मंदसौरमध्यप्रदेश
चलो-चलो सजना शिवना के उस पार, वहां लगा भोले का दरबार-बरसोलिया

अ.भा. साहित्य परिषद की शीत काव्य गोष्ठी सम्पन्न
मन्दसौर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद मंदसौर इकाई की शीत काव्य गोष्ठी मेडी पाईंट गोल चौराहा पर सम्पन्न हुई।
इस अवसर पर दशपुर गौरव गान के गायक एवं गीतकार नन्दकिशोर राठौर को उनके दशपुर गौरव गान की नगर में सफलता के लिये बधाई देते हुए उनका सम्मान किया गया। श्री राठौर ने इस हेतु अ.भा. साहित्य परिषद एवं सभी स्नेही नगर वासियों का आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस काव्य गोष्ठी में सुरेन्द्र शर्मा (पहलवान) ने घर के बटवारे पर मुक्तक सुनाएं ‘‘अपनों पर ही जो करता है हरदम वार उ सी का नाम है परिवार’’ नामक सुंदर रचना सुनाई। अभय मेहता ने गीत ‘‘यादों का कफन मैंने ओढ़ा, तूने पहना सूर्ख जोड़ा’’ सुनाया।
चंदा डांगी ने समाज में बेटी और बहू की स्थिति पर कविता सुनाई ‘‘वधू चाहिये जो सुन्दर हो, काम में निपूर्ण हो। हमारी बैटी काम क्यों करेगी आपकी नजर में हो तो बताना।’’ अजय डांगी ने बच्चों को सीख देते हुए कविता ‘‘बच्चे यू हीं बड़े नहीं हो जाते, उन्हें पालते पालते मॉं बाप बूढ़े हो जाते’’ सुनाई।
नवोदित कवियत्री पूजा शर्मा ने बच्चों पर कविता ‘‘नूर है मेहताब है बच्चे, जमी का आफताब है बच्चे’’ सुनाई। उभरत कवि उज्जवल बारेठ ने महाभारत पर कविता कृष्ण एवं कर्ण संवाद ‘‘अंग-अंग स्वर्ण मेरा, हर स्वर्ण मेरा वर्ण है, और काल हो सक्षम मेरा नाम कर्ण है’’ सुनाया। गोपाल बैरागी ने समारोह में भोजन व्यवस्था पर व्यंग ‘‘आप खाना खा रहे बैठ के, मैं धक्के खा रहा बफेट के’’ सुनाया।
नन्दकिशोर राठौर ने इंदौर के लक्ष्मीबाई स्टेशन के पास रेल की चपेट में आने से मोरनी की मृत्यु पर मोर का एक घण्टे तक उसे उठाने का प्रयास करने की करूण कथा पर गीत ‘‘सुन मयूरी एक बात जरूरी, साथ-साथ जब हम उड़ते तो कट जाती है दूरी’’ सुनाया। हरिओम बरसोलिया ने मेले पर कविता ‘‘चलो चलो सजना शिवना के उस पार, लगा है मेले में भोले का दरबार’’ सुनाई।
विजय अग्निहोत्री ने गीत ‘‘पैसे का लालच मत कर बन्दे कुछ नहीं सार है’’ सुनाया। राजकुमार अग्रवाल ने जगजीतसिंह की गजल ‘‘याद नहीं क्या देखा था, सारे मंज़र भूल गये’’ सुनाई। नरेन्द्र त्रिवेदी ने गीत ‘‘तुम आ गये हो नूर आ गया है, नहीं तो चिरागों से लौ जा रही थी’’ सुनाया।
सरस्वती वंदना नंदकिशोर राठौर ने प्रस्तुत की। संचालन नरेन्द्र भावसार ने किया व आभार नरेन्द्र त्रिवेदी ने माना।
इस अवसर पर दशपुर गौरव गान के गायक एवं गीतकार नन्दकिशोर राठौर को उनके दशपुर गौरव गान की नगर में सफलता के लिये बधाई देते हुए उनका सम्मान किया गया। श्री राठौर ने इस हेतु अ.भा. साहित्य परिषद एवं सभी स्नेही नगर वासियों का आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस काव्य गोष्ठी में सुरेन्द्र शर्मा (पहलवान) ने घर के बटवारे पर मुक्तक सुनाएं ‘‘अपनों पर ही जो करता है हरदम वार उ सी का नाम है परिवार’’ नामक सुंदर रचना सुनाई। अभय मेहता ने गीत ‘‘यादों का कफन मैंने ओढ़ा, तूने पहना सूर्ख जोड़ा’’ सुनाया।
चंदा डांगी ने समाज में बेटी और बहू की स्थिति पर कविता सुनाई ‘‘वधू चाहिये जो सुन्दर हो, काम में निपूर्ण हो। हमारी बैटी काम क्यों करेगी आपकी नजर में हो तो बताना।’’ अजय डांगी ने बच्चों को सीख देते हुए कविता ‘‘बच्चे यू हीं बड़े नहीं हो जाते, उन्हें पालते पालते मॉं बाप बूढ़े हो जाते’’ सुनाई।
नवोदित कवियत्री पूजा शर्मा ने बच्चों पर कविता ‘‘नूर है मेहताब है बच्चे, जमी का आफताब है बच्चे’’ सुनाई। उभरत कवि उज्जवल बारेठ ने महाभारत पर कविता कृष्ण एवं कर्ण संवाद ‘‘अंग-अंग स्वर्ण मेरा, हर स्वर्ण मेरा वर्ण है, और काल हो सक्षम मेरा नाम कर्ण है’’ सुनाया। गोपाल बैरागी ने समारोह में भोजन व्यवस्था पर व्यंग ‘‘आप खाना खा रहे बैठ के, मैं धक्के खा रहा बफेट के’’ सुनाया।
नन्दकिशोर राठौर ने इंदौर के लक्ष्मीबाई स्टेशन के पास रेल की चपेट में आने से मोरनी की मृत्यु पर मोर का एक घण्टे तक उसे उठाने का प्रयास करने की करूण कथा पर गीत ‘‘सुन मयूरी एक बात जरूरी, साथ-साथ जब हम उड़ते तो कट जाती है दूरी’’ सुनाया। हरिओम बरसोलिया ने मेले पर कविता ‘‘चलो चलो सजना शिवना के उस पार, लगा है मेले में भोले का दरबार’’ सुनाई।
विजय अग्निहोत्री ने गीत ‘‘पैसे का लालच मत कर बन्दे कुछ नहीं सार है’’ सुनाया। राजकुमार अग्रवाल ने जगजीतसिंह की गजल ‘‘याद नहीं क्या देखा था, सारे मंज़र भूल गये’’ सुनाई। नरेन्द्र त्रिवेदी ने गीत ‘‘तुम आ गये हो नूर आ गया है, नहीं तो चिरागों से लौ जा रही थी’’ सुनाया।
सरस्वती वंदना नंदकिशोर राठौर ने प्रस्तुत की। संचालन नरेन्द्र भावसार ने किया व आभार नरेन्द्र त्रिवेदी ने माना।