी तो सुन लो कि मैं क्या चाहता हूँ मुझे कोई लेना देना नहीं है मोदी, सोनिया, राहुल, शाह से मुझे तो बस अपने क्षेत्र में विकास चाहिए जो करवा दो भैया…। आज़ादी के बाद से मैं मंदसौर संसदीय क्षेत्र इसी आस मैं हूँ कि मेरे आँचल में भी कोई बड़ा उद्योग आए कोई उल्लेखनीय विकास हो।

हां एक और महत्वपूर्ण बात कि अब तक जो केंद्र से मुझे मिला वह उल्लेखनीय है, लेकिन सिर्फ मंदसौर को मिला यह नहीं कहा जा सकता। अभी गांधी चौराहे पर हुए दो राजनीतिक कार्यक्रम में मैं मंदसौर संसदीय क्षेत्र लालच से लाई गई भीड़ में किसी कोने में बैठकर नेताओं के भाषण सुन रहा था। लालच से तो मैं भी पहुँचा था लेकिन मुझमें न रुपयों का लालच था न किसी साड़ी का मैं तो सिर्फ यह लालच लेकर गया कि शायद मेरे विकास की बात होगी, लेकिन वहाँ सिर्फ यह कहा गया कि हमने मेडिकल कॉलेज दिया, भारतमाता प्रोजेक्ट का 8 लेन मार्ग दिया, नई ट्रेनों की सुविधा दी, रेलवे का दोहरीकरण दिया और भी बहुत कुछ मुझे देने की बात कही गई, लेकिन मैं पूछता हूँ आपने ये जो भी दिया ये तो सभी संसदीय क्षेत्रों को मिला है। मेडिकल कॉलेज मोदी सरकार ने लगभग हर जिले को दिए, भारतमाला प्रोजेक्ट में इंजीनियरिंग सर्वे में जो मार्ग लिया गया उसमें भारत की दिल्ली-मुम्बई मार्ग की भौगोलिक अवस्था में मंदसौर के कुछ इलाके आना तय थे, रेलवे अपनी विस्तारवादी सोच से आगे बढ़ ही रहा है क्योंकि देश का यातायात बढ़ता चला जा रहे। खैर आप तो सत्ताधारी हैं आप बड़े लोग हैं। मैं उनसे भी सवाल करना चाहता हूँ जो 4 बार नागदा खाचरोद से विधायक रहे हैं वे तो कम से कम यह बताएं कि मंदसौर संसदीय क्षेत्र को कौनसा बड़ा ऑटोमोबाइल आदि का उद्योग दिलवाने वाले हैं, गांधीसागर वन्य प्राणी अभ्यारण्य के लिए आप क्या सोच रहे हैं, चंबल में वाटर स्पोर्ट्स का आपके पास क्या प्लान है, संजीत में चम्बल पर ब्रिज बनाने की क्या योजना है, एनडीपीएस के फर्जी केस से किसानों को मुक्ति दिलाने पर क्या सोचते हैं। माफ कीजियेगा गुर्जर साहब आपके भाषणों और पोस्टर बैनरों में भी मैने एक लाख रुपए सालाना, सबका 25 लाख तक का बीमा आदि जैसी मुफ्तखोरी की योजनाओं से अधिक कुछ नहीं पाया। नागदा के मेरे कुछ साथी बता रहे थे कि आप जमीनी नेता हैं तो माननीय मैं वो संसदीय क्षेत्र हूँ जो कांग्रेस के भी कई दिग्गज सांसद देख चुका हूँ लेकिन बात मेरे विकास की है तो वे भी मेरी कसौटी पर खरे नहीं उतर पाए। आपसे अनुरोध है कि वाकई जमीन पर उतरिए इस चुनाव को सिर्फ पार्टी को कोई उम्मीदवार नहीं मिल रहा था तो आपको भेज दिया ऐसा आदेश छोड़कर पूरे मन से लड़िये और मेरे वांछित विकास को जमीन पर उतारिये वरन आप जीत भी जाएंगे तो दूसरी बार मुझे आपको पुनः ससम्मान नागदा भेजना पड़ेगा।

आखरी में सुधीरजी और दिलीपजी दोनों से यही विनती है कि आप मोदी को छोड़कर मेरे विकास की बात पर चुनाव लड़े। मुझे भी अच्छा लगेगा और मेरे आँचल में पल रही जनता आपको ढेरों स्नेह से परिपूर्ण कर देगी।

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